शरीर को स्वस्थ व सुंदर बनाने के लिए फायदेमंद है योग

त्वचा और चेहरे में प्राकृतिक निखार के लिए योग की खुराक :

          अगर हम कोई चिकित्सा करवाते हैं तो वह या तो अपने शरीर को ठीक रखने के लिए होती है, कोई दिमाग को अच्छा रखने के लिए होती है या फिर अपनी खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए होती है। लेकिन योगासन के द्वारा हम इन तीनों चीजों को एक ही साथ पा सकते हैं।

          योगासन से शरीर और दिल-दिमाग में एक संतुलन सा आता है। मन जगह-जगह नहीं भटकता है। अपने अन्दर का आत्मविश्वास बढ़ता है। शरीर के अन्दर खून की गति को ठीक करने, अंगों को लचीला और गतिशील बनाने तथा दिमाग के बेकार विचारों से छुटाकारा दिलाने की दृष्टि से योगक्रिया दूसरी सारी चिकित्सा पद्धतियों से अच्छी मानी जाती है।

          रोजाना योगासन करने से स्त्री का स्वास्थ्य और खूबसूरती दोनों में ही बढ़ोतरी होती है। अगर शरीर में खून का बहाव और भोजन पचाने की क्रिया ठीक होगी तो खूबसूरती में निखार तो आएगा और चेहरे के दाग, धब्बों तथा कील-मुहांसों से छुटकारा मिलेगा। इसके साथ ही रोजाना योगासन करने से  मोटापा काबू में रहता है और चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती हैं।

सुंदर चमकदार त्वचा के लिए स्त्रियों के लिए मुख्य योगासन :

          योग के अनुसार लगभग 84 तरह के योगासन होते हैं। योग के हर आसन का अपना एक अलग विधान और महत्त्व होता है। अगर योग को पूरी तरह से सीखना हो तो उसके लिए एक बहुत ही अच्छे योग गुरू की जरूरत होती है। घर में काम करने वाली महिलाओं के लिए सारे योगासन सीखना न तो पूरी तरह सम्भव है और न ही कोई खास जरूरी है। उन्हे अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार थोड़े से उपयोगी आसन चुनकर एक बार किसी योग क्रिया करने वाली महिला से अच्छी तरह सीख लेने चाहिए ताकि गलत ढंग के आसन करने से लाभ की बजाय नुकसान न हो जाए।

          योगासन करने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह-सुबह का होता है। वैसे अगर आपको सुविधा लगे तो शाम के समय भी योगासन कर सकती है। पर इसको करने के लिए एक बात ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि योगासन करते समय पेट हमेशा खाली होना चाहिए। स्त्रियों को मासिकधर्म या गर्भावस्था के दिनों में उन आसनों को नहीं करना चाहिए जिनको करने से शरीर पर ज्यादा जोर पड़ता है। ऐसी स्थिति में `पद्मासन´ और श्वासन जैसे आसन लाभकारी होते हैं। `पद्मासन´ बैठने की शास्त्रीय विधि को कहते हैं। इस आसन में रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहती है तथा घुटनों के जोड़ लचीले रहते हैं। `श्वासन´ में शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़कर पूरी तरह आराम की मुद्रा में लेटना होता है। इस आसन को करने से तनाव दूर होता है।

पद्मासन

1. पद्मासन :

`पद्मासन´ करने का तरीका –

          सबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों टांगों को सीधी करके और दोनों पैरों को मिलाकर रख लें। इसके बाद दाएं पैर को बाईं जांघ पर तथा बाएं पैर को दाईं जांघ पर इस तरह से रखें जिससे कि दोनों पैरों की एड़ियां नाभि के दोनों और पेट से लगी हुई हों। अपने दोनों हाथों को दोनों घुटनों पर रखें। बाकी सारा शरीर कमर, छाती, सिर आदि पूरी तरह से सीधा और तना हुआ होना चाहिए। दोनों पैरों के घुटने जमीन से मिले हुए रहें। आंखें हल्की सी बन्द हों। इस आसन को करते समय किसी अच्छे योग गुरू से `प्राणायाम´ करने का तरीका सीख लें।

