चमत्कारी औषधि सफेद मूसली के लाजवाब फायदे

मूसली का सामान्य परिचय : Musli in Hindi

मुसली, जिसे मूसली भी कहा जाता है, एक झाड़ी नुमा पौधे की जड़ होती है। यह जड़ ही प्रयोग में ली जाती है जो बहुत बलवीर्यवर्द्धक और पौष्टिक गुण वाली होती है इसलिए इसका चूर्ण दूध या घी के साथ सेवन किया जाता है, इसका पाक बनाया जाता है और बाजीकारक अथवा पौष्टिक नुस्खों में भी इसे एक घटकद्रव्य के रूप में शामिल किया जाता है। आयुर्वेद ने इसकी बहुत प्रशंसा की है और शुक्रल (शुक्र तैयार करने वाली), वीर्य का स्तंभन करने वाली, धातु को पुष्ट करने वाली, वृष्य (टॉनिक), वाजीकारक (Aphrodisiac), स्नायविक संस्थान को बल देने वाली (NerveTonic), स्निग्ध तथा रसायन आदि विशेषणों से इसे संबोधित किया जाता है । यह सरलतापूर्वक सारे भारत में उपलब्ध रहती है। और इसकी सेवन विधि सरल है।
भाव प्रकाश निघंटु में लिखा है –
मुसली मधुरा वृष्या वीर्योष्णा बृहणी गुरुः ।
तिक्ता रसायनी हन्ति गुदजान्यनिलं तथा।।

मुसली सफेद और काली, दो प्रकार की होती है। काली मुसली को संस्कृत में तालमूली या ताल पत्री, हिन्दी में काली मुसली या स्याह मुसली कहते हैं । मुसली सारे भारत में पंसारी और कच्ची जड़ी-बूटी बेचने वाली दुकान पर मिलती है।

विविध भाषाओं में नाम :

संस्कृत-श्वेत मुशली । हिन्दी-सफेद मुसली, मूसली । मराठी-सफेद मुसली । गुजराती-धोली , मुसली। बंगला-श्वेत मुषली । तैलुगु-सल्लोगड्डा । तामिल-तन्निर विटंग । कन्नड़-नेलताड़ी । मलयालम-शेडे बेल । फारसी-शकाकुले । हिन्दी । इंग्लिश-व्हाइट मूसली (White Mosle)। लैटिन-एस्पेरे गुस एडसेण्डेंस (Asparagus Adscendens) |

सफेद मूसली के औषधीय गुण : Health Benefits of Musli in Hindi

• मुसली मधुर रस वाली, वीर्यवर्द्धक, उष्ण वीर्य, पुष्टिकारक, भारी, कड़वी, रसायन रूप तथा बवासीर और वात पित्त को नष्ट करने वाली है।
•यह कफवर्द्धक, मूत्रल, शुक्र धातु को पुष्ट करने वाली तथा स्तंभन शक्ति उत्पन्न करने वाली है।

रासायनिक संघटन :

सफेद मुसली में एस्पेरेगिन (Asparagin), एल्बुमिन युक्त पदार्थ, पिच्छिल द्रव्य और सेल्युलोज होता है। स्याह काली मूसली में -स्टार्च 43.48,टेनिन 4.15, सूत्र 14.18 तथा राख 8.6% होती है। | (‘द्रव्य गुण विज्ञान’ से साभार उद्धृत)

मूसली के उपयोग :

दोनों प्रकार की मुसली के गुण, कर्म और प्रयोग बहुत कुछ एक जैसे हैं। दोनों शुक्रल यानि शुक्र धातु की वृद्धि करता है, पुष्टिकारक और बलवर्द्धक हैं और यौनविकारों को दूर करने वाले नुस्खों में उनका उपयोग किया जाता है ।
✦ इसका चूर्ण एकल औषधि के रूप में भी, दूध या अन्य अनुपान के साथ, सेवन किया जाता है।
✦ इसे लगातार 2-3 मास तक सेवन करना चाहिए।
✦ काली मूसली का प्रभाव मूत्र मार्ग तथा यौनांग पर विशेष रूप से होता है, इसलिए मूत्र विकार और यौन विकार को दूर करने में काली मुसली का उपयोग उत्तम रहता है।
✦ मधुमेह का रोगी भी, दुर्बलता, कृशता (दुबला-पतलापन) और यौन दौर्बल्य आदि को दूर करने के लिए, सेवन कर सकता है।
✦ मुसली का पाक बनाया जाता है जो बहुत पौष्टिक और बलवीर्यवर्द्धक होता है।
सफेद और काली मुसली के कुछ घरेलू प्रयोग प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

रोगों के उपचार में सफेद मूसली के फायदे :

