हिन्दुओं के रीति-रिवाज तथा मान्यताएँ – Hinduo Ke Riti Riwaj Tatha Manyatayein
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आवरण-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम हिन्दुओं के रीति-रिवाज तथा मान्यताएँ अंकित है और नीचे धार्मिक एवं पौराणिक प्रवृत्ति सहित होने का उल्लेख दिया गया है। शीर्षक-पृष्ठ पर लेखक का नाम डॉ. प्रकाशचंद गागर्जी अंकित है और प्रकाशक का नाम पुस्तक महल, दिल्ली आता है। प्रकाशन-पृष्ठ पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक-क्रमांक 81-223-0836-8 मुद्रित है और संस्करण तथा संपादन संदर्भ के रूप में चतुर्थ संस्करण और वर्ष दो हजार चार दिया गया है। वहीं बैंगलोर, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद तथा रायपुर के बिक्री-वितरण पते भी दिए गए हैं।
पुस्तक का आरंभ एक हिन्दी लोक-पंक्ति से होता है जो दीपक, अँधेरा, डर और धोखे जैसे शब्दों पर आधारित है और साथ में पाठ का सार भी बताया गया है। इसके बाद स्वक्रम नामक अनुभाग आता है जिसमें लेखक ने बताया है कि पुरानी परंपराओं को अपनाने का प्रश्न क्यों उठता है और उन परंपराओं में आज भी क्या सार्थकता बनी रहती है। पृष्ठों के अंत में अंतर के पृष्ठों के नाम से विस्तृत अनुक्रमणिका दी गई है जिसमें दशक, धर्म, मन्दिर, जन्म, विवाह, हवन, दान, यात्रा, खेल और मनोरंजन जैसे अनेक विषय पृष्ठ-संख्याओं के साथ सूचीबद्ध हैं।
यह पुस्तक हिन्दू समाज की लोक-रीतियों और मान्यताओं का एक वर्गीकृत संदर्भ है, जिसमें मान्य विश्वासों, रीतियों और उनके सामाजिक आधार की चर्चा की गई है। सामाजिक इतिहास, संस्कृति और मनोविज्ञान के अध्ययन के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- हिंदू रीति-रिवाज तथा संस्कार
- त्योहार तथा परंपराएँ
- मान्यताएँ तथा उनका आधार
- धार्मिक जानकारी
पुस्तक की मुख्य बातें
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