कटेरी के चमत्कारी 36 फायदे और उपयोग विधि | Kateri-Uses & Benefits in hindi

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कटेरी के चमत्कारी 36 फायदे और उपयोग विधि | Kateri-Uses & Benefits in hindi

कटेरी (कंटकारी) के लाभ : Kateri(Kantkari) ke labh

★ कटेरी (Kateri/Kantkari)एक प्रकार का जंगली व कांटेदार पौधा होता है जो झाड़ी के रूप में जमीन पर चारों ओर 1 से 4 फुट में फैली होती है।
★ कटेरी चमकीले हरे रंग के होते हैं और इस पर पीले रंग के डेढ़ इंच लम्बे या इससे कुछ छोटे कांटे होते हैं। इसके पत्ते 4 से 6 इंच लम्बे, कटे-फटे एवं किनारे सफेद धारीदार होते हैं जिसके नीचे कांटे होते हैं। पत्ते के बीच की शिरा सफेद रंग की होती है।
★ इसके फूल नीले या बैगनी रंग के पुंकेसर पीले रंग के होते हैं। इसका फल गोल और हरे रंग के सफेद धारीदार होते हैं। इसके फल पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं।
★ कटेरी की दो जातियां होती है- छोटी कटेरी और बड़ी कटेरी।
★ बसन्त के मौसम में कटेरी में फूल आते हैं और बारसात के मौसम में इसमें गोल-गोल फल लगते हैं। सर्दी के मौसम में ये फल पक जाते हैं।
★ कटेरी के पौधे दिसम्बर-जनवरी में जाकर सूख जाते हैं। कांटे से भरे होने की वजह से कटेरी को कोई जल्दी नहीं छूता।

कटेरी के उपयोग से विभिन्न रोगों का सरल उपचार : kateri(Kantkari) ke labh /Nuskhe

1) गले की सूजन: kateri ke fayde gale ki sujan dur karne me
गले की सूजन में फलों का रस 10-20 मिलीलीटर की मात्रा में प्रयोग करने से गले की सूजन दूर होती है।

2) टी.बी. की खांसी : kateri ke fayde khasi dur karne me
नागरमोथा, पिप्पली, मुनक्का और बड़ी कटेरी के सूखे फल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और यह 5 से 10 ग्राम की मात्रा में 1 चम्मच घी व 2 चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से टी.बी. की खांसी खत्म ठीक होती है।

3) जुकाम: kateri ke fayde jukam thik karne me
• नजला, जुकाम व बुखार से पीड़ित रोगी को पित्तपापडा, गिलोय और छोटी कटेरी को बराबर मात्रा में लेकर आधा किलो पानी में उबालकर काढ़ा बनाना चाहिए। जब काढ़ा पकते-पकते एक चौथाई रह जाए तो इसे छानकर पीना चाहिए। इससे सर्दी-जुकाम व मौसम परिवर्तन से होने वाले रोग ठीक होते हैं।
• कटेरी का काढ़ा बनाकर और इसमें मिश्री मिलाकर पीने से पुराना जुकाम ठीक होता है।kantakari ke fayde in hindi

4) उल्टी (वमन): kateri ke fayde ulti thik karne me
• कटेरी की जड़ का 10 से 20 मिलीलीटर रस 2 चम्मच शहद के साथ मिलाकर देने से वमन बंद होता है।
• अडूसा, गिलोय व छोटी कटेरी को मिलाकर काढ़ा बना लें और ठण्डा होने पर शहद के साथ मिलाकर 10-20 मिलीलीटर की मात्रा में पीएं। इससे उल्टी, सूजन व खांसी का बुखार ठीक होता है।

5)मंदाग्नि: kateri ke fayde bhukh badhane ke liye
कटेरी और गिलोय बराबर मात्रा में लें और इसके डेढ़ किलो रस में एक किलो घी डालकर पकाएं। जब यह पकते-पकते केवल घी बच जाए तब इसे उतार कर छान लें। इस घी को 10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मंदाग्नि और वात की खांसी मिटती है।