दुबलापन-

जहां कुछ लोग मोटापे से परेशान हैं और मोटापा कम करने के उपाय करते रहते हैं वहां कुछ युवा स्त्री-पुरुष ऐसे भी हैं जो बहुत दुबले-पतले हैं जिससे उनकी आंखें अंदर धंसी हुई, गाल पिचके हुए, चेहरा सूखा हुआ और पूरा शरीर सूखा हुआ दिखाई देता है जो अच्छा नहीं लगता। ऐसे दुबले-पतले लोगों को यह प्रयोग लगातार 2-3 मास तक करना चाहिए, ज्यादा समय तक भी करें तो हर्ज नहीं ।
सफेद मूसली, सालमपंजा, असगंध, मुलहठी और शतावर- सब 100-100 ग्राम लेकर कूट-पीस कर खूब महीन चूर्ण करके मिला लें और 200 ग्राम पिसी मिश्री मिला कर इस मिश्रण को छन्नी से तीन बार छानें, ताकि सभी द्रव्य ठीक से मिल कर एक जान हो जाएं। इसे एयर टाइट ढक्कन लगा कर बर्नी में भर कर रखें। इस मिश्रण को 1-1 बड़ा चम्मच (1010 ग्राम), सुबह-शाम कुनकुने गर्म दूध के साथ, 2-3 माह तक नियमित रूप से सवन करने पर दुबला-पतलापन दूर होता है, शरीर शक्तिशाली और सुडौल होता है और चेहरा भर जाता है।
यह प्रयोग करते हुए देर रात तक जागना, भूख सहना यानि भोजन वक्त पर न करना और ठीक से चबाए बिना जल्दी-जल्दी खाना आदि बुरी आदतों से दूर रहें। शाम को भी मल विसर्जन के लिए शौचालय में जाया करें।

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बहुमूत्र-

बार-बार पेशाब आना बहुमूत्र रोग होता है। इसे मूत्रातिसार भी कहते हैं । इस व्याधि को दूर करने के लिए काली मुसली का महीन चूर्ण 1 चम्मच (5 ग्राम) और जायफल का चूर्ण 2 ग्राम- मिलाकर सुबह-शाम पानी के साथ फांकना चाहिए। इस प्रयोग से बार-बार पेशाब आना बंद हो जाता है।

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शीघ्रपतन-

यौन-शक्ति की फिजूलखर्ची करने वालों का दाम्पत्य जीवन बड़ा अतृप्त, मानसिक क्लेशपूर्ण और मनोमालिन्य से भरा हुआ हो जाता है। इसमें सबसे प्रमुख कारण शीघ्रपतन की शिकायत होना होता है। पौष्टिक आहार का सेवन, नियमित रूप से व्यायाम, उचित दिनचर्या, मन में प्रसन्नता व उमंग का अनुभव करना- इन सबका पालन करते हुए काली मुसली 1 चम्मच (5ग्राम) और बंग भस्म 4 रत्ती (आधा ग्राम) दोनों को थोड़े शहद में मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले चाट कर सेवन करें। इसके बाद पानी से कुल्ले न करें, मुंह का थूक निगल-निगल कर मुंह साफ करें। आधा घंटे बाद चाहें तो एक गिलास मीठा कुनकुना गर्म दूध पी सकते हैं।

मूत्र कृच्छ-

पेशाब में रुकावट होना मूत्र कृच्छ कहलाता है। इस व्याधि को दूर करने के लिए सफेद मुसली का चूर्ण और पिसी मिश्री 11 चम्मच लेकर मिला लें । इस पर 3 बूंद चंदन का तेल टपका कर, एक गिलास दूध-पानी की मीठी लस्सी के साथ सुबह-शाम लेने से यह व्याधि दूर हो जाती है। पेशाब की जलन भी दूर हो जाती है।

कान का रोग-

काली मुसली का चूर्ण 10 ग्राम दो कप पानी के साथउबालकर काढ़ा करें। जब पानी आधा कप बचे तब इसमें चौथाई कप (पानी से आधी मात्रा में) सरसों का तेल डाल कर फिर उबालें । जब पानी जल जाए, सिर्फ तेल बचे तब उतारकर छान लें और शीशी में भर लें । इस तेल की 2-2 बूंद कान में टपकाने से कान का बहना या दुखना ठीक होता है।

गुर्दे का दर्द-

काली मुसली का चूर्ण एकचम्मच और तुलसी की 5-6 पत्ती, पानी के साथ, सुबह-शाम लेने से गुर्दे का दर्द ठीक होता है।

