भगवान आज ही मिल सकते हैं | Bhagwan Aaj Hi Mil Sakte Hai Swami Ramsukh Das
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भगवान आज ही मिल सकते हैं एक छोटी आध्यात्मिक पुस्तिका है, जिसके लेखक आचार्य सामंत हैं और भूमिका लेखक डॉ० सूर्यप्रसाद राठौड़, राठौड़पुर हैं। प्रकाशन शिवलाल अग्रवाल एण्ड कम्पनी, भारत-२ ने किया है और इसका ISBN 81-7154-577-8 दर्ज है। पुस्तक बहुत छोटी है — केवल लगभग १६ पृष्ठों की — पर उसका प्रभाव बहुत गहरा है।
पुस्तक का आधार भगवान श्री रमण महर्षि की शिक्षा है, जिन्हें पुस्तक में इस शताब्दी के अग्रणी आध्यात्मिक गुरु बताया गया है। लेखक ने बताया है कि उनकी शिक्षा मयबद और व्यावहारिक है — जिसका अभ्यास सीधे जीवन में उतारा जा सकता है। आत्म-ज्ञान के मार्ग में बैठकर साधना करने से क्या बदलता है, यह पुस्तक में सरल भाषा में समझाया गया है।
रमण महर्षि के अनुयायियों और आत्म-ज्ञान में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तिका अत्यंत उपयोगी है। छोटी पृष्ठ-संख्या में कुछ महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं, इसलिए इसे कुछ ही समय में पढ़ा जा सकता है। आध्यात्मिक साधना की शुरुआत करने वालों के लिए यह एक अच्छी प्रेरणा देती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- ईश्वर-प्राप्ति के सरल उपाय
- नाम-जप तथा भक्ति
- साधक के व्यावहारिक निर्देश
- प्रेरक प्रसंग
पुस्तक की मुख्य बातें
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