6) पेट के रोग: kateri ke fayde pet ke rog dur karne me
कटेरी के फल के बीजों को छाछ व नमक के साथ उबालकर सूखा लें और फिर इसे रातभर छाछ में डुबोकर दिन में सूखा लें। इस तरह क्रिया को 4-5 दिन तक करें और फिर बीज को घी में तलकर खाएं। इससे पेट के सभी रोग दूर होते हैं।

7) गर्भपात की आशंका: garbhpat se bachne ke liye kateri ka upay
छोटी कटेरी या बड़ी कटेरी की 10-20 ग्राम जड़ों और 5-10 ग्राम छोटी पीपल को भैंस के दूध के साथ पीसकर कुछ दिनों तक प्रतिदिन स्त्री को पिलाने से गर्भपात नहीं होता।

8) सिर दर्द: kateri ke fayde sir dard dur karne me
कटेरी, गोखरू और लाल धान के चावल को मिलाकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में 3-4 बार सेवन करने से सिर का दर्द ठीक होता है। इसका प्रयोग बुखार में उत्पन्न पसलियों का दर्द आदि को दूर करने के लिए भी किया जाता है।

9) आंखों के दर्द: kateri ke fayde aankh dard dur karne me
कटेरी के 20 से 30 ग्राम पत्ते को पीसकर लेप बना लें और इस लेप को आंखों पर रखें। इससे आंखों को ठण्डक मिलती है और दर्द शांत होता है।

10) नेत्रजाला: kateri ke fayde aankhon ka jala dur karne me
कटेरी की जड़ को नींबू के रस में घिसकर आंखों में काजल की तरह लगाएं। इसे प्रतिदिन आंखों में लगाने से धुंध और जाला मिटता है।

11) अपस्मार (मिर्गी): kateri ke fayde mirgi dur karne me
कटेरी की जड़ और भांग के बीजों को एक साथ छोटे बच्चे के पेशाब में पीसकर मिर्गी से पीड़ित रोगी की नाक में 2 बूंद दिन में 3-4 बार टपकाने से मिर्गी रोग ठीक होता है।

12) दांतों का दर्द:kateri ke fayde danton ka dard dur karne me
• अगर दाढ़ (जबड़े) में तेज दर्द हो रहा हो तो कटेरी के बीजों को जलाकर उसका धुआं लें। इससे दर्द में तुरंत आराम मिलता हैं। कटेरी की जड़, पत्ते व फल को मिलाकर काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से दांतों का दर्द ठीक होता है।
• छोटी कटेरी या भूमि-कदम्ब का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा सरसों का तेल मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम कुल्ला करने से दांतों में हो रही पीड़ा खत्म होती है।Kateri Kantkari ke labh in hindi

13) गंजापन:kateri ke fayde ganjapan dur karne me
गंजापन के रोग में कटेरी के पत्तों का 20 से 50 मिलीलीटर रस में थोड़ा शहद मिलाकर सिर की मालिश करने से कुछ दिनों में कीटाणु खत्म होकर त्वचा मुलायम होकर नए बाल आ जाते हैं।

14) बुखार: kateri ke fayde bukhar dur karne me
• कटेरी की जड़ और गिलोय बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा 10-20 मिलीलीटर की मात्रा में बुखार से पीड़ित रोगी को सेवन कराएं। इससे पसीना आकर बुखार कम हो जाता है। इसका प्रयोग खांसी के साथ आने वाले बुखार में भी किया जाता है।
• बड़ी कटेरी की जड़ का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रतिदिन 2 से 3 बार सेवन करने से बुखार कम होता है।
• भटकटैया (कटेरी) की जड़ और गुडूची को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा बुखार से पीड़ित रोगी को सेवन कराएं। इससे बुखार से पीड़ित रोगी को शक्ति मिलती है।
• कटेरी की जड़, सौंठ, बलामूल, गोखरू व गुड़ को दूध के साथ मिलाकर पका लें। इस तैयार काढ़ा को 100 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मलमूत्र की रुकावट, बुखार व सूजन दूर होती है।

