हृदय रोग (दिल की बीमारी) के घरेलू उपचार | Heart Problem Home Remedy in Hindi

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हृदय रोग (दिल की बीमारी) के घरेलू उपचार | Heart Problem Home Remedy in Hindi

हृदय रोग (दिल की बीमारी) के कारण और प्रकार : hriday rog ke karn aur prakar

मानव समेत सभी प्राणियों के जीवन को कायम रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानेवाला हृदय कई कारणों से कई तरह की बीमारियों या विकारों से ग्रस्त हो जाता है। इन बीमारियों में एंजाइना, मायोकार्डियल इंफैक्शन, हाइपरटेंसिव हार्ट डिजीज, कार्डियोमायोपैथी, एट्रियम सेप्टल डिफेक्ट, वेंट्रिकूलर सेप्टल डिफेक्ट और रह्यूमेटिक हार्ट डिजीज प्रमुख हैं।

1-इस्कीमिक हार्ट डिजीज : इस्कीमिक हार्ट डिजीज अर्थात् हृदय धमनियों की बीमारियाँ औद्योगिक देशों में असामयिक मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है। इन देशों में हर तीसरे व्यक्ति की मौत इन्हीं की बीमारियों के कारण होती है। इन बीमारियों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सी.ए.डी.) भी कहा जाता है। इसका आरंभिक रूप है-एंजाइना और खतरनाक रूप है-दिल का दौरा (मायोकार्डियल इंफैक्शन)।
इन बीमारियों का कारण : हृदय धमनियों में विभिन्न कारणों से अवरोध उत्पन्न होना है। हृदय की धमनियों के सँकरे हो जाने अथवा उनमें कोलेस्टेरॉल जम जाने अथवा रक्त के थक्के बनने से रक्त प्रवाह में रुकावट हो जाती है और इस कारण से हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता है और उसकी मांसपेशियों को ऑक्सीजन एवं ग्लूकोज की आपूर्ति नहीं हो पाती है। इससे एंजाइना और दिल के दौरे जैसी खतरनाक स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। चिकित्सकीय भाषा में इन स्थितियों को इसे इस्कीमिक हार्ट डिजीज (आई.एच.डी.) अथवा कोरोनरी आर्टरीडिजीज (सी.ए.डी.) कहा जाता है।

2-जन्मजात विकार : हमारा हृदय जन्मजात एवं वंशानुगत विकारों से भी ग्रस्त हो सकता है। इन विकारों में हृदय कपाटों का न होना अथवा उनका सामान्य से छोटा होना तथा हृदय में छेद का रह जाना प्रमुख हैं। बचपन में ही इन विकारों के पता लग जाने पर यथासंभव तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है। हालाँकि कई बार हृदय के पैदाइशी विकार उम्र बढ़ने पर ही प्रकट होते हैं। सबसे सामान्य किस्म का विकार एट्रियम सेप्टल डिफेक्ट है। इसमें हृदय के दोनों ऊपरी खानों-बाएँ और दाएँ आलिंद के बीच की दीवार में छेद या रिक्त स्थान रह जाता है।

3-हयूमेटिक हार्ट डिजीज : कई बार बचपन में रहयूमेटिक बुखार हो जाने के कारण हृदय के कपाट विकारग्रस्त हो जाते हैं। इसमें या तो वॉल्व का घेरा सँकरा हो जाता है या वॉल्व ठीक से बंद नहीं हो पाता। इससे रक्त के समुचित प्रवाह में गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है।

4-कार्डियोमायोपैथी : हृदय मांसपेशियों की वंशानुगत बीमारियों में कार्डियोमायोपैथी प्रमुख है, जिससे मरीज की अचानक मौत तक हो सकती है। कार्डियोमायोपैथी में हृदय की मांसपेशियाँ रक्त को पंप करने की क्षमता खो देती हैं। कुछ मरीजों में हृदय की लयबद्धता गड़बड़ा जाती है, जिससे हृदय की धड़कन असामान्य हो जाती है।