समय

          `पद्मासन´ को शुरूआत में 1 मिनट से शुरू करके कई घंटों तक कर सकते हैं।

लाभ

  • `पद्मासन´ को करने से इधर-उधर भटकता हुआ मन एक जगह स्थिर हो जाता है।
  • इससे शरीर के वात और पित्त के रोग दूर होते हैं।
  • इस आसन को करने से फेफड़े, पेट, गर्भाशय और आंत के सारे रोग दूर हो जाते हैं। स्नायुतन्त्र ठीक रहता है और याददाश्त तेज होती है।
  • `पद्मासन´ रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है और जोड़ों को लचीला बनाता है।
बद्ध `पद्मासन

2. बद्ध `पद्मासन´ :

बद्ध `पद्मासन´, `पद्मासन´ का ही दूसरा भाग होता है।

बद्ध पद्मासन करने का तरीका

          सबसे पहले `पद्मासन´ की मुद्रा में बैठकर दोनों हाथों को कमर के पीछे तक ले जाएं। हाथों को क्रास की शेप मे बना लें और फिर दोनों हाथों से पैर के दोनों पंजों को छूने की कोशिश करें। इसके बाद दोनों हाथों से पैरों के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें।

लाभ

  • बद्ध `पद्मासन´ को करने से हडि्डयों में रहने वाला बुखार, सर्दी-जुकाम, गर्भाशय के रोग आदि दूर होते हैं।
  • इस आसन को करने से भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है तथा मन को शान्ति और एक अजीब सी खुशी प्राप्त होती है।
शरीर को स्वस्थ व सुंदर बनाने के लिए फायदेमंद है योग

3. भुजांगासन :

भुजंगासन करने का तरीका

          इस आसन मे सबसे पहले पेट के बल उल्टा लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को मिला लें। अपने पैरों से लेकर नाभि तक का हिस्सा जमीन से बिल्कुल लगाकर रखें। दोनों हाथों को जमीन पर उल्टा रखकर अपने दोनों कंधो और हाथों को एक बराबर सीध में रखते हुए नाभि से ऊपर के शरीर को ऊंचा उठाइए। अपने सिर को जितना ज्यादा पीछे झुका सकते हैं, झुका लें। कुछ देर तक इसकी मुद्रा में रहकर वापस लेट जाएं और फिर कुछ देर बाद इस क्रिया को दुबारा करें।

लाभ

  • भुजंगासन को करने से गैस के रोग दूर हो जाते हैं तथा पेट की कब्ज समाप्त हो जाती है।
  • ये आसन बाहर निकले हुए पेट को अन्दर करने तथा गर्दन, कमर और कंधों के दर्द को दूर करने में बहुत ही लाभकारी है।
  • भुजंगासन को करने से शरीर मजबूत बनता है और खूबसूरती भी बढ़ जाती है।

4. कोणासन :

कोणासन करने का तरीका

          इस आसन में सबसे पहले अपने दोनों पैरों को फैला लीजिए। फिर बाईं ओर झुककर बाएं हाथ को बाएं पैर पर रखकर दाएं हाथ को सिर के ऊपर बिल्कुल सीधी रेखा में तान दीजिए। लेकिन कमर बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए। इसके बाद सीधी मुद्रा में आकर इसी क्रिया को फिर दाईं और करिए।

लाभ

  • कोनासन शरीर को संतुलन में रखने और खूबसूरती को बढ़ाने के लिए बहुत ही लाभकारी आसन है।
  • इस आसन को करने से कमर का दर्द, पसलियों तथा फेफड़ों के रोग दूर होते हैं तथा ये कद को बढ़ाने मे भी काफी लाभदायक है।
  • कोनासन के रोजाना अभ्यास से साइटिका का दर्द भी कुछ समय में कम हो जाता है।
चक्रासन

5. चक्रासन :

          चक्रासन को करना थोड़ा सा मुश्किल होता है। इस आसन को पैरों को टिकाकर भी कर सकते हैं और पंजों के बल भी। शुरू में इस आसन को करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की मदद ली जा सकती है लेकिन कुछ दिन के अभ्यास से आपको खुद ये आसन करने की आदत पड़ जाएगी।