15) सांस रोग या दमा:kateri ke fayde swas rog(dama) dur karne me
• छोटी कटेरी के पंचांग को पीसकर गोला बना लें और इस पर कम्भारी, बरगद, जामुन या आम के पत्ते को लपेटकर सूत से बांध दें। इसके बाद इस पर आटे का मोटा सा लेप करके ऊपर से मिट्टी के 2 उंगुल मोटे लेप चढ़ा दें। अब इसे उपलों की आग में पकाएं और जब मिट्टी लाल हो जाए तो इसे निकाल लें। इसके बाद इसके ऊपर से मिट्टी व आंटे का लेप हटाकर छोटी कटेरी के पंचांग के गोले से रस निकाल ले लें। इस रस में छोटी पीपल का चूर्ण डालकर पीने से सांस, कफ व खांसी दूर होती है।
• छोटी कटेरी के फलों को कूटकर काढ़ा बना लें और इसमें थोड़ी सी हींग और सेंधानमक मिलाकर आधे कप की मात्रा में सुबह-शाम पीने से दमा का दौरे खत्म होते हैं।
• बड़ी कटेरी की जड़ का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ 6 से 8 घंटे के अंतर पर सेवन करने से सांस की रुकावट दूर होती है।
• कफ, बुखार, दमा व छाती का दर्द आदि रोगों में कटेरी का प्रयोग बहुत किया जाता है। छाती में कफ पैदा होने पर कटेरी के फलों का काढ़ा बनाकर 50 मिलीलीटर काढे़ में 2 ग्राम भुनी हुई हींग व 2 ग्राम सेंधानमक डालकर पीना चाहिए। इससे कफ दूर होकर दमा रोग ठीक होता है।
• कटेरी के पंचांग को मोटा-मोटा कूटकर 8 गुना पानी के साथ पकाएं। जब यह पकते-पकते गाढ़ा हो जाए तो इसे उतारकर कांच की शीशी में भरकर रख लें। यह गाढ़ा काढ़ा 1 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से सांस व दमा रोग ठीक होता है।
• छोटी कटेरी व बड़ी कटेरी 200-200 ग्राम, अड़ूसे की जड़ की छाल 200 ग्राम, गिलोय 20 ग्राम, शतावर 60 ग्राम, भारंगी 400 ग्राम, गोखरू 40 ग्राम, पीपल की जड़ 40 ग्राम एवं पाढ़र 40 ग्राम। इन सभी को एक साथ पीसकर लगभग 5 लीटर पानी में डालकर धीमी आंच पर पकाएं। जब यह पककर केवल एक चौथाई रह जाए तो इसे उतारकर छान लें। फिर इस काढ़ा में गुड़ 400 ग्राम, घी 200 ग्राम और दूध 400 मिलीलीटर डालकर धीमी आग पर पुन: पकाएं। जब यह पककर गाढ़ा हो जाए तो इसे उतार लें और ठण्डा हो जाने पर काकड़ासिंगी 30 ग्राम, जायफल 30 ग्राम, तेजपात 30 ग्राम, लौग 40 ग्राम, वंशलोचन 40 ग्राम, दालचीनी 20 ग्राम, एला 20 ग्राम, कूठ 40 ग्राम, सोंठ 40 ग्राम, पीपल 40 ग्राम, तालीसपत्र 30 ग्राम, जावित्री 10 ग्राम को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर इस काढ़े में मिला लें। इस तरह तैयार मिश्रण में 200 ग्राम शहद और मिला लें और प्रतिदिन 20 से 40 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे सांस रोग, खांसी, अरुचि, स्वरभंग आदि रोग ठीक होते हैं।

16) अंडकोष की सूजन: kateri ke fayde andkosh ki sujan dur karne me
कटेरी की जड़ की छाल का चूर्ण 10 ग्राम और 5 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से अंडकोष की सूजन दूर होती है।

