रत्नावली नाटिका (महाकवि श्रीहर्ष) - Ratnavali Natika
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रत्नावली नाटिका (महाकवि श्रीहर्ष) – Ratnavali Natika

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इस किताब के बारे में

रत्नावली नाटिका नामक पुस्तक का शीर्षक-पृष्ठ महाकवि श्रीहर्ष विरचिता के रूप में दर्ज है और साथ में किरणावली संस्कृत-हिन्दी व्याख्यादीपिका होने का उल्लेख है। व्याख्याकार डॉ. राजेश्वर (राजू) शास्त्री मुसलगाँवकर हैं, जो एम.ए. और पी-एच.डी. साहित्याचार्य हैं, और भूमिका लेखक आचार्य डॉ. त्रिनाथ शर्मा हैं। यह पुस्तक काशी संस्कृत ग्रन्थमाला की 299वीं पुस्तक है। प्रकाशक चौखम्भा संस्कृत संस्थान, वाराणसी है, जिसकी दिल्ली और पुणे में भी शाखाएँ हैं। पुनर्मुद्रण संस्करण 2014 का है, ISBN 978-93-81608-15-9 और मूल्य 85 रुपये है।

रत्नावली संस्कृत नाट्य-साहित्य की उत्कृष्ट नाटिकाओं में गिनी जाती है, जिसमें एक राजकुमारी और एक बानर की प्रेम-कथा का नाटकीय वर्णन है। किरणावली व्याख्या में श्लोकों का अर्थ हिन्दी में सहज भाषा में समझाया गया है और अनेक टीकाओं का संकलन भी किया गया है। भूमिका में इस नाटक की नाट्य-विशेषताओं, पात्र-चित्रण और उसके प्रदर्शन-योग्य पक्षों पर विचार किया गया है।

रत्नावली का पाठ न केवल नाटक-अध्ययन के लिए, बल्कि संस्कृत भाषा और साहित्य-इतिहास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें अनेक प्राचीन शब्द और संकेत मिलते हैं जिनकी व्याख्या अन्यत्र कम मिलती है। किरणावली व्याख्या सहित यह संस्करण संस्कृत के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नाटक-अभ्यासियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। महाकवि श्रीहर्ष की रचनाएँ शास्त्रीय संस्कृत-साहित्य की विरासत का महत्वपूर्ण अंश माने जाते हैं।

यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।

कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।

📖 पुस्तक के अंदर क्या है —
  • आत्मा तथा ब्रह्म का स्वरूप
  • जगत् की उत्पत्ति, माया तथा अद्वैत
  • साधना, ध्यान तथा आत्मज्ञान के सोपान
  • उपनिषद् तथा गीता का सार

पुस्तक की मुख्य बातें

📕पूरी पुस्तक, एक ही PDF मेंपूरा ग्रंथ, बिना टूटे
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