बच्चों में अस्थमा (दमा) के लक्षण ,कारण ,आहार और घरेलू उपचार

अस्थमा (दमा) रोग क्या है ? : What is Asthma Disease in Hindi

शरीर में कफ की मात्रा अधिक हो जाने के कारण दमा (Asthma) रोग उत्पन्न हो जाता है। वैसे यह रोग अधिकतर युवावस्था और बुढ़ापे में होता है लेकिन अब बच्चे भी इस रोग से पीड़ित पाए जाते है । अस्थमा (दमा) एक सांस का रोग है जो छाती और वायु नली में उत्पन्न होता है। दमा रोग में रोगी की छाती या सांस की नली में अधिक मात्रा में कफ जम जाता है जिससे गले में खराश उत्पन्न हो जाती है। रोगी गले में जमे हुए कफ को निकालने के लिए बार-बार खाँसता है । खांसी उत्पन्न होने से रोगी को बेचैनी होने लगती है। इस रोग में रोगी का शरीर असहाय और कमजोर हो जाता है।

बच्चों में अस्थमा (दमा) : Child Asthma in Hindi

दमा रोग पर किये गये वैज्ञानिक अनुसन्धानों और की जा रही खोजों से यह ज्ञात हुआ है कि लगभग 50% रोगियों को दमे की शिकायत बचपन से ही हो जाती है । इनमें अधिकतर बच्चे आठ वर्ष की उम्र से पहले ही पीड़ित हो जाते हैं और कुछ बच्चे तो तीन वर्ष की उम्र होते होते ही इस रोग के शिकार हो जाते हैं। उपलब्ध आकड़ों के अनुसार देश में बच्चों की कुल संख्या के लगभग 5-6% तक बच्चे इस रोग से पीड़ित हैं।

चिकित्सा कार्य करते हुए हमने पाया है कि बच्चों को दमा होने पर इसका निदान काफ़ी देर से होता है। दमे से पीड़ित कई बच्चों में दमे के लक्षण होते हुए भी, इसका निदान एलर्जिक ब्रोंकाइटिस, क्रोनिक ब्रोंकाईटिस, एलवियोलाईटिस ब्रोंकोलाइटिस या रिकरूट ब्रोंकाइटिस आदि के रूप में किया जाता है।

इसका परिणाम यह होता है कि ‘दमे’ की चिकित्सा और बचाव की कोशिश शुरू नहीं हो पाती
और बच्चा बार-बार खांसी, सर्दी और सांस की तकलीफ़ भोगता रहता है। इलाज से थोड़े समय के लिए तो आराम हो जाता है लेकिन कुछ समय बाद तकलीफ़ वापिस लौट आती है। बार-बार ऐसी तकलीफ़ से बच्चा पीड़ित और निढाल तो होता ही है साथ ही शरीर में कुछ विकृत्तियां पैदा होने के अलावा बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास भी रुक जाता है। ऐसे बच्चे स्कूल में पिछड़ जाते हैं जिससे बच्चा हीन भावना से पीड़ित हो सकता है। माता पिता वस्तु स्थिति से अवगत होते नहीं और बार-बार बच्चे के बीमार होने की पीड़ा झेलते रहते हैं इसलिए ऐसी तकलीफें हों तो दमा रोग का निदान तुरन्त किया जाना चाहिए।

जांच करने वाले चिकित्सक का भी फ़र्ज है कि यदि बच्चा दमा से पीड़ित हो तो इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से माता – पिता या परिवार के लोगों को दे दें और बच्चे की देखभाल तथा सेवासुश्रुषा के विषय में आवश्यक निर्देश दे दें। सामान्यतः बच्चों में यदि निम्नलिखित लक्षण पाये जाएं तो दमा होने की सम्भावना रहती है –

बच्चों में अस्थमा के दिखने वाले शुरुआती लक्षण : Chote Bacho me Asthma ke Lakshan

(1) बार- बार सर्दी खांसी का होना ।
(2) साधारण इलाज व दवाओं से खांसी ठीक न होना और खांसी का कोई उचित कारण न मिलना ।
(3) खांसी के साथ-साथ सांस चलना तथा सांस के साथ सीटी जैसी आवाज़ आना।
(4) छाती में कफ़ खड़खड़ाना तथा सोते समय बच्चे की पसली चलना व छाती में घर्र घर्र आवाज़ आना ।
(5) थोड़ा सा दौड़ने, खेलने या सीढ़ी चढ़ने पर खांसी चलना या सांस फूल जाना
(6) एक ही मौसम में बारबार बीमार होना।
(7) बार-बार निमोनिया होना।
(8) खाने पीने की कुछ चीज़ों के खाने से सर्दी खांसी होना या सांस चलने लगना
(9) छोटी माता, खसरा, मम्स या अन्य वायरसजन्य रोग होने के बाद खांसी होना या सांस चलने लगना।

ये कुछ सामान्य लक्षण हैं जिनमें से कोई भी लक्षण हो तो ‘दमा’ होने की शंका होनी’ चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को दमा रोग और एलर्जी के विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए ताकि यह निदान हो सके कि दमा है या नहीं। दमा न हो, किसी अन्य कारण से भी ये तकलीफें हो सकती हैं उस कारण का पता भी चल जाएगा और उसका भी इलाज हो सकेगा।

