पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

फिटकरी के 22 हैरान कर देने वाले कमाल के फायदे | fitkari ke fayde in hindi

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फिटकरी के 22 हैरान कर देने वाले कमाल के फायदे | fitkari ke fayde in hindi

परिचय :

★ फिटकरी (fitkari)को संस्कृत में स्फटिका, हिंदी में फिटकरी, इंग्लिश में पोटाश एलम कहते है।
★ फिटकरी सफेद, पीले, लाल और काली रंग की हो सकती है। सफ़ेद रंग की फिटकरी को सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है।
★ फिटकरी (fitkari)के बारे में भारतीयों को जानकारी बहुत ही प्राचीन समय से थी।
★ भारत में चिकित्सा के लिए इसका प्रयोग आयुर्वेद में किया जाता रहा है।
★ चरक संहिता में भी इसके प्रयोग का वर्णन पाया जाता है।
★ रत्न समुच्चय ग्रन्थ में इसे तुवरी कहा गया है। रसतरंगिणी में इसे पित्त-कफ नाशक, ज्वरनाशक, आँखों के रोगों में लाभप्रद, खूनके बहने को रोकने वाली, मुख के रोगों, कान रोगों और नाक से खून बहने से रोकने वाली माना गया है।
★ चिकित्सा के लिए फिटकरी(fitkari) का प्रयोग खून के बहने / रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। शुद्ध फिटकरी या इसकी भस्म को सुजाक, रक्तप्रदर, खांसी, निमोनिया, खून की उलटी, विष विकार, मूत्रकृच्छ, त्रिदोष के रोगों, घाव, कोढ़ आदि में आंतरिक प्रयोग भी किया जाता है।
★ इसे पानी को साफ करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे रंग पक्का करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
Alum Information, Benefits and 20 Medicinal Uses in Hindi

प्रकार: अकार्बनिक खनिज, क्रिस्टलीय

रासयनिक सूत्र Molecular formula: KAl(SO4)2·12H2O हाइड्रेट पोटैशियम एल्युमीनियम सल्फेट

आंतरिक प्रयोग के लिए मात्रा: 250 mg- 1 gram

फिटकरी के स्थानीय नाम:

★ संस्कृत: कांक्षी, तुवरी, स्फटिका, सौराष्ट्री, शुभ्रा, स्फुटिका, स्फटी, रंगदा, दृढरंगा
★ लैटिन: एल्युमीनियम सल्फस
★ हिंदी, बंगाली: फिटकिरी Phitkari
★ मराठी: तुरटी
★ गुजराती: फटकड़ी
★ तमिल: Patikaram, Padikharam, Shinacarum
★ तेलुगु: Pattikaramu
★ कन्नड़: Phatikara
★ फारसी: जाक सफ़ेद Zak safed, Zamah
★ अरब: शवेयमानी Shibe yamani, Zaj abyaz
★ इंग्लिश: एलम Sulphate of Alumina and Potash, Sulphate of Aluminium and Ammonium, Aluminous Sulphate
★ उर्दू: फिटकिरी Phitkari
★ सिन्धी: पटकी
★ तमिल: Patikaram, Padikharam, Shinacarum

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फिटकरी के गुण :

★ यह कसैली, गर्म, योनि संकोचक Vaginal contractive है।
★ यह वातपित्त, कफ, घाव, कोढ़, और विसर्प नाशक है।
★ यह तासीर में गर्म है।
★ यह रक्तस्राव को रोकती है।
★ यह एसट्रिनजेंट / संकोचक है।
★ फिटकरी की भस्म का सेवन छाती में जमे कफ को निकालती है।
★ यह विष नाशक है। सांप काटने पर तुरंत ही, फिटकरी की भस्म (1 gram) को घी (60 gram) में मिलाकर लेने से ज़हर का आगे बढ़ना रुक जाता है।आइये जाने fitkari ke fayde in hindi

फिटकरी के चिकित्सीय प्रयोग :

★ फिटकरी को बाहरी तथा आंतरिक दोनों तरह से प्रयोग किया जाता है। बाहरी रूप से पानी में डुबा कर खून बहने वाली जगह पर मल लेने से खून का बहना रुक जाता है। फिटकरी को लगाने से संक्रमण भी नहीं होता।

★ खाने या आंतरिक प्रयोग के लिए फिटकरी की बहुत कम मात्रा प्रयोग की जाती है। आंतरिक प्रयोग के लिए हमेशा शुद्ध फिटकरी ही प्रयोग की जानी चाहिए। आग में फुला देने से फिटकरी शुद्ध हो जाती है। इसे तवे पर रख कर फुला कर, खील बना कर, महीन पीस लेने के बाद आंतरिक प्रयोग में ला सकते हैं।

१. नाक से खून आना nose bleed, naksir :

★ गाय के दूध में थोड़ी सी फिटकरी घोल कर नाक में कुछ बूंदे टपकाने से नाक से खून बहना रुकता है।