चक्रासन करने का तरीका

          इस आसन मे सबसे पहले पेट के बल सीधे लेट जाएं। अपने दोनों पैरो को नितंबों से लगा लें। अपनी दोनों हथेलियों को सिर के दोनों ओर जमीन पर टिका लें। इसके बाद धीरे-धीरे कमर को इतना ऊपर उठा लें कि पूरा शरीर गोलाकार हो जाए। कुछ देर तक इसी स्थिति में रहकर वापस जमीन पर आ जाएं तथा फिर इस क्रिया को दुबारा करें। इस तरीके से अभ्यास हो जाने पर फिर खड़े होकर आप हाथ पीछे ले जाने का अभ्यास भी कर सकती हैं।

लाभ

  • चक्रासन को करने से रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहती है और शरीर रबड़ की तरह लचीला बन जाता है।
  • बुढ़ापे में हडि्डयां सख्त हो जाने पर ये आसन बहुत ही लाभकारी होता है।
  • इस आसन को करने करने से कमर सुन्दर बनती है और स्तन मजबूत तथा खूबसूरत होते हैं।
  • चक्रासन का रोजाना अभ्यास करने से शरीर में खून का संचार ठीक होता है और ये स्नायुमण्डल में स्थिरता लाकर दिमागी ताकत को बढ़ाने मे भी लाभ करता है।
जानुशीर्षासन

6. जानुशीर्षासन :

जानुशीर्षासन करने का तरीका

          इस आसन मे सबसे पहले दाएं पैर को सामने की ओर फैला लें। फिर बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखकर बाएं हाथ से दाएं पैर के पंजे को पकड़ लें। इसके बाद दाएं हाथ को कमर के पीछे से ले जाकर उससे बाएं पैर की एड़ी को पकड़ लें। अब सिर से दाएं घुटने को छूने की कोशिश करें।

लाभ

  • जानुशीर्षासन करने से पूरे शरीर में खून का बहाव ठीक होता है।
  • इससे गैस के रोग दूर होते हैं और मोटापा कम होता है।
  • इस आसन को नियमित रूप से करने से दिमाग तेज होता है।

7. उष्ट्रासन :

उष्ट्रासन करने का तरीका

          उष्ट्रासन करने के लिए पेट के बल उल्टा लेटकर अपने हाथों से टखनों को पकड़ लीजिए और अपने शरीर के कमर के भाग को ऊपर की ओर उठाइए।

लाभ

  • उष्ट्रासन को करने से पेट और नितंबों की फालतू चर्बी दूर होती है।
  • इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है।
  • उष्ट्रासन को रोजाना करने से कब्ज का रोग दूर होता है और भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है।
  • इस आसन को करने से मधुमेह रोग में भी बहुत लाभ होता है।

8. मत्यासन :

मत्यासन

मत्यासन करने का तरीका

          सबसे पहले `पद्मासन´ लगाकर लेट जाएं। फिर अपने दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़कर सिर और घुटनों के बल शरीर को पूरी तरह से ऊंचा उठा लें।

लाभ

  • मत्स्यासन को करने से स्तन सुन्दर और सुडौल बनते हैं तथा मासिकधर्म भी नियमित होता है।
  • इस आसन को करने से आंखों के रोग दूर होते हैं और आंखों की रोशनी भी तेज होती है।
  • मत्स्यासन को नियमित करने से गले के रोग, टांसिल, कब्ज, बवासीर, मधुमेह, कमर तथा घुटनों के दर्द में बहुत ही लाभ होता है।

9. योगासन :

योगासन

योगासन की पहली मुद्रा

          `पद्मासन´ की मुद्रा में बैठकर हाथों को पीछे पीठ पर ले जाकर क्रॉस सा बना लें और दोनों हाथों से पैरों के अंगूठे को पकड़ लें। फिर सामने की ओर देखते हुए सिर को झुकाकर जमीन पर लगा लें।

योगासन की दूसरी मुद्रा

          योगासन की इस मुद्रा में प्राणायाम भी शामिल है। फिर जमीन पर बैठकर बाएं पैर को उठाकर दाईं टांग पर इस तरह रखें जिससे कि बाईं एड़ी नाभि से छू जाएं। इसके बाद दाएं पैर को बाईं टांग पर इस तरह से रखिए कि दोनों एड़ियां आपस में मिल जाएं। दोनों एड़ियां नाभि के ठीक नीचे मिलनी चाहिए। अब बाएं हाथ को गोद में रखकर दाएं हाथ को बाईं हथेली पर इस तरह रखें कि दोनों हथेलियां ऊपर की ओर रहें। फिर सामने की ओर देखते हुए धीरे-धीरे नाक से सांस को खींचे। इसके बाद नाक को देखने की कोशिश करें और सांस को रोक लें। अब धीरे नाक से धीरे-धीरे सांस को छोड़िए। यही सबसे सरल प्राणायाम है।

