अन्हारी हरियाली | ANIHARI HARIYALI
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अनहारी हरियाली नामक पुस्तक के शीर्षक-पृष्ठ पर लेखक का नाम केदारनाथ अग्रवाल दिया गया है। प्रकाशक साहित्य भंडार है, जिसका पता 50, पंचमंडल, हरनामदेव-3, इलाहाबाद दर्ज है। ISBN 978-81-7779-183-4 पृष्ठ पर छपा है और मूल्य 150 रुपये अंकित है। मुद्रण सुधांश प्रकाशन, इलाहाबाद से हुआ है।
पुस्तक का प्रकाशकीय पृष्ठ समीर अग्रवाल ने अगस्त 2009 में लिखा है और उसमें बताया गया है कि लेखक का पहला उपन्यास किस पुस्तक पर आधारित है और यह उनका अगला कार्य क्यों प्रकाशित किया जा रहा है। पुस्तक प्रिय अग्रवाल को समर्पित है और आवरण पर जंगल तथा हिरन का फोटो है।
यह एक हिंदी उपन्यास है जिसमें शिव-पर्वत की पृष्ठभूमि में घने जंगल, विरानी घाटी और पहाड़ी जीवन का वर्णन है। पाठ में मानव-चरित्रों का विकास, गाँव की परंपराएँ और पर्वतीय प्रकृति के साथ उनका गहरा सम्बन्ध दोनों ओर से खुलकर आया है। केदारनाथ अग्रवाल हिंदी के जाने-पहचाने कथाकार हैं, इसलिए उनकी शैली में गाँव की बातचीत और व्यंजन भी स्वाभाविक रूप से उभरते हैं। लंबी पुस्तक है, इसलिए एक बार में पूरी पढ़ी जा सकती है। शहर में रहने वालों को यह पुस्तक हिमालयी प्रकृति और वहाँ के लोगों से परिचित कराती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- बाल-कहानी
- प्रकृति तथा रंग
- रोचक प्रसंग
- चित्र सहित
पुस्तक की मुख्य बातें
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