अण्डवृद्धि एवं अंत्रवृद्धि का घरेलु उपचार | Home Remedies for Hydrocele and Hernia

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अण्डवृद्धि एवं अंत्रवृद्धि का घरेलु उपचार | Home Remedies for Hydrocele and Hernia

यह रोग अण्डों में किसी पर आघात के पहुंचने के कारण उत्पन्न होते हैं जैसे रस और खून आदि की वृद्धि होने से अण्डकोष वृद्धि हो जाती है। इसी को अण्डवृद्धि कहते है। यह रोग ज्यादा बढ़ने पर परेशानी उत्पन्न करता है। कुपित हुए दोष जब अण्डकोष वाहिनी धमनी में प्राप्त होकर, उन कोषों की वृद्धि करते है तो उसी को अण्डवृद्धि कहते है। अण्डवृद्धि मुख्य रूप से दो प्रकार के माने जाते है-

रक्तज
मूत्रज।

उपचार :hydrocele

अण्डवृद्धिः 20 से 50 मि.ली. सोंठ के काढ़े (2 से 10 ग्राम सोंठ को 100 से 300 मि.ली. पानी में उबालें) में 1 से 5 मि.ली. अरण्डी का तेल डालकर पीने से तथा अरनी के पत्तों को पानी में पीसकर बाँधने से अण्डवृद्धि रोग में लाभ होता है।

अंत्रवृद्धिः 1 से 10 मिलिग्राम अरण्डी के तेल में छोटी हरड़ का 1 से 5 ग्राम चूर्ण मिलाकर देने से व मेग्नेट का बेल्ट बाँधने से हार्निया में लाभ होता है।

अन्य घरेलु उपचार :

1* त्रिफला – रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ १ चम्मच त्रिफला चूर्ण ले कर सोये।

2* नियमित रूप से दस ग्राम अदरक का मुरब्बा सवेरे खाली पेट सेवन करने से हर्निया रोग ठीक होता हैं। एक से दो महीने सेवन करने से ही प्रयाप्त लाभ होता हैं।

3* अरण्ड का तेल – अगर अंडकोष में वायु भरी हुयी प्रतीत हो तो एक कप दूध में २ चम्मच अरण्ड का तेल डालकर एक महीने तक पिलाये, इस से हर्निया सही होता हैं। और 1 से 10 मिलिग्राम अरण्डी के तेल में छोटी हरड़ का 1 से 5 ग्राम चूर्ण मिलाकर दे

4* नए रोग में कदम्ब के पत्ते पर घी लगाकर उसे आग पर हल्का सा सेक कर अंडकोष पर लपेट दे तथा लंगोट से बाँध ले।

5* कॉफ़ी – कॉफ़ी ज़्यादा पीने से भी इस रोग में बहुत लाभ मिलता हैं।

6* चुम्बकीय चिकित्सा से भी बहुत लाभ मिलता हैं। इसके लिए आप किसी चिकित्सक से परामर्श करे।

7* नारायण तेलinguinal-hernia : नारायण तेल से मालिश करना चाहिए। मात्रा 1 से 3 ग्राम दूध के साथ पीना चाहिए।

8* ढाक : ढाक के फूलों को पानी के साथ अच्छी तरह से पकायें। खोलने पर उतार कर रख लें। हल्का ठंड़ा होने पर इसको आराम-आराम से अण्डकोष पर लेप करने से उत्पन्न सूजन से आराम मिलता है।
9* तंबाकू : तंबाकू के ताजे पत्ते पर घी चुपड़ कर, थोड़ा गर्म करें और अण्डकोष पर बांधने से सूजन दर्द सभी में आराम मिलता है।
10* पपीता : कच्चे पपीते को लेकर ऊपर का छिलका तथा अन्दर के बीज निकाल दें। बढे़ हुए अण्डकोष इस पपीते में करके, ऊपर से लंगोट बांधे। इस प्रयोग से अण्डवृद्धि और उससे होने वाले सूजन, दर्द में लाभ होता है।

भोजन तथा परहेज :

इस रोग में अधिक खाना खाना, अधिक परिश्रम, मल-मूत्र और शुक्र का वेग रोकना, गरिष्ठ यानी भारी खाना, दही, उड़द, मिठाई, बासी अन्न, मैथुन, साइकिल की सवारी सभी हानिकारक है।
इस रोग में वमन, पाचक पदार्थ सेवन, ज्वार, स्वेद, विरेचन (दस्त लाने वाली वस्तुएं), ब्रह्मचर्य-पालन (संयासी जीवन), गेहूं, शालिधान्य, पुराना चावल, ताजा मठ्ठा, गाय का दूध और हरे शाक सभी अण्डवृद्धि में फायदेमन्द है।

2 Comments

  1. G.P.Akele July 14, 2018 at 12:05 am - Reply

    Nice Information

  2. G.P.Akele July 14, 2018 at 12:06 am - Reply

    Nice

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