बच्चों में अस्थमा के कारण : Childhood Asthma Causes in Hindi

✦ बच्चों में ज्यादातर श्वास नली में ठंड़ लग जाने के कारण या श्वांस नलिका में धूल के कण जम जाने के कारण अस्थमा होता है।
✦ यह रोग धुंआ आदि के मुंह में जाने ,ठंड़े पदार्थों अथवा ठंड़ा पानी का अधिक सेवन करने या अधिक हवा लगने के कारण से श्वास रोग उत्पन्न होता है।
✦ कुछ बच्चों में यह रोग वंशानुगत भी होता है। अगर माता-पिता में से किसी एक को अस्थमा है तो उनकी संतान को भी दमा (अस्थमा) रोग हो सकता है।
✦ प्रदूषित वातावरण में रहने से भी अस्थमा रोग होता है।
✦ वर्षा ऋतु में अस्थमा रोग अधिक होता है क्योंकि इस मौसम में वातावरण में अधिक आर्द्रता (नमी ) होती है।

बच्चों के अस्थमा का घरेलू उपचार : Childhood Asthma Home Remedies in Hindi

अस्थमा का घरेलू उपचार सरसों के तेल से (Mustard oil : Home Remedy in Asthma Disease in Hindi)

बच्चे को खांसी आती हो तो उसकी छाती पर सरसों के तेल की हलके हाथों से मालिश करें। इससे खांसी ठीक होती है और कफ की गांठ निकल जाती है।

( और पढ़े – सरसों तेल के फायदे और नुकसान )

धनिया से दमा की बीमारी का उपचार (Coriande: Home Remedies to Cure Asthma in Hindi)

चावल के धोवन के साथ धनिया और मिश्री को पीस लें और फिर उसी पानी को छानकर बच्चे को पिलाएं। इससे बच्चों के सांस रोग व खांसी दूर होती है।

( और पढ़े – धनिया के 119 औषधीय गुण और उपयोग )

तुलसी के सेवन से अस्थमा का उपचार (Basil : Benefits in Asthma Problem in Hindi)

  • एक साल से अधिक उम्र वाले बच्चे को यदि दमा अस्थमा रोग हो तो उन्हें प्रतिदिन तुलसी की 5 पत्तियां खूब बारीक पीसकर शुद्ध शहद के साथ सुबह-शाम 3-4 सप्ताह तक चटाएं। एक साल से कम उम्र के छोटे बच्चों को तुलसी के पत्तों का रस 2 बूंद शहद में मिलाकर दिन में 2 बार चटाएं। बच्चों के अस्थमा रोग के साथ-साथ श्वसन संस्थान के अनेक रोग जड़ से समाप्त हो जाते हैं।
  • बच्चों के दमा के अलावा पुरानी एलर्जिक ,पुराना सिर दर्द, पुराना माइग्रेन, सर्दी, पुराना दमा आदि रोग को ठीक करने के लिए तुलसी बहुत ही लाभकारी होती है। नित्य सुबह तुलसी की 6 से 7 हरी पत्तियां बारीक पीसकर मधु (शहद) के साथ बच्चे को चटाने से अस्थमा व अन्य रोग ठीक होते हैं।

( और पढ़े – तुलसी के 71 घरेलू नुस्खे )

अस्थमा में अदरक का प्रयोग (Ginger Benefits for Asthma Disease in Hindi)

1 चम्मच पानी के साथ लगभग 1 ग्राम अदरक के रस को सुबह-शाम लेने से दमा व श्वांस रोग ठीक होता है। आइये जाने अस्थमा के लिए आहार के बारे में –

( और पढ़े – गुणकारी अदरक के 111 लाभ )

अस्थमा रोग में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए :

1) अस्थमा के रोग में फलों का सेवन अधिक करना चाहिए।
2) रोगी को अधिक ठंडे व गर्म पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए।
3) अस्थमा के मरीज को अधिक ठंड या अधिक धूप से बचना चाहिए।
4) तरबूज का रस दमा से पीड़ित रोगियों को नहीं पीना चाहिए।
5) अस्थमा के मरीज को केला कम खाना चाहिए।इसके सेवन से एलर्जी हो सकती है।
6) देर से पचने वाले गरिष्ठ आहार का सेवन न करें।
नियमपूर्वक कुछ महीनों तक लगातार भोजन करने से दमा नष्ट हो जाता है।

अस्थमा रोग में सावधानीयां : Precautions in Asthma in Hindi

1- अस्थमा से बचने के लिए पेट में कब्ज नहीं होने देना चाहिए।
2- ठंड से शरीर का बचाव करें ।
3- शाम का भोजन सूर्यास्त से पहले, शीघ्र पचने वाला तथा कम मात्रा में लेना चाहिए।
4- प्रातः काल शुद्ध हवा में घूमने जाएं।
5- धूल-धुंए से बचे।
6- मूंगफली, आइसक्रीम ,चाकलेट से परहेज करना चाहिए।
7- फास्टफूड का सेवन न करें ।
8- लकड़ी के बुरादे ,कीटनाशक दवाओं और रंग-रोगन से बचे।

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)