कत्था के औषधीय गुण फायदे और नुकसान | Kattha Benefits & Side Effects in Hindi

कत्था क्या है ? : What is Kattha Powder

कत्था खैर नामक वृक्ष से जिसे लेटिन में एके शिया कटेचू कहते हैं से प्राप्त किया जाता है । कत्था खैर की लकड़ी से प्राप्त किया हुआ सत्त्व है ।

कत्था कैसे बनता है ? How to Make Kattha in Hindi

खैर पेड़ की छाल आधे से पौन इंच तक मोटी होती है यह बाहर से काली भूरी रंग की और अन्दर से भूरी रंग की होती है। जब खैर पेड़ का तना लगभग एक फुट मोटे हो जाते हैं तब इसे काटकर छोटे-छोटे टुकडे़ बनाकर भटि्टयों में पकाकर काढ़ा बनाया जाता है। फिर इसे चौकोर रूप दिया जाता है जिसे कत्था कहते हैं।

कत्था के प्रकार : Types of Kattha in Hindi

कत्था तीन प्रकार का होता है। एक भूरा कत्था जिसको पपड़िया कत्था कहते हैं, जो बहुत हल्का, सुखी माइल और आसानी से टूटने वाला होता है । औषधि में भी विशेष कर यही कत्था काम में आता है । दूसरा साल और तीसरा स्याह रंग का कत्था होता है । ये विशेष करके औषधि के काम में नही आते ।

कत्था के औषधीय गुण : Medicinal Properties of Kattha in Hindi

  1. आयुर्वेदिक मत से कत्था कसेला, गरम, कड़वा, रुचिकारक, अग्निदीपक, दांतों को दृढ़ करने वाला, चरपरा तथा कफ, वात, व्रण, कंठरोग, सब प्रकार के प्रमेह, कृमि, मुख रोग, 18 प्रकार के कुष्ठ, शरीर की स्थूलता और बवासीर को नष्ट करता है।
  2. चरक के मतानुसार कत्थे का काढ़ा कुष्ट में देने से और इसीको व्रण धोने के उपयोग से लेने से बड़ा लाभ होता है ।
  3. सुश्रुत खैर के छिलके को सभी प्रकार के कुष्ठ रोगों में काम में लेने की सलाह देते हैं।
  4. चक्रदत्त के मतानुसार कफ के साथ खून जाने में और अन्य रक्तस्राव में इसके [ खैर के ] फलों का चूर्ण शहद के साथ देने से लाभ होता है।
  5. हारित के मतानुसार मसूड़े और दांतों की पीड़ा में कत्थे का उपयोग हमेशा लाभदायक होता है ।
  6. यूनानी मत से यह दूसरे दर्जे में सर्द और खुश्क है ।
  7. यह कब्ज और खुश्की पैदा करने वाला होता है ।
  8. इसका मंजन मसूड़ों और दांतों को मजबूत करता है ।
  9. इसका चूर्ण जखम पर भुरभुराने से जखम जल्दी आराम होते हैं, इसको पानी में जीरा देकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं तथा मामूली दस्त बन्द हो जाते हैं ।
  10. आंतों के घाव और मरोड़ों के लिये भी यह लाभप्रद है ।
  11. कुष्ठ, सुजाक और फोड़े फंसी के लिये इसका शरबत और फायदा पहेचाता है।
  12. इसको मुंह में रख कर चूसने से लटका हुआ ‘काग’ अच्छा हो जाता है और उसकी वजह से होने वाली खांसी भी मिट जाती है ।
  13. इसको पानी में गलाकर उसकी पिचकारी देने से श्वेत प्रदर और सुजाक में लाभ पहुंचाता है ।

कत्था के उपयोग : Medicinal Uses of kattha in Hindi

  • कर्नल चोपरा के मतानुसार यह खैर की लकड़ी से प्राप्त किया हुआ सत्त्व है, इसके गहरे बादामी रंग के ढेर के ढेर तैयार किये जाते हैं । पांच से पन्द्रह ग्रेन (1 ग्रेन = 0.060 ग्राम) तक की मात्रा में स्वतन्त्र रूप से अथवा दालचीनी और अफीम के साथ यह अतिसार को रोकने के लिये दिया जाता है । मसूड़ों के पकने पर, गले की तकलीफ में या दांतों के दर्द में कत्था, दालचीनी और जायफल की टिकिया बनाकर मुंह में रखी जाती है । वेसलिन के साथ मिलाकर यह फोड़ों पर भी लगाया जाता है। इसमें केटेचिन ( Catechin ) और टेनिन एसिड नामक पदार्थ पाये जाते हैं।
  • के० एल० डे० के मतानुसार इसका टिंक्चर दुष्ट विद्रधि नामक फोड़े पर बड़ा उपयोगी होता है। यह संकोचक और पौष्टिक है । अतिसार में यह बहुत उपयोगी है। चाहे यह चूर्ण के रूप में लिया जाय, चाहे संकोचक पदार्थ या अफीम के साथ में लिया जाय । मसूड़े, मुंह के व्रण में भी यह बहुत उपयोगी है। स्वरभङ्ग, गले की पीड़ा और आवाज के बिगड़ जाने पर यह टिकियाओं के रूप में काम में लिया जाता है।