२. चोट लगने से खून बहना, कटने से खून बहना Bleeding from cut

★ फिटकरी का टुकड़ा या चूरा प्रभावित जगह पर लगायें।

३. योनि की शिथिलता, फ़ैल जाना slackness of vagina

★ २ ग्राम फिटकरी को पानी में १०० मिलीलीटर पानी में घुला कर, रोज़ योनि माग का प्रक्षालन करने से योनि मार्ग को सिकोड़ने में मदद होती है।

४. रक्तपित्त bleeding disorders

★ फिटकरी को १२५ मिलीग्राम की मात्रा में ३ ग्राम चीनी के साथ मिला कर खाने से लाभ होता है।

५. आँखों से पानी आना, लाली, कीचड़, पकना, दुखना, सूजन diseases of eyes
★ 50 ml गुलाब जल में 500-600 mg, फिटकरी घोलकर रख लें। इसे कुछ बूंदों में आँखों में डालने से लाभ होता है।

६. मजबूत दांत strengthening teeth
★ फिटकरी के चूरे को मौलश्री छल के चूर्ण में मिलाकर दांतों पर मलने से दांत मजबूत होते हैं।

७. दांत दर्द, दांत में मवाद, मुंह में लिसलिसापन tooth ache, stickiness in mouth
★ सेंधा नमक और फिटकरी के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर दांतों पर रगड़ने से दांत मजबूत होते है, दांत दर्द से राहत मिलती है।

८. दांतों के रोग dental diseases
★ सरसों तेल में फिटकरी चूर्ण मिलाकर दांतों की मालिश करें।

९. दन्त मंजन tooth powder
★ दन्त मंजन बनाने के लिए फुलाई हुई फिटकरी + हल्दी + सेंधा नमक + त्रिफला + नीम की पत्तियां + बबूल की छाल (प्रत्येक 100 gram) तथा 20 ग्राम लौंग का पाउडर मिला लें। इसे दिन में दो बार प्रयोग करने से पायरिया, मुंह की दुर्गध, दांतों का दर्द, कमजोरी, सेंसिटिवटी आदि दूर होते हैं।

१०. शीतपित्त urticaria
★ शुद्ध फिटकरी का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में दूध या पानी के साथ लें।

११. दाढ़ी बनाते समय कट जाना cut in shaving
★ फिटकरी को कट पर पानी लगाकर लगाने से कट से खून निकलना बंद होता है।

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१२. बवासीर में मस्से hemorrhoids
★ बवासीर के मस्सों पर फिटकरी का लेप लगाने से लाभ होता है।

१३. अंदरूनी चोट के लिए internal injuries
★ एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच शुद्ध फिटकरी का चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है।

१४. पेशाब में खून जाना, गुदा से खून जाना blood in urine
★ आधा चम्मच शुद्ध फिटकरी का चूर्ण, आधा चम्मच मिश्री के साथ मिलाकर लें।

१५. विषम ज्वर, मलेरिया का बुखार intermittent fever
★ चौथाई या आधा चम्मच फिटकरी भस्म, समभाग मिश्री के साथ, २-४ घंटे के अंतराल पर लेना चाहिए।

१६. पेचिश, अतिसार, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर loose motions, dysentery, bleeding piles, abnormal uterine bleeding
★ फिटकरी भस्म आधा चम्मच की मात्रा में मुनक्के / दही के साथ लें।

१७. मुंह / जीभ पर छाले, टांसिल mouth blisters, tonsillitis
★ फिटकरी के पानी से कुल्ला करें।

१८. जहरीले कीटों (बर्रे, मधुमक्खी), बिच्छु, आदि के काटने पर insect stings
★ गर्म पानी के साथ फिटकरी पीस कर, प्रभावित जगह पर लगाएं।

१९. मूत्रकृच्छ painful urination
★ गर्म करके फुलाई और पीसी हुई फिटकरी १ ग्राम की मात्रा में फंकी की तरह लेने से और फिर दूध पीने से पेशाब में दर्द आदि दूर होता है।

२०. खांसी, कुक्कुर खांसी whooping cough
★ फुलाई फिटकरी को 500 mg-1 gram की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से कफ, खांसी दूर होते हैं।

२१.खुजली
★ महिलाओं को श्वेत प्रदर या गुप्तांग में खुजली , जलन आदि हो तो ऐसे में फिटकरी घुले पानी से योनि को दिन ने तीन चार बार धोने से बहुत आराम मिलता है। योनि में यदि ढीलापन हो तो वो खत्म होता है।

२२. जुएँ
★ सिर में जुएँ हो गई हों तो फिटकरी मिले पानी से कुछ दिन सिर धोने से जुएँ खत्म हो जाएँगी।

विशेष : फिटकरी को आमतौर पर बाहरी प्रयोग के लिए ही प्रयोग किया जाता है। बाहरी प्रयोग से किसी भी तरह की हानि नहीं है। लेकिन आंतरिक प्रयोग में सावधानी रखने की ज़रूरत है। आंतरिक प्रयोग के लिए केवल उपयुक्त फिटकरी (शुद्ध या भस्म) ही प्रयोग की जानी चाहिए और वो भी बहुत ही कम मात्रा में। अधिक मात्रा में प्रयोग फेफड़े, आँतों और पेट के लिए नुकसानदायक है।

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2017-06-21T11:47:52+00:00 By |Ayurveda, Herbs|0 Comments

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