लाभ

  • इन दोनों आसनों को करने से पेट की गैस और कब्ज दूर होते हैं तथा भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है।
  • इन आसनों को करने से स्वभाव कोमल बनता और दिल में शान्ति पैदा होती है।
  • स्त्रियों के लिए खूबसूरती, अच्छे स्वास्थ्य और दिमागी शान्ति को प्राप्त करने के हिसाब से ये आसन बहुत ही अच्छा है।

10. मेरुदण्डासन :

मेरुदण्डासन करने का तरीका

          सबसे पहले दोनों टांगों को एकसाथ मिलाकर बिल्कुल सीधी तनकर खड़ी हो जाएं। फिर सांस भरते हुए दोनों हाथों को बिल्कुल सीधे ऊपर की ओर ले जाएं। आपकी दोनों भुजाएं कानों से लगी हुई होनी चाहिए। अब दोनों बाहों को बिल्कुल सीध में रखते हुए कमर से ऊपर के हिस्से को दाईं ओर झुका लें। फिर कुछ पल रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए बिल्कुल सीधी स्थिति में आ जाएं। इसके बाद दुबारा सांस भरें और इसी क्रम को दुबारा करें। अपने दोनों हाथों को इसी तरह सीधे रखते हुए पहले सामने और फिर पीछे की ओर झुकें। इस तरह से चारो तरफ झुकने से एक चक्र पूरा होगा। इसी कोण को मेरुदण्डासन कहा जाता है।

लाभ

  • इस आसन को करने से मेरुदण्ड (रीढ़ की हड्डी) लचीली और मजबूत रहती है।
  • स्तनों की मांस-पेशियों, आंतों की नस-नाड़ियों और कमर तथा रीढ़ की हड्डी का व्यायाम पूरा हो जाने के बाद ये आसन स्त्रियों के कमर दर्द और प्रदर रोगों को दूर करता है।
  • इस आसन को शुरूआत में 3 चक्र से शुरू करके धीरे-धीरे अभ्यास द्वारा 10 चक्र तक बढ़ाना चाहिए।

11. हस्तपादांगुष्ठासन :

हस्तपादांगुष्ठासन करने का तरीका

          इस आसन को करने के लिए शरीर को बिल्कुल सीधा तानकर खड़े हो जाएं। फिर अपने दोनों पैरों को मिलाकर रख लें और सांस को अन्दर की ओर रोककर रख लें। इसके बाद एक टांग को सीधी करके सामने की ओर करके उस ओर के हाथ से पैर का अंगूठा पकड़ लें। दोनों टांगे बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए। दूसरा खाली हाथ पीठ के पीछे लें जाएं और नज़र को सामने की ओर सीधी रखें। फिर दोनों हाथ सीधे रखकर सांस को बाहर की ओर छोड़ें। अब दूसरी टांग से दुबारा सांस को भरकर इसी आसन को दुबारा करें।

लाभ

  • इस आसन को करने से बांहे और टांगे मजबूत होती है।
  • हस्तपादांगुष्ठासन को रोजाना करने से कमर दर्द ठीक होता है तथा भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है।

12. अर्द्धऊर्ध्वासन :

अर्द्धऊर्ध्वासन करने का तरीका

          सबसे पहले बिल्कुल सीधी खड़ी होकर सांस भरिए। अपनी एक टांग को पीछे की ओर ले जाकर घुटने के मोड़ को ऊपर उठाइए। उसी ओर के हाथ से टखने को पकड़िए। फिर दूसरा हाथ ऊपर की ओर उठाइए। इसके बाद कमर से ऊपर के भाग को पूरी तरह से आगे की ओर बढ़ाइए और सांस छोड़िए। अब दुबारा सांस भरकर दूसरी टांग से भी इसी क्रम को दुबारा करें।