कत्था के लाभ : kattha benefits in hindi

कुष्ठ रोग ठीक करे कत्था का प्रोयोग

प्रतिदिन कत्थे को पानी में मिलाकर स्नान करने से कुष्ठ रोग ठीक होता है।

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प्रमेह में कत्था के प्रयोग से लाभ

थोड़ी सी जीरा और थोड़ा सा कत्था पीसकर गाय के दूध में मिलाकर छान लें। इसमें शक्कर मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से प्रमेह का रोग ठीक होता है।

फोड़े फुन्सी में कत्था के इस्तेमाल से लाभ

पुराने पीव बहाते हुय फोड़े पर मोम के साथ लेप बनाकर लगाने से लाभ होता है ।

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नासूर में कत्था का उपयोग फायदेमंद

इसके लेप में नीला थूथा मिलाकर नासूर पर लगाना चाहिये ।

जखम मिटाए कत्था का उपयोग

जखम पर इसका चूर्ण भुरकाने से खून का बहना बन्द हो जाता है । उपदंश की टोकियों पर इसका चूर्ण भुरकाने से लाभ होता है।

सूखी खांसी में लाभकारी है कत्था का प्रयोग

दो रत्ती कत्था और दो रत्ती हलदी में मिश्री मिलाकर फक्की लेने से सूखी खांसी मिटती है ।
(1 रत्ती = 0.1215 ग्राम)

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संखिये का जहर उतारने में कत्था करता है मदद

दो तीन तोले कत्थे को पानी में पीस कर पिलाने से संखिये का जहर उतर जाता है। मगर इतनी बड़ी मात्रा में कत्था लेने से पुरुषार्थ (पौरुष) नष्ट हो जाता है।
(1 तोला = 12 ग्राम)

मुंह के छाले दूर करने में कत्था फायदेमंद

सफेद कत्था और कलमी शोरा बराबर लेकर महीन पीस कर भुरकाने से मुंह के छाले अच्छे होते हैं।

बवासीर में कत्था का औषधीय गुण फायदेमंद

अरीठे के छिलके की राख और पपड़िया कत्था को समान भाग पीस कर रख लेना चाहिये । इस चूर्ण में से १ रत्ती चूर्ण मक्खन में मिला कर देने से और नमक, मिर्ची, तेल, खटाई छोड़ देने से बवासीर से गिरने वाला खून बन्द हो जाता है।
(1 रत्ती = 0.1215 ग्राम)

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कान का बहना बंद करे कत्था का प्रयोग

कत्थे का चूर्ण कान में भुरकाने से कान से बढ़ता हुआ पीव बन्द हो जाता है ।

मसूड़े के दर्द में लाभकारी है कत्था

दो ढाई रत्ती कत्थे की टिकिया बना कर मुंह में चूसने से मसूड़ों के दुसाध्य दर्द भी मिटते हैं । (1 रत्ती =   0.1215 ग्राम)

मुंह के रोग में कत्था के इस्तेमाल से लाभ

कत्थे को पांच गुने पानी में औटा कर जब पानी का आठवां भाग शेष रह जाय तब उसमें जायफल, कपूर और सुपारी को पीस कर गोली बना कर मह में रखने से मुख पाक इत्यादि सब मुंह के रोग मिटते हैं।

मसूड़े को मजबूत बनाये कत्था

कत्था, किणगच और कसीस के चूर्ण का मंजन करने से दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं । मगर ज्यादा दिनों तक इसको लगाने से दांत काले पड़ जाते हैं ।

अतिसार रोग में कत्था से फायदा (Catechu Benefits to Cure Diarrhea in Hindi)

  • कत्था 5 रत्ती, दालचीनी 5 रत्ती इन दोनों चीजों को पीसकर सिरके में घोट कर गोली बना लेना चाहिये । इसमें से एक गोली दिन में तीन बार देने से अतिसार में लाभ होता है ।
    (1 रत्ती = 0.1215 ग्राम)
  • कत्था तीन ड्राम, दालचीनी एक ड्राम, उबलता हुआ पानी 10 औंस इनको मिलाकर दो घण्टे तक पड़ा रहने दो । बाद में छान लो । इसमें से 1 औंस की खुराक दिन में तीन बार लेने से अतिसार में लाभ होता है ।
    (1 ड्राम = 1.77185 ग्राम , 1 औंस = 28.349 ग्राम )

कत्था के दुष्प्रभाव : Side Effects of Catechu in Hindi

इसका अधिक इस्तेमाल पुरुषार्थ (पौरुष शक्ति) को नष्ट करता है ।

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)