Shatavari ke Fayde | शतावरी के फायदे ,गुण ,उपयोग और नुकसान

शतावरी क्या है ? : What is Shatavari in Hindi

यूं तो शतावरी पुरुष व स्त्री दोनों के लिए ही अतिलाभप्रद व उपयोगी जड़ी है फिर भी यह स्त्रियों के लिए विशेष गुणकारी एवं उपयोगी है ।

शतावरी का विभिन्न भाषाओं में नाम : Name of Shatavari in Different Languages

Shatavari in –

  • संस्कृत (Sanskrit) – शतावरी
  • हिन्दी (Hindi) – शतावर
  • मराठी (Marathi) – सतावरी
  • गुजराती (Gujarati) – सेमूखा
  • बंगाली (Bangali) – शतमूली
  • तेलगु (Telugu) – एटुमट्टी टेंडा
  • तामिल (Tamil) – सडावरी
  • कन्नड़ (kannada) – मज्जिगे गड्डे
  • फ़ारसी (Farsi) – शकाकुल
  • अंग्रेजी (English) – एरेस मोसस (Ares Moses)
  • लैटिन (Latin) – एस्पेरेगस रेसिमोसस (Asparagus Racemosus)

शतावरी का पौधा कहां पाया या उगाया जाता है ? : Where is Shatavari Plant Found or Grown?

यूं तो शतावरी की पैदावार देश के सभी प्रान्तों में होती है पर उत्तर भारत में यह विशेष रूप से पैदा होती है।

शतावरी का पौधा कैसा होता है ? :

आयुर्वेद ने शतावरी को कई गुणवाचक नामों से पुकारा है जैसे बहुसुता, नारायणी, शतवीर्या, इन्दीवरी, सहस्रवीर्या, शतपदी आदि । यह लता जाति का, कांटेदार पौधा होता है जो जड़ से ही अनेक शाखाओं में फैला हुआ होता है।

  • शतावरी के पत्ते – शतावरी के पत्ते छोटे और सोया जैसे होते हैं।
  • शतावरी के फूल – इसके फूल छोटे और सफ़ेद रंग के होते हैं।
  • शतावरी के फल – शतावरी के फल गोल, मटर के दाने जैसे पकने पर गहरे लाल रंग के लगते हैं, जिसमें 1 से 2 काले रंग के बीज निकलते हैं।
  • शतावरी की शाखा – शतावरी की शाखाएं तिकोनी, चिकनी और रेखांकित होती हैं।
  • शतावरी की जड़ – शतावरी की जड़ लम्बी गोल, उंगली की तरह मोटी सफेद, मटमैले, पीले रंग की सैकड़ों जड़ों के गुच्छे के रूप में निकलती हैं। शतावरी की इन जड़ों को ही औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं। शतावरी का स्वाद फीका होता है।

शतावरी के प्रकार :

शतावरी छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती है। बड़ी महाशतावरी कहलाती है। दोनों के गुण लगभग एक समान हैं। महाशतावरी शीतवीर्य, ग्रहणी, अर्श तथा नेत्र रोग नाशक, मेधा तथा हृदय के लिए हितकारी, वृष्य (वीर्य और बल बढ़ाने वाली) और रसायन है। दोनों के अंकुर हलके तथा त्रिदोष, अर्श (बवासीर)और क्षय रोग (तपेदिक या टी.बी.) को नष्ट करने वाले होते हैं।

शतावरी के औषधीय गुण : Shatavari ke Gun in Hindi

महर्षि चरक ने इसे आयुष्य (आयु देने वाली), अत्यन्त बलवीर्यवर्द्धक ,वृद्धावस्था दूर रखने वाली और स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ाने वाली सर्वोत्तम औषधि बताया है। सुश्रुत के अनुसार शतावरी को दूध के साथ, सेवन करने से बवासीर (अर्श) रोग नष्ट होता है। इसका पाक (शतावरी पाक) अत्यन्त पौष्टिक और स्त्री के शरीर को सुडौल बनाने वाला होता है।

