चित्र ग्रीव : एक कबूतर की कहानी | GAYNECK CHITRA GREEV – EK KABUTAR KI KAHANI
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चित्र-ग्रीव एक कबूतर की कहानी बाल-साहित्य की पुस्तक है। शीर्ष पृष्ठ पर इसे "चित्र-ग्रीव — एक कबूतर की कहानी" नाम से अंकित किया गया है। लेखक धननीपाल मुखर्जी हैं, जिनका जन्म सन् उन्नासीस नब्बे में कोलकाता के करीब एक ग्रामीण परिवार में हुआ था। प्रकाशन विद्या मित्र मंडल, लखनऊ ने किया है। पुस्तक बाल पुस्तकों की श्रृंखला का भाग है और मूल्य चालीस रुपये रखा गया है। पुस्तक लगभग चौहत्तर पृष्ठ की है।
पुस्तक की कहानी एक संदेशवाहक कबूतर "चित्र-ग्रीव" के इर्द-गिर्द घूमती है। आरंभ में उसका किसी गाँव के सरपंच के पास जन्म और दखभाल का वर्णन है, और कहा गया है कि कभी यह कबूतर मन को छू जाती है, तो कभी मन को दुखी भी कर देती है। बाद में कहानी में एक चोर परिश्रमी और संवेदनशील प्रशिक्षक का चित्र आता है, जो कबूतर की प्रशिक्षण-दक्षता और उसे सेवा-कार्य में लगाने से जुड़ा है। कहानी में रोमांच और साथ-साथ भावनाएँ भी बदलती रहती हैं।
यह पुस्तक केवल एक जानवर-कथा नहीं है। पीछे के पृष्ठ पर लेखक ने स्वयं स्पष्ट किया है कि कहानी में चित्र-ग्रीव साहस और प्रेम का संदेशवाहक भी बनकर उभरता है। इसलिए इसे बच्चों को रोमांच और सीख, दोनों देता है। भारत के ग्राम-जीवन का यह सजीव चित्रण बाल-पाठकों को अपनी परंपरा से जोड़ता है। विद्या मित्र मंडल जैसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रकाशन होने के कारण इसकी छपाई और चित्र-सज्जा दोनों अच्छी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- कबूतर की कहानी
- रोचक तथा शिक्षाप्रद
- चित्र सहित
- बच्चों के लिए उपयोगी
पुस्तक की मुख्य बातें
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