परिचय :

✵ जिस प्रकार तृण धान्यों में कोहो हैं, उसी प्रकार द्विदल धान्यों में कुलथी सबसे हल्की मानी जाती है। कुलथी गरीब वर्ग का धान्य है। इसके पौधे लगभग डेढ़ से दो फुट की ऊँचाई वाले होते हैं और जमीन पर फैलते हैं। यह देखने में उड़द के पौधों के समान होते हैं और इनके पत्ते भी अंशतः उड़द के पत्तों से ही मिलते-जुलते होते हैं ।
✵ कुलथी 3 प्रकार की होती है-1. लाल, 2. सफेद और 3. काली ।
✵ कुलथी की काली किस्म क्वचित ही पाई जाती है, जबकि तीनों किस्मों में काली किस्म उत्तम मानी जाती है।
✵ कुलथी अपने देश में उड़ीसा और कटक में अधिक होती है। इसकी दाल अन्य दालों की अपेक्षा कुछ सस्ती होती है और यह बहुत ही स्वादिष्ट और रुचिकर लगती है।
✵ औषधि के रूप में इसका उपयोग होता है। इसका लैटिन नाम ‘एटाइलोसिया स्केरेबिओईडिस है । कुलथी या कुलथा प्रायः पन्सारियों की दुकानों पर मिलती है।

कुलथी दाल के फायदे / लाभ / औषधीय गुण : kulthi dal ke fayde / labh / aushadhi gun

1- कुलथी पाक में तीखी, कसैली, पित्त तथा रक्त विकार करने वाली लघु (हल्की), दाहकारक, उष्ण वीर्य और पसीना अवरोधक है।
2- यह श्वास, कफ, खाँसी, वायु, हिचकी, पथरी, वीर्यदोष, आँखों का फूलना, जुकाम, मेद, ज्वर आदि में लाभप्रद है।
3-कुलथी का विशेष गुण मूत्रल, स्वेदहर और अश्मरीहर है।
4-कुलथी का उपयोग, धातु-उपधातु के शोधन व औषध के रूप में होता है। धातुओं के शोधन में इसका उपयोग बहुत होता है ।
5- कुलथी सामान्यतः उदर रोग, अतिसार, हिक्का, श्वास, कास, अश्मरी, अनाह, दृष्टि रोग, गुल्म, ज्वर, शुक्र, मेद, कृमि तथा शोथ का नाश करती है।
6-वायु रोग के कारण पेशाब रुक-रुककर आता हो अथवा मूत्र मार्ग में पथरी या रेती हो तो कुलथी की चाय बनाकर, उसमें मूत्रल औषधि मिलाकर देने से इसका शीघ्र निष्कासन होता है।
7-व्यक्ति यदि ठण्डी के कारण शीतलता से ग्रस्त हो तो पसीना रोककर गर्मी लाने के लिए शरीर पर कुलथी का चूर्ण मला जाता है।
8-स्त्रियों के आर्त्तवदोष, प्रसूति के समय तथा असमय के गर्भस्राव में गर्भाशय की शुद्धि के लिए 5-7 दिनों तक कुलथी का काढ़ा देने से बहुत लाभ होता है।
9-यदि प्रसूता स्त्री को उचित मात्रा में रक्तस्त्राव न होता हो तो उसे कुलथी का क्वाथ दिया जाता है। विशेषतः प्रसूता को 2-4 सप्ताह तक कुलथी का क्वाथ सेवन कराना हितकारक माना जाता है। 10-पथरी की शिकायत में कुलथी बहुत ही उपयोगी है।
11-आयुर्वेदाचार्य स्वेदाधिक्य वाले रोगियों के शरीर पर सेंकी हुई कुलथी का आटा मलने हेतु निर्देशित करते हैं।
12- कुलथी मेद वाले व्यक्तियों के लिए कुलथी के आटे की कॉजी हितकारी है।
13- हृदय की गति अनियमित हो अथवा कभी हृदय रोग का हृदय चौड़ा हो जाए तब ऐसे जीर्ण रोग में कुलथी की कॉजी लाभकारी मानी जाती है।
14-कुलथी को उबालकर पानी निकालकर फिर पुनः उबालकर उसका सार निकाला जाता है। इसे ‘काठ’ कहते हैं। वायु-विकार न हो इसलिए यह सार रोगी को चावल के साथ खिलाया जाता है।
15-कुलथी सामान्यतः रोगी व निरोगी सभी को निर्भयता के साथ दी जा सकती है। इसके सेवन से कोई हानि नहीं होती ।
16-कुलथी घोड़ों तथा दुधारू मवेशियों को भी खिलाई जाती है ।

