Pashupata Shaiva Dharma Evam Darshan Part I
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यह पुस्तक पाशुपत शैवधर्म एवं दर्शन नाम से प्रकाशित हुई है और यह पहला भाग है। लेखक आचार्य माणि त्रिपाठी हैं, जिनका नाम आवरण-पृष्ठ पर अंकित है। पैमाना लगभग 303 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर बताया गया है कि विष्णु कर्कटार का यह ग्रन्थ दो भागों में विचित्र है, जिसमें प्रथम भाग के प्रथम खण्ड में पाशुपत धर्म की उत्पत्ति, विकास और इतिहास तथा द्वितीय खण्ड में पाशुपत दर्शन के विकास में प्रमुख साम्राज्यों के प्रभाव के कारण दर्शन के प्रभाव का दीपन किया गया है। प्रथम भाग के प्रथम खण्ड में छोटे-बड़े मठों अथवा मन्दिरों में बैठक मूल के विवेचन से प्रारम्भ साधना-सहिता और उनकी साधना-सामग्री का समावेश किया गया है, और साथ में वैदिक ऋग्वेद, वेदान्त-वेदिलास आदि ग्रन्थों से साधन-साध्य महत्त्व के साथ उनके साथ मिलाने वाला च्याख्यान भी उपस्थित किया गया है।पृष्ठ पर यह भी बताया गया है कि प्रथम भाग के द्वितीय भाग में पाशुपत सूत्र पर पंचाश्चार्य भाष्य, पातंजल सहिता, गणित, शैवागम तथा रहस्यम् जैसे मूल ग्रन्थों पर आधारित सामग्री और स्त्री-पुरुष निरूपण एवं वैराग्य जैसे विषय प्रस्तुत किए गए हैं।
यह पुस्तक शैव-दर्शन के शोध-पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है, और पाशुपत परम्परा के इतिहास को समझने का काम करती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- पाशुपत शैव धर्म तथा दर्शन (भाग 1)
- मूल सिद्धांत तथा परंपरा
- शिव-उपासना
- शोध तथा विवेचन
पुस्तक की मुख्य बातें
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