17) गर्भ के विकार:
• छोटी कटेरी गोखरू, कमल और कमलचन्द को पीसकर दूध के साथ मिलाकर पीएं या अनन्तमूल, कालीसारिबा रास्ना, भारंगी और मुलहठी का काढ़ा बनाकर सेवन करें। इसके सेवन से चौथे महीने का गर्भ विकार दूर होता है।
• बड़ी कटेरी या कंभारी के फल की छाल का चूर्ण या काढ़ा लेने से गर्भ के विकार नष्ट होते हैं।

18) मासिकधर्म (रजोदर्शन): kateri ke fayde masik dharm ki pareshani dur karne me
कटेरी (पीले फूल वाली) की जड़ की छाल, धवपुष्प, बड़ के अंकुर तथा नीलकमल इन सभी दूध के साथ पीस लें। इसके सेवन करने से मासिकधर्म सम्बंधी परेशानी दूर होती है। इसका प्रयोग करने से बांझपन भी दूर होता है।

19) स्तनों का ढीलापन: kateri ke fayde stan ka dhilapan dur karne me
छोटी-बड़ी कटेरी की जड़, फदूंरी की जड़, अनार का बकला (छाल) और मौलश्री की छाल को पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तन कठोर होते हैं।

20) अधिक नींद आना: kateri ke fayde adhik neend ana dur karne me
कटेरी, गिलोय, पोहकरमूल, सौंठ, भारंगी और हरड़ इन सब को बराबर मात्रा में लेकर कुल 20 ग्राम की मात्रा बना लें और इसे बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छानकर रोगी की आंखों में लगाने से नींद और सुस्ती दूर होती है।

21) नाक के रोग: kateri ke fayde naak ke rog dur karne me
• कटेरी के रस को नाक में बूंद-बूंद करके डालने से नाक की बदबू दूर होती है।
• कटेरी के फल, पत्ते व जड़ को पीसकर रस निकाल लें। इस रस को सिर के तालु में लगाने से नाक से खून बहना बंद होता है।
• सिर के बालों को पूरी तरह से साफ कराके उसके ऊपर कटेरी के पत्तों को पीसकर लगाने से नाक के सारे रोग ठीक होते हैं।

22) पुराना घाव: kateri ke fayde purana ghav thik karne me
छोटी कटेरी के फल को कूट-पीसकर पानी में मिलाकर रखें और इसमें रुई को भिगोंकर घाव पर रखें। इससे रोगी का दर्द व जख्म जल्द ठीक होता है।

23) मिर्गी (अपस्मार): kateri ke fayde mirgi rog dur karne me
छोटी कटेरी के फल का रस निकालकर मिर्गी के रोगी को सुंघाने से मिर्गी का दौरा खत्म होता है।

25) त्वचा के रोग: बड़ी कटेरी के पत्तों का रस त्वचा के रोगों पर लगाने से लाभ होता है।

26) बच्चों के रोग: kateri ke fayde bachon ke rog thik karne me
10 ग्राम कटेरी और 6 ग्राम मिर्च को एक साथ पीसकर 21 नीम की पत्ती के रस में मिलाकर पीस लें। फिर इसकी 120 मिलीग्राम की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। मसूरिका निकलने पर 1-1 गोली बच्चे को सुबह-शाम दूध के साथ सेवन कराएं। इससे माता शांत होती है। यदि फरवरी-मार्च के महीने में बच्चे को यह खिलाया जाए तो पूरे साल शीतला निकलने का डर नहीं रहता है।

27) गलकोष प्रदाह: 10 से 20 ग्राम कतीरा को पानी में फुलाकर मिश्री के साथ शर्बत बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से गलकोष प्रदाह रोग ठीक होता है।

28) मूत्राघात: कटेरी का रस निकालकर छाछ के साथ पीने से मूत्रघात के रोग दूर होते हैं।

