गहनों से करें रोग निवारण – Gahno se Kare Rog Nivaran in Hindi

भारत में आभूषण पहनना एक परंपरा है, खासकर विवाह के बाद। ये न केवल एक स्त्री की सुंदरता को बढ़ाते हैं, बल्कि उसे स्वास्थ्य का लाभ भी पहुंचाते हैं।
स्त्रियों के गहनों पर बहुत चर्चा होती है और उसमें सच्चाई भी है। गहनें स्त्रियों की कमज़ोरी होती है। गहनें केवल शौक या सौंदर्य के ही काम आते हैं, ऐसा कदापि नहीं है। पुरातन जमाने से एक्यूप्रेशर चिकित्सा से रोग निवारण होता है। उसी एक्यूप्रेशर को ध्यान में रखते हुए स्त्रियों को गहने पहनाने का प्रचलन हुआ है, ऐसा शास्त्र बताता है।

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आभूषण पहनने के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ (Amazing Health Benefits Of Wearing Jewellery in Hindi)

गहनों से रोग निवारण कैसे होता है यह देखें –

1) माथे का टीका : सिर के मध्य से लेकर माथे तक ‘टीका’ पहना जाता है। इससे मूत्राशय के मेरिडियन पर और मस्तिष्क के पिछले ग्रंथी (पीनिअल ग्लैन्ड) पर दबाव होता है, जिससे मूत्राशय का कार्य ठीक होता है। टीका पहनने से मस्तिष्क का कार्य नियंत्रित होता है और मन को शांति मिलती है। टीका शरीर की गर्मी को नियंत्रित करता है।

2) नाक की लौंग : नाक की लौंग पहनने से, नाक के संसर्गजन्य रोगों से संरक्षण प्राप्त होता है। इसका संबंध हृदय के मेरिडियन से होता है।

3) कान की बाली : कान की बाली पहनने से मस्तिष्क का कार्य नियंत्रित होता है और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है। इससे ‘टॉन्सिल’ के संसर्गजन्य रोगों से संरक्षण होता है। यदि चांदी की बाली पहनी जाए तो प्रमाण से ज़्यादा (अत्याधिक) भूख नहीं लगती। यदि वज़न कम करने का इरादा हो तो चांदी की बाली को कान में पहनकर आजमाएँ।

यदि कान के ऊपरी हिस्से में बाली पहनी जाए तो हर्निया से संरक्षण होता है। आज-कल कानों में एक से ज़्यादा बाली पहनने का फैशन है, जो एक तरह से अच्छा है, अनेक बिंदुओं पर दबाव पड़ने से रोग दूर रहते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क, गुर्दे और गर्भाशय से जुड़ी तंत्रिका दाहिने कान से गुजरती है, जो गुर्दे और मूत्राशय को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

4) चूड़ियाँ और कड़े : चूड़ियों से कलाई पर स्थित बीजकोष और गर्भाशय के बिंदुओं पर दबाव आता है। इससे जननक्रिया से संबंधित कार्य नियंत्रित होता है। इसके मधुर आवाज से मन का स्वास्थ्य नियंत्रण में रहता है। चूड़ियों द्वारा निरंतर घर्षण स्त्रियों में रक्त परिसंचरण स्तर को बढ़ाता है। इसके अलावा चूड़ियाँ विद्युत ऊर्जा को बाहरी त्वचा के माध्यम से बाहर निकलने नहीं देती हैं और इस प्रकार ऊर्जा को शरीर में वापस भेज देती है। चूड़ियाँ पहनने से श्वास रोग, हृदय रोग की संभावना कम होती है। चूड़ी मानसिक संतुलन बनाने में सहायक है।

5) अंगूठी : अंगुलियों में अंगूठी पहनने से मस्तिष्क, आँखें और कान के प्रतिसाद बिंदुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे इन सबका स्वास्थ्य सही तरह से कार्यरत रहता है। बाएँ हाथ के छोटी अंगुली में अंगूठी पहनने से, हृदय के बिंदुओं पर कार्य होता है। हृदय के स्पंदन ठीक से होते हैं। कफ, आर्थराइटिस, जोड़ों या हड्डियों से जुड़ी समस्या है तो चांदी की अंगूठी काफी हद तक फायदा पहुँचाती है।

6) कंठभूषण (गले में पहनने की माला, चेन, मंगलसूत्र इत्यादि) : गले से लेकर वक्षस्थल तक माला पहनने से, हृदय और फेफड़ों का स्वास्थ्य सही रहने में सहायता मिलती है। कुछ प्रांतों में गले में थोड़ा कसकर माला पहनी जाती है, जिससे थाइरॉइड ग्रंथी और पॅरा थाइराइड ग्रंथी पर दबाव पड़ता है और उनका कार्य नियंत्रण में रहता है। मंगलसूत्र स्त्रियों में रक्त परिसंचरण के साथ-साथ रक्तचाप के स्तर को भी नियंत्रित व नियमित करता है।

7) कमरपट्टा या करधनी : इससे माहवारी की तकलीफों का निवारण होता है एवं पाचन क्रिया सुधारती है। इससे गर्भाशय और मूत्रपीड के बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। यह वज़न नियंत्रित करने में मदद करती है।

8) पैरों के अंगुलियों के बिछए : इनसे आँख, कान और मज्जातंतुओं के प्रतिसाद बिंदुओं पर दबाव आता है। ‘सोलर प्लेक्सस’ का असंतुलन दूर होता है, ओव्यूलेशन नियंत्रित करता है और प्रसूति वेदना कम करती है। पैरों की अंगुलियों में यदि तांबे का या चांदी का बिछुआ पहना जाए तो उच्च रक्तचाप और मस्तिष्क के विकारों पर नियंत्रण रहता है। दोनों पैरों में बिछुए पहनने से स्त्रियों का हार्मोनल सिस्टम सही रूप से कार्य करता है। बिछुए एक्यूप्रेशर उपचार पद्धति पर कार्य करते हैं, जिससे शरीर के निचले अंगों के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियाँ सबल रहती हैं।

9) पायल : पायल स्त्रियों को सक्रिय बनाती है। पायल आमतौर पर चांदी की बनी होती है, यह ऊर्जा का एक अच्छा निर्वाहक है। पायल पैरों से निकलनेवाली शारीरिक विद्युत ऊर्जा को शरीर में संरक्षित रखती है। स्त्रियों के पेट और निचले अंगों में वसा बढ़ने की गति को रोकती है। पायल पैरों से घर्षण करके पैरों की हड्डियाँ मज़बूत बनाती हैं है। यह शरीर में खून के बहाव को ठीक कर देती है। शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती है। यह हमारी उन नसों को फिर से ऊर्जा दे देती है, जो कमज़ोर या थक चुकी होती हैं।

इस तरह गहनों का महत्त्व और बढ़ जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। गहने बिना परिश्रम के आपकी सहायता करते हैं।

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