बलपुष्टि-

शरीर को पुष्ट और बलवान बनाने के लिए मुसली का एक सरल प्रयोग प्रस्तुत है-सफेद मुसली, असगंध, विधारा और मिश्री-सबको अलग-अलग कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें और प्रत्येक को 300-300 ग्राम वजन में लेकर मिला लें। इसे तीन बार छान कर एयर टाइट ढक्कन वाली बर्नी में भर कर रखें। इसे सुबह खाली पेट और रात को भोजन करने के दो घंटे बाद, 10 ग्राम मात्रा में, कुनकुने गर्म मीठे दूध के साथ सेवन करें। प्रतिदिन 20 ग्राम चूर्ण सेवन करने पर, यह 1200 ग्राम चूर्ण 60 दिन चलेगा। 60 दिन नियमित रूप से सेवन करें, दोनों वक्त सुबह शाम शौच के लिए बेनागा जाते रहे, खूब चबाचबा कर, दोनों वक्त ठीक समय पर भोजन करें । यह प्रयोग विवाहित और अविवाहित दोनों युवक-युवतियों तथा वयस्क स्त्री-पुरुषों के लिए उपयोगी है।

उदरशूल-

पेट दर्द दूर करने के लिए काली मुसली और दालचीनी समान मात्रा में पीस कर मिला लें। एक चम्मच चूर्ण ताजे पानी के साथ दिन में दो बार फांकने से पेट दर्द दूर हो जाता है।

श्वास फूलना-

काली मुसली की जड़ की छाल कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें । पान वाले से सादा पान बनवा कर, उस पान में आधा चम्मच यह चूर्ण डाल कर, पान मुंह में दबा कर, चबाते-चसते रहें। दिन में दो बार यह प्रयोग करें। इस प्रयोग के असर से श्वास फूलना और दमारोग में आराम होता है।

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आयुर्वेद दवा :

आयुर्वेद शास्त्र में एक से बढ़कर एक बल वीर्यवर्द्धक,पौष्टिक और शक्ति की सुरक्षा और वृद्धि करने वाले द्रव्यों का विवरण पढ़ने को मिलता है। उन श्रेष्ठ द्रव्यों में से एक है यह मुसली, जो पुरुष की वीर्य शक्ति और शारीरिक शक्ति को अक्षुण्ण रखने में समर्थ सिद्ध होती है। यही वजह है कि लगभग सभी श्रेष्ठ वाजीकारक और बलपुष्टि कारक नुस्खों में मूसली भी पाई जाती है। यहां दो बहुत ही अच्छे और अत्यंत गुणकारी आयुर्वेदिक योग प्रस्तुत कर रहे हैं जिनमें मुसली को भी शामिल किया गया है। किसी भी एक नुस्खे का सेवन लगातार 3-4 माह तक करके परिणाम देखा जा सकता है। हाथ कंगन को आरसी क्या, करके देख लें जिसका मन चाहे, पर हां, आहार-विहार और आचारविचार अच्छा रहे और अपथ्य का त्याग रख कर ही सेवन करें यह अत्यावश्यक है। मैले कपड़े पर अच्छा रंग नहीं चढ़ता, यह तथ्य याद रहे।

1-मुशल्यादि चूर्ण-
इस योग का नामकरण ही मुसली के नाम से किया गया है। सफेद मुसली, विदारीकंद, गिलोय सत्व, कौंच के शुद्ध किये हुए यानि छिलका रहित बीज, गोखरू, सेमल की मुसली और आंवला-सबका कुटा-पिसा महीन चूर्ण 50-50 ग्राम, पिसी मिश्री 250 ग्राम, सबको मिला कर तीन बार छान कर शीशी में भर लें। एक-एक बड़ा चम्मच भर चूर्ण, फांक कर ऊपर से मीठा कुनकुना गर्म दूध पिएं। यह प्रयोग लगातार 3-4 माह तक सेवन करें।

2-दिव्य रसायन चूर्ण-
सफेद मुसली, असगंध, विधारा, मुलहठी,शतावर, गोखरू, विदारीकंद, कौंच के शुद्ध बीज और तालमखाना- सबका कुटा पिसा महीन चूर्ण 10-10 ग्राम, तुलसी के बीज, अकरकरा, तेजपात, नागकेशर 2-2 ग्राम, दालचीनी 1 ग्राम, जावित्रीव इलायची चूर्ण आधा-आधा ग्राम और 30 ग्राम मिश्री पिसी हुई। इन सभी द्रव्यों का महीन पिसा चूर्ण मिलाकर, तीन बार छान कर, शीशी में भर लें । यह चूर्ण 1-1 बड़ा चम्मच भर फांक कर ऊपर से मीठा कुनकुना गर्म दूध, सुबह-शाम, 3-4 माह तक पथ्य-अपथ्य का पालन करते हुए सेवन करें और परिणाम देख लें।

दोनों नुस्खे अत्यंत वीर्यवर्धक , शुक्र वाहिनी नाड़ियों और यौनांग प्रदेश पर विशेष प्रभाव कर नपुंसकता और यौनांग की शिथिलता दूर करने वाले, धातुक्षीणता, वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, स्नायविक दुर्बलता, शुक्राणु-अल्पता (Oligospermia) आदि विकार नष्ट करने वाले हैं।

नोट :- ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।

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