29) वात-कफ ज्वर: कटेरी, गिलोय, पोहकरमूल व सोंठ को एक साथ काढ़ा बनाकर पीने से वात-कफ ज्वर ठीक होता है। इसका प्रयोग दर्द, अफारा, सांस (दमा), खांसी और अरुचि आदि को दूर करने के लिए भी किया जाता है।

30) कफ-पित्त ज्वर: कटेरी, वासा, लोध, कूठ और परवल को एक साथ पीसकर पानी के साथ सेवन करने से कफ-पित्त ज्वर ठीक होता है।

31) इन्फ्लुएन्जा: इन्फ्लुएन्जा के रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए कटेरी, गिलोय, सोंठ और कालीमिर्च को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा 2-2 चम्मच की मात्रा में दिन कई बार रोगी को सेवन कराएं। इससे रोग में पूर्ण आराम मिलता है।

32) खांसी: kateri(Kantkari) ke fayde khasi dur karne me
• ऐसी खांसी जिसमें गले में अटका हुआ कफ (बलगम) बार-बार खखारने पर भी नहीं निकलता है। ऐसी खांसी को दूर करने के लिए छोटी कटेरी की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में पीपल के 1 ग्राम चूर्ण के साथ थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटने से कफ आसानी से निकल जाता है और खांसी में आराम मिलता है।
• कटेरी के फूलों का चूर्ण आधा से 1 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चटाने से बच्चो की खांसी दूर होती है।
• छोटी कटेरी के फूलों को 2 ग्राम केसर के साथ पीसकर शहद के साथ सेवन करने से खांसी ठीक होती है।
• कटेरी के काढ़े में पीपल का चूर्ण डालकर पीने से सभी प्रकार की खांसी नष्ट होती है।
• बड़ी कटेरी की जड़ का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से कफ एवं खांसी में लाभ मिलता है।
• 10 ग्राम कटेरी, 10 ग्राम अड़ूसा एवं 2 ग्राम पीपल को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।
• 16 किलो छोटी कटेरी का रस या कटेरी का काढ़ा बनाकर इसमें 4 किलो गाय का घी मिला लें। फिर रास्ना, खिरेंटी, सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल व गोखरू 100-100 ग्राम लेकर पानी के साथ पीसकर इसे काढ़ा में मिलाकर हल्की आग पर पकाएं। जब काढ़ा का पानी जलकर केवल घी बच जाए तो इसे उतारकर छान लें। यह घी 3 से 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से सभी प्रकार की खांसी ठीक होती है।

33) नपुंसकता: kateri ke fayde napunsakta dur karne me
बड़ी कटेरी की 25 ग्राम ताजी जड़ की छाल को गाय के दूध में उबालकर पीने से नपुंसकता दूर होती है। ध्यान रहे खटाई और बादीयुक्त चीजों का सेवन न करें।

34) कान के कीड़े: कटेरी को आग में जलाकर इसके धुंए को कान में लेने से कान के कीड़े समाप्त होते हैं।

35) जिगर का रोग: कटेरी को पानी के साथ उबालकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा 10 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम जिगर रोग से पीड़ित रोगी को पिलाएं। इससे जिगर के रोग ठीक होते हैं।

36) पथरी:kateri(Kantkari) ke fayde pathri dur karne me
कटेरी के रस को शहद में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से पथरी गलकर निकल जाती है। इसके प्रयोग से रुक-रुककर आने वाला पेशाब खुलकर आने लगता है।

विशेष : कटेरी एवम दुर्लभ जड़ी बूटियों से निर्मित अच्युताय हरिओम फार्मा का लाभदायक उत्पाद “Cough Syrup( कफ सिरप )
कफ सिरप के फायदे : “अच्युताय हरिओम कफ सिरप” सभी प्रकार के श्वासनली के विकार ,सर्दी खांसी ,दमा तथा सूखी खांसी में अत्यंत लाभकारी है |

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

2018-09-09T16:45:35+00:00 By |Herbs|0 Comments