5-महाधमनी की बीमारी : बाएँ निलय से प्राप्त स्वच्छ रक्त को अपनी शाखाओं और उपशाखाओं के जरिए पूरे शरीर में भेजनेवाली मुख्य धमनी अर्थात् आओर्टा (महाधमनी) की एक बीमारी है एओर्टिक डिसेक्शन। इसमें छाती में अत्यंत तेज दर्द होता है और मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल चिकित्सा और आम तौर पर सर्जरी की जरूरत होती है। एओर्टिक डिसेक्शन की आरंभिक स्थिति में महाधमनी की भीतरी परत फट जाती है और इस कारण से रक्त रिसकर महाधमनी की बाहरी सतह पर जमा हो जाता है। अगर इसे सर्जरी के माध्यम से तत्काल दुरुस्त न किया जाए तो महाधमनी की बाहरी सतह भी फट सकती है। इसका तत्काल इलाज नहीं करने पर दिल का दौरा पड़ सकता है। वृद्ध लोगों को यह बीमारी होने की अधिक आशंका होती है खास तौर पर तब जब वे उच्च रक्तचाप से भी पीड़ित होते हैं। वंशानुगत हृदय-विकार होने पर यह बीमारी कम उम्र के लोगों को भी हो सकती है। इस तरह का एक वंशानुगत विकार है-मैरफंस सिंड्रोम। इस विकार के कारण महाधमनी की दीवार कमजोर हो जाती है और आओर्टिक डिसेक्शन की स्थिति पैदा हो जाती है।

6-हृदय की धड़कनों की गड़बड़ी : हृदय की धड़कनों में असामान्यता या गड़बड़ी उत्पन्न होने की स्थिति को कार्डियक एरिदमिया कहा जाता है। इसमें थोड़े-थोड़े समय के लिए बेहोशी (सिंकोप) और हृदय की धड़कन के बहुत तेज या असामान्य होने (हार्ट पाल्पिटेशन) जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। हृदय की धड़कनों की गड़बड़ी का पता लगाने के लिए नब्ज की सावधानीपूर्वक जाँच और नियमित रूप से ई.सी.जी. की जरूरत पड़ती है।

हृदय रोग (दिल की बीमारी) के लक्षण : hriday rog ke lakshan hindi me

1- चलने-फिरने, व्यायाम करने, सीढ़ी चढ्ने अथवा पहाड़ पर चढ़ने से छाती में दर्द होना, साँस फूलना और पसीना आना दिल की बीमारी के सामान्य लक्षण हैं।
2- दिल के दौरे (मायोकार्डियल इंफैक्शन) के दौरान सीने में बहुत तेज दर्द उठता है। यह दर्द छाती के बिलकुल बीच के भाग (वक्षास्थि) के ठीक नीचे से शुरू होकर आस-पास के हिस्सों में फैल जाता है। कुछ लोगों में यह दर्द छाती के दोनों तरफ फैलता है, लेकिन ज्यादातर लोगों में यह बाईं तरफ अधिक फैलता है। यह दर्द हाथों और अँगुलियों, कंधों, गरदन, जबड़े और पीठ तक पहुँच सकता है।
हृदय रोग दबे पांव सेंध लगाकर जीवन को कष्टकारी बना देते हैं।
इनसे बचाव के लिए कुछ नुस्खे प्रस्तुत हैं।

हृदय रोग (दिल की बीमारी) के घरेलू इलाज : hriday rog ka gharelu ilaj

1- पीपल से हृदय रोग का इलाज – पीपल के कोमल पत्तों में दो कोपलों का रस 6 ग्राम से 10 ग्राम तक निकाल लें। इसमें शहद मिलाकर पीने से पीड़ा मिट जाती है तथा हृदय ताकतवर बनता है।( और पढ़ेहृदय के दर्द में तुरंत राहत देते है यह 20 घरेलु उपचार)

2- कुटकी से हृदय रोग का इलाज – 2 ग्राम कुटकी और 3 ग्राम मुलेठी को पीसकर मिश्री के साथ शर्बत बनाकर पीने से हृदय गति सामान्य होती व कमजोरी दूर होती है।

3- सेब का मुरब्बा से हृदय रोग का इलाज – सेब का मुरब्बा 50 ग्राम चांदी के दो वर्क लगाकर सुबह के वक्त सेवन करें। दिल की कमजोरी, दिल का बैठना ठीक करता है। इसे 15 दिन तक खायें। ( और पढ़े ह्रदय को स्वस्थ रखने के कुछ उपाय  )

4-पुनर्नवा से हृदय रोग का इलाज – हृदय रोग के कारण सर्वांग सूजन हो गई हो तो पुनर्नवा के मूल का 10 ग्राम चूर्ण और अर्जुन के छाल का 1 ग्राम चूर्ण 200 मि.ली. पानी में काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पियें।

5- पीपलामूल से हृदय रोग का इलाज – इलायची के दाने, पीपलामूल और परवल के पत्ते समान भाग में लेकर, चूर्ण बनाकर उसमें 5 ग्राम शुद्ध घी डालें। इसे चाटने से हृदय के रोग और वेदना मिट जाती है।( और पढ़ेहृदय की कमजोरी के असरकारक घरेलू उपचार )