यूनानी मतानुसार : कुलथी मधुर, मूत्रल, क्षुधाबर्धक, वृक्काश्मरी-भेदक, कफघ्न, चक्षुविकार नाशक, अर्शहर, प्लीहा वृद्धि को दूर करने वाली तथा स्त्रियों के मासिक धर्म को शुद्ध करने वाली है। पित्त वृद्धि से उत्पन्न यकृत-विकारों में भी यह लाभप्रद है।

वैज्ञानिक मतानुसार : कुलथी में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लौह, फॉस्फोरस और विटामिन ‘ए’ तथा ‘बी’ है।

कुलथी दाल से रोगों का इलाज : kulthi dal se Rogo ka ijaj

1-गुर्दे, मूत्राशय की पथरी
•  कुलथी को साफ करके 200 ग्राम कुलथी को 3 सेर पानी में रात्रि को भिगो दें तथा प्रातः काल के समय उबालें । जब 1 किलो पानी शेष रह जाए तब उसे छानकर नमक, कालीमिर्च, जीरा, हल्दी और शुद्ध घी से छौंक लें । अन्य कोई भी चीज स्वादानुसार भी डाल सकते हैं। इसे एक बार प्रतिदिन पीते रहने से गुर्दे (वृक) मूत्राशय की पथरी बिना ऑपरेशन बाहर आ जाती है । जब तक पथरी न निकले । यह प्रयोग निरन्तर जारी रखें । अधिक दिनों तक सेवन करने से कोई हानि नहीं होती ।
•  कुलथी, पाषाणभेद और गोखरू का क्वाथ बनाकर पीने से भी पथरी रोग मिटता है ।
•  40 से 50 ग्राम काली कुलथी रात में 16 गुना पानी में भिगोकर रखें और सुबह के समय खूब मसलकर कपड़े से छानकर 2-4 महीनों तक निरन्तर सेवन करने से पथरी निश्चित रूप से दूर होती है।
•  कुलथी का काढ़ा बनाकर उसमें शरपंख का चूर्ण व 2 माशे सैंधानमक मिलाकर पीने से भी पथरी मिटती है। ( और पढ़ेपथरी के सबसे असरकारक 34 घरेलु उपचार)

2-वातहर ज्वर (Rheumatie Fever)-60 ग्राम कुलथी 1 किलो पानी में उबालें । चौथाई पानी शेष रहने पर छानकर उसमें थोड़ा सैंधानमक और आधा चम्मच पिसी हुई सौंठ मिलाकर पिलाएँ।

3-श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया)-100 ग्राम कुलथी 1 किलो पानी में उबालकर एवं छानकर इसका पानी पीने से श्वेत प्रदर से ग्रसित रोगिणी स्त्री को लाभ होता है ।

4-मोटापा-100 ग्राम कुलथी की दाल नित्य खाने से मोटापा कम होता है। ( और पढ़ेतेजी से वजन कम करने के 15 उपाय )

5-वायु विकार- कुलथी का काढ़ा बनाकर पीने से वायु का विकार दूर होता है।

6- अतिसार- कुलथी के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालकर 1 तोला रस में पाव तोला कत्था मिलाकर, दिन में 3-4 बार सेवन करने से अतिसार मिटता है।( और पढ़ेदस्त रोकने के 33 घरेलु उपाय)

7- शूल- कुलथी का क्वाथ बनाकर उसमें हींग, बीड़ लवण और सौंठ का चूर्ण डालकर पीने से शूल मिटता है।

8-उदर रोग- कुलथी के दानों को उबालकर साग बनाकर खाने से उदर रोग मिटता है।

9-बवासीर- कुलथी की दाल खाने से सूखे अर्श (पाइल्स) की पीड़ा शान्त होती है। ( और पढ़ेबवासीर के 52 सबसे असरकारक घरेलु उपचार )

10-कण्ठमाल- कुलथी और कालीमिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से ‘कण्ठमाल’ नामक रोग नष्ट होता है।

11-अधिक पसीना- सेंकी हुई कुलथी का आटा शरीर पर मलने से पसीना बन्द होता है।

कुलथी दाल के नुकसान : kulthi dal ke nuksan

कुलथी पित्तकारक, विदाही और तीक्ष्ण है । अतः सगर्भा स्त्रियों एवं रक्तपित्त वालों और क्षय रोगियों को इसका सेवन वर्जित है।