लाभकारी

  • इस आसन को करने से स्तन, कमर, टांगे और बांहे सुन्दर और सुडौल बनती है।
  • अर्द्धऊर्ध्वासन को रोजाना करने से पेट के रोग तथा कमर और रीढ़ का दर्द ठीक होता है।

13. सर्वांगासन :

सर्वांगासन

सर्वांगासन करने का तरीका

          सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। फिर सांस को छोड़ते हुए पैरों को सीधा रखकर धीरे-धीरे ऊपर आकाश की ओर उठाइए और दोनों हाथों से कमर को पकड़कर नितंब को सहारा दीजिए। सिर, कंधे और कोहनी तक बांहे और छाती का भाग जमीन पर टिका होना चाहिए। अपनी नजरें दोनों पैरों के बीच में सीधी रखें। फिर इस तरह ऊपर उठाई गई टांगों को सिर के पीछे की ओर लाकर जमीन पर टिकाने का आसन करें।

लाभ

  • इस आसन को करने से थायरायड ग्रंथि की काम करने की ताकत तेज होती है।
  • सर्वाण्ड्रासन को करने से जिगर और प्लीहा के रोग ठीक हो जाते हैं।
  • रोजाना इस आसन को करने से याददाश्त तेज होती है और चेहरे की चमक बढ़ती है।
  • सर्वाण्ड्रासन का नियमित अभ्यास करने से आंखों के रोग दूर होते हैं।
  • इस आसन को करने से मासिकधर्म का सही से न आना, ज्यादा दर्द होना या ज्यादा स्राव होना जैसे रोग दूर होते हैं।
सिद्धासन

14. सिद्धासन :

सिद्धासन करने का तरीका

          अपने बाएं पैर की एड़ी को सीवनी नाड़ी पर लगाकर दाएं पैर की एड़ी को ऊपर के हिस्से पर रखिए। फिर दोनों अंगूठों को दोनों पिण्डलियों के बीच में छिपाकर सामने देखते हुए स्थिर मुद्रा में बैठ जाएं। आंखें हल्की सी खुली हुई होनी चाहिए। आप जितनी देर तक इस मुद्रा में बैठ सकती है बैठें और धीरे-धीरे आसन को करने का समय बढ़ाएं। इस आसन को करते समय गुदा, मूत्रेन्द्रिय और पेट को अन्दर की ओर खींचे।

लाभ

  • सुबह और शाम किसी शान्त सी जगह पर बैठकर ध्यान लगाते हुए ये आसन करने से मन एक जगह लगता है।
  • इस आसन को रोजाना करने से कामवासना कम होती है और याद्दाश्त तेज होती है।
  • कुण्डलिनी को जगाने की लक्ष्य-सिद्धि में इस आसन को पहली सीढ़ी कहा जाता है।

15. ध्रुश्वासन :

ध्रुश्वासन का करने का तरीका

          ध्रुश्वासन को सूर्य नमस्कार भी कहा जाता है। सुबह-सुबह उठकर ताजी हवा में जमीन पर बिल्कुल सीधी खड़ी हो जाएं। फिर दाईं टांग को घुटने से मोड़कर पैर को बाईं टांग के मूल स्थान पर लगाएं और सांस को अन्दर की ओर खींचे। फिर सांस को रोककर दोनों हाथों को आपस में जोड़कर बिल्कुल सीधी अवस्था में सिर के ऊपर ले जाएं। आपकी नजरें सामने की ओर रहनी चाहिए। फिर सांस छोड़ते हुए सीधी मुद्रा में आ जाएं। इसके बाद बाईं टांग से इसी आसन को दुबारा करें।

लाभ

  • ध्रुश्वासन को सुबह-सुबह भगवान को नमस्कार करने और ताजी हवा खाने के उद्देश्य से किया जाता है।
  • इस आसन को करने से दिल और दिमाग को शान्ति मिलती है।
  • ध्रुश्वासन को रोजाना करने से टांगे और बांहे मजबूत बनती है।
  • इस आसन को करने से सांस और गैस के रोग समाप्त हो जाते हैं।

16. श्वासन :

श्वासन करने का तरीका

          अपने शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़कर आराम करने की अवस्था में लेट जाएं।

लाभ

          इस आसन को करने से दिमागी परेशानी, तनाव, बेचैनी और उत्तेजना दूर होती है।

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