श्री पुरंदरदास के भजन | Purandardas Ke Bhajan
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श्री पुरंदरदास के भजन कविराज बाबूराम कुमेवर द्वारा लिखी गई पुस्तक है, जिसमें भक्त कवि पुरंदरदास के भजन संकलित हैं। शीर्ष पृष्ठ पर इसे "गणपत मंत्र" के रूप में उल्लेखित किया गया है। प्रकाशन सत्साहित्य केन्द्र, १९७-डी कमला नगर, दिल्ली-६ से हुआ है और यह "कौतिल्य साहित्य भाला" श्रृंखला का प्रथम पुष्प है। पुस्तक लगभग एक सौ अड़सठ पृष्ठ की है।
पुस्तक का शीर्ष पद "भजन सच्चन में, काय करी मे" से आरम्भ होता है, जो राम-नाम की उपासना का आह्वान है। इसमें राम, सीता और जानकी से जुड़े पद मिलते हैं। शैली सगुण भक्ति-काव्य की है, जिसमें चेतावनी, प्रार्थना और वर्णन का मेल दिखता है। कुछ पद ऐसे भी हैं जिनमें नाम-स्मरण की महत्वता पर ज़ोर दिया गया है। पुस्तक छोटी है, पर पद-बद्ध भाषा के कारण पढ़ने में बहुत सरल है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो भक्ति-काव्य की परंपरा को सीधे स्रोत में पढ़ना चाहते हैं। पुरंदरदास के भजन हिन्दी और राजस्थानी क्षेत्र की सगुण-भक्ति के प्रमाण हैं, और इन्हें पढ़कर उस परंपरा का स्वर सीधे सुनाई देता है। छोटी और सस्ती पुस्तक होने के कारण इसे चुना हुआ अध्ययन करके पढ़ा जा सकता है। राम-भक्ति या पुरानी ब्रजभाषा साहित्य में रुचि रखने वालों के लिए यह उपयोगी संग्रह है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- पुरंदरदास के भजन
- सरल अर्थ सहित
- कीर्तन करने की विधि
- भक्ति का भाव
पुस्तक की मुख्य बातें
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