  • शतावरी भारी, शीतल, कड़वी, स्वादिष्ट, रसायन तथा मधुर रस युक्त है ।
  • यह बुद्धिवर्द्धक, अग्निवर्द्धक,स्निग्ध तथा पौष्टिक होती है ।
  • शतावरी नेत्रों के लिए हितकारी, गुल्म व अतिसार नाशक है ।
  • यह स्तनों में दूध बढ़ाने वाली, बलवर्द्धक, वात-पित्त, शोथ और रक्त विकार को नष्ट करने वाली है।

शतावरी की तासीर :

शतावरी का स्वभाव ठंडा होता है, मगर यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार गर्म और रूखा भी होता है।

शतावरी का उपयोगी भाग : Beneficial Part of Shatavari Plant in Hindi

मूल।

सेवन की मात्रा :

  1. शतावरी के कन्द का रस – 10 से 20 मिलीलीटर।
  2. शतावरी फल का चूर्ण – 4 से 6 ग्राम।
  3. शतावरी जड़ का काढ़ा – 40 से 80 मिलीलीटर।

शतावरी का उपयोग : Uses of Shatavari in Hindi

  • शतावरी का उपयोग विभिन्न नुस्खों में, व्याधियों को नष्ट कर शरीर को पुष्ट और सुडौल बनाने के लिए किया जाता है।
  • शतावरी का उपयोग पुरुष वर्ग के लिए पौष्टिक नुस्खों में गुणकारी सिद्ध होता है
  • शतावरी स्त्री-वर्ग के लिए स्तनों में दूध बढ़ाने वाली तथा प्रदर रोग नष्ट करने वाली दिव्य औषधि है।
  • यह गर्भस्थ शिशु को बल पुष्टि देने वाली, फिट्स (चक्कर) आने की शिकायत दूर करने वाली और प्रसव पश्चात प्रसूता के लिए हितकारी सिद्ध होने वाली औषधि है।
  • शतावरी तेल का उपयोग सुखपूर्वक प्रसव कराने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है।
  • यहां इसके कुछ घरेलू प्रयोगों का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

शतावरी के फायदे : Benefits of Shatavari in Hindi

जुकाम मिटाता है शतावरी

10 ग्राम शतावरी चूर्ण को चार से पांच काली मिर्च के साथ पानी में घोटकर सुबह-शाम पीने से जुकाम ठीक हो जाता है।

( और पढ़े – सर्दी जुकाम दूर करने के 31 घरेलू नुस्खे )

गठिया रोग में लाभकारी है शतावरी का प्रयोग

शतवारी के तेल से नित्य सुबह-शाम घुटनों पर मालिश करने से घुटनो का दर्द (गठिया रोग) ठीक हो जाता है।

( और पढ़े – गठिया रोग के घरेलू उपचार )

शतावरी के प्रयोग से दूर करे अनिद्रा रोग

शतवारी की खीर में घी मिलाकर सेवन करने से कुछ ही दिनों मे नींद न आने का रोग (अनिद्रा) मिट जाता है।

स्त्री के दूध में वृद्धि करने में शतावरी करता है मदद

10 ग्राम की मात्रा में शतवारी चूर्ण को दूध के साथ लेने से स्त्री के स्तनों मे दूध की बढ़ोतरी होती है।

वात रोग में शतावरी से फायदा

15 -15 ग्राम शतावरी और पीपर को पीसकर 4 से 5 ग्राम की मात्रा में सुबह दूध से लेने से वात रोग में लाभ होता है।

नपुसंकता मिटाए शतावरी का उपयोग

  • 2-2 ग्राम शतावरी और अश्वगंधा के चूर्ण को दूध में उबाल कर कुछ दिनों तक नियमित पीने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
  • शतावरी चूर्ण को दूध में देर तक उबालकर मिश्री मिलाकर इसे पीने से कुछ महीनों में ही नपुंसकता खत्म हो जाती है।

