मोतियाबिंद में क्या खाएं क्या न खाएं

दूनिया भर में मोतियाबिंद के कारण अंधेपन की शिकायतें सबसे ज्यादा हो रही हैं। सामान्य रूप से आंख के लेंस से होकर हमारी आंख के पिछले पर्दे यानी रेटिना पर प्रकाश पड़ता है। जब लेंस अपारदर्शी हो जाता है, तो रेटिना तक प्रकाश नहीं पहुंच पाता। इस दशा को मोतियाबिंद के नाम से जाना जाता है। ज्यों-ज्यों लेंस की पारदर्शिता कम होती जाती है, त्यों-त्यों नजर कमजोर होने लगती है। इसका उपचार आपरेशन से अपारदर्शी लेंस निकाल कर फिर चश्मे से या किसी अन्य तरीके से प्रकाश का रेटिना पर फोकस सेट करना होता है।

मोतियाबिंद के प्रमुख कारण :

मोतियाबिंद उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में –

  • आंख में चोट लगना,
  • सकी सूजन,
  • आंख के पर्दे का किसी कारणवश अलग हो जाना,
  • खूनी बवासीर का रक्तस्राव एकाएक बंद होना,
  • प्रोटीन, विटामिन ए, बी, सी की कमी,
  • विषाक्त दवाओं के दुष्परिणाम,
  • गठिया,
  • मधुमेह,
  • गुर्दे का प्रदाह,
  • धमनी रोग,
  • अत्यधिक कुनैन का सेवन,
  • लंबे समय तक तेज रोशनी या तेज गर्मी में कार्य करना,
  • बुढ़ापा,
  • आंख में जख्म बन जाना आदि होते हैं।

मोतियाबिंद के प्रमुख लक्षण :

इस रोग के लक्षणों में –

  • प्रारंभ में मक्खी, मच्छर आदि उड़ते दिखाई देना,
  • चंद्रमा देखने पर एक के कई दिखाई पड़ना,
  • दूर की चीजें धूमिल नजर आना,
  • धीरे-धीरे देखने की ताकत कम होना,
  • एक या दोनों आंखों में कई महीनों या वर्षों तक कोई रोग होते रहना आदि देखने को मिलते हैं।

मोतियाबिंद की समस्या में क्या खाएं :

✓ गेहूं के आटे की चोकर युक्त गर्म रोटी खाएं।
✓ पालक, पत्ता गोभी, लौकी, चौलाई, मेथी की सब्जी सेवन करें।
✓ गाजर का एक कप और पालक का दो कप रस मिलाकर 2-3 बार पिएं।
✓ गाय का दूध बिना चीनी के सुबह-शाम पिएं।
✓ आंवला, अंजीर, गूलर खाएं।
✓ आम, पपीता, कच्चा नारियल, घी, मक्खन का सेवन करें।

मोतियाबिंद रोग में क्या न खाएं :

✘ वनस्पति घी, तेल, खटाई न खाएं।
✘ तेज मिर्च-मसाला, मांस, मछली, अंडा सेवन न करें।

( और पढ़े – मोतियाबिंद के सफल घरेलू उपचार )

रोग निवारण में सहायक उपाय :

क्या करें –

✓ सूर्योदय के पूर्व शीर्षासन कर बाद में सूर्य नमस्कार करें।
✓ सुबह-शाम आंखों पर ताजे पानी के छींटे मारें।
✓ ललाट पर रोज चंदन लगाएं।
✓ पढ़ते समय रोशनी बाईं ओर से आने दें।
✓ हथेलियों से आंखों को कुछ मिनट सुबह-शाम ढकें।
✓ आंख के आपरेशन के 3-4 हफ्ते तक धूप का चश्मा लगाएं।

क्या न करें –

✘ बहुत कम या बहुत तेज रोशनी में न पढ़ें।
✘ कब्ज की शिकायत बिल्कुल न रहने दें।
✘ अति मैथुन करने से बचें।
✘ अधिक ठंडे या अधिक गर्म मौसम में बाहर न निकलें।
✘ आंख के आपरेशन के तुरंत बाद पढ़ने, लिखने का कार्य न करें।

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