6- मेहंदी से हृदय रोग का इलाज – उच्च रक्तचाप वाले रोगियों के पैरों के तलवों व हथेली पर मेहंदी का लेप समयसमय पर करने से आराम मिलता है।

7-तरबूज से हृदय रोग का इलाज – उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को तरबूज रस में सेंधा नमक व काली मिर्च डालकर देना लाभप्रद रहता है। ( और पढ़ेतरबूज खाने के 21 बड़े फायदे )

8-गुलाब से हृदय रोग का इलाज – गर्मी के दिनों में कुछ लोगों को घबराहट और बेचैनी महसूस होती है। उस दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है। ऐसे में गुलाब के पुष्पों को प्रात:काल धोकर, चबाकर खाने से आराम मिलता है।

9- असंगध से हृदय रोग का इलाज -सर्पगन्धा, आंवला, गिलोय, अर्जुन वृक्ष की छाल, पुनर्नवा और असंगध बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर पानी के साथ दिन में दो बार खाने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है। ( और पढ़ेअश्वगंधा के 11 जबरदस्त फायदे )

10-शहतूत से हृदय रोग का इलाज –हृदय की कमजोरी दूर करने के लिए 25 ग्राम शहतूत का शरबत दिन में दो बार पीना हितकर है।

11-सर्पगन्धा से हृदय रोग का इलाज – सर्पगन्धा को कूटकर रख लें। प्रातःसायं 2-2 ग्राम सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर सामान्य हो जाता है।

12-धनिया से हृदय रोग का इलाज – एक ग्राम सूखा धनिया, एक ग्राम सर्पगन्धा, 2 ग्राम मिश्री में पीसकर ताजे पानी के साथ खाने से उच्च रक्तचाप घट जाता है। ( और पढ़ेधनिया के 119 स्वास्थ्यवर्धक फायदे व आयुर्वेदिक नुस्खे )

13- किशमिश से हृदय रोग का इलाज – 150 ग्राम पानी में 32 किशमिश भिगो दें। बारह घंटे भीगने के बाद प्रातः एकएक किशमिश को आधा मिनट तक खूब चबा-चबाकर खायें। लो ब्लडप्रेशर (निम्न रक्तचाप) में इससे पूर्ण लाभ होता है।

14- सेब से हृदय रोग का इलाज – सेब का मुरब्बा प्रतिदिन सेवन करने से हृदय की दुर्बलता दूर होती है।

15- शिकंजबीन से हृदय रोग का इलाज – 4 रत्ती जदवार शिकंजबीन के साथ प्रतिदिन लेने से दिल की दुर्बलता मिट जाती है।

16-अदरक से हृदय रोग का इलाज – अदरक का चूर्ण शहद मिलाकर खाने से हृदय की शक्ति बढ़ती है।  ( और पढ़ेगुणकारी अदरक के 111 औषधीय प्रयोग )

17-गुलकन्द से हृदय रोग का इलाज –सेवती का अर्क तथा गुलकन्द का सेवन भी लाभप्रद है। गाजर का मुरब्बा भी लाभदायक है।

18- गाजर से हृदय रोग का इलाज – रात्रि में गाजर को भूनकर छील लें तथा खुले में रख दें। प्रात:काल इसमें शक्कर और गुलाबजल मिलाकर खाने से हृदय की धड़कन में लाभ होगा।

19- थूहर से हृदय रोग का इलाज – नागफनी और थूहर के पंचांग की राख का सेवन करने अथवा दोनों के रस को मिलाकर पीने से (सामान्य मात्रा में) हृदय की धड़कन सामान्य हो जाती है।

20-पीपली की छाल से हृदय रोग का इलाज – पारस पीपली की छाल के मध्य भाग को पानी में घिसकर छाती पर लगाने से हृदय की पीड़ा (दर्द) दूर होती है।

21-मेथीदाना से हृदय रोग का इलाज – 6 ग्राम मेथीदाना लेकर उसको पीस लें, इसमें शहद मिलाकर सेवन करने से हृदय की पीड़ा, जलन और घबराहट दूर होती है।

हृदय रोग (दिल की बीमारी) की दवा : hriday rog ki ayurvedic dawa

अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित हृदय रोग (दिल की बीमारी) में शीघ्र राहत देने वाली लाभदायक आयुर्वेदिक औषधियां |

1)  हृदयसुधा सिरप (Achyutaya Hariom Hriday Sudha Syrup)
2)  हृदयामृत टेबलेट (Achyutaya Hariom Hriday Sudha Syrup
3)  गोझरण अर्क(Achyutaya Hariom Gaujaran Ark)

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

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