सूखी खांसी में शतावरी के प्रयोग से लाभ

  • 10-10 ग्राम शतावरी, अडूसे के पत्ते और मिश्री को 150 मिलीलीटर पानी में उबालकर दिन में 3 बार पीने से सूखी खांसी दूर हो जाती है।
  • शतावरी, अड़ूसे के पत्ते और मिश्री को पानी में उबालकर सुबह-शाम पीने से सूखी खांसी मिट जाती है।

प्रदर रोग ठीक करे शतावरी का प्रयोग

10 से 15 ग्राम शतवारी चूर्ण को 200 मिलीलीटर दूध और 200 मिलीलीटर पानी के साथ मिलाकर उबाले जब यह आधा रह जाये तब इसमे मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर रोग समूल मिट जाता है।

( और पढ़े – स्त्री रोग नाशक आयुर्वेदिक चिकित्सा और नुस्खे )

श्वेत प्रदर में आराम दिलाए शतावरी का सेवन

शतवारी चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर रोग दूर हो जाता है।

योनि से खून का बहना रोकता है शतावरी

10-10 ग्राम शतवारी और गोखरू की जड़ के चूर्ण को 160 मिलीलीटर बकरी का दूध और 1 लीटर पानी मे मिलाकर आग पर गर्म करें और थोड़ा बचने पर छानकर स्त्री को पिला दें इससे योनि से बहता खून बंद हो जाता है।

शतावरी के इस्तेमाल से व्रण (घाव) में लाभ

20 ग्राम शतवारी के पत्तों का चूर्ण बनाकर 40 ग्राम घी में तलकर अच्छी तरह से पीसकर घावों पर लगाते रहने से पुराने से पुराना घाव भी भर जाता है।

स्वप्नदोष में लाभकारी है शतावरी का सेवन

250 – 250 ग्राम शतवारी चूर्ण और मिश्री को पीसकर 6 से 7 ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर दूध के साथ सुबह-शाम रोगी को देने से स्वप्नदोष दूर होकर शरीर मजबूत बन जाता है।

मूत्रविकार मिटाए शतावरी का उपयोग

गोखरू और शतवारी चूर्ण को 6 से 7 ग्राम की मात्रा में मिलाकर पीने से पेशाब के रोग दूर हो जाते हैं।

पथरी में शतावरी के प्रयोग से लाभ

20 से 50 ग्राम शतवारी के रस में बराबर मात्रा में गाय का दूध मिलाकर पीने से किडनी (गुर्दे) की पथरी शिघ्र गल कर पेशाब के साथ बाहर आ जाती है।

शतावरी के दुष्प्रभाव : Shatavari ke Nuksan in Hindi

  • शतावरी लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।
  • शतावरी का अत्यधिक मात्रा में सेवन सिर में दर्द जैसी समस्या पैदा कर सकता है।

दोषों को दूर करने के लिए : इसके दोषों को दूर करने के लिए शतावरी को शहद के साथ सेवन करना चाहिये शहद के साथ शतावरी का सेवन करने से इसके दोष खत्म हो जाते हैं।

शतावरी चूर्ण और गोली का मूल्य : Shatavari Powder & Tablets Price

  • Carmel Organics Organic Shatavari Root Powder || 250 Grams – Rs 399
  • Just Jaivik 100% Organic Shatavari Powder – 227g – Rs 399
  • Patanjali Shatavar Churna (100gms) – Rs 190
  • Jain Pure Shatavari Powder – 1 kg – Rs 534
  • Just Jaivik Organic Shatavari Tablets – A Dietary Supplements – 750 mg (Pack 90 Organic Tablets) – Rs 219

कहां से खरीदें :

अमेज़न (Amazon)

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

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