रुद्र यमल तंत्र – Rudra Yamala Tantra
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रुद्रयामल तन्त्र नामक ग्रंथ का संपादन डॉ० कन्हैयालाल शर्मा ने किया है और शीर्षक-पृष्ठ पर उनके नाम के साथ "एम० ए० (दिल्ली एवं बिहार), पी०-एच० डी० की० रिटर" जैसे उपाधि-विवरण अंकित हैं। उपशीर्षक में इसे "तन्त्र-शास्त्र का अत्यन्त विशालांक" बताया गया है। प्रकाशक रंजन पब्लिकेशन्स, 16 अच्छी रोड, दिल्ली-110002 है, फोन नम्बर 327 88 35 सहित, और संस्करण 1994 का दर्ज है। मुद्रक शिल्प विद्या, दिल्ली-32 है। पीडीएफ़ में तीन सौ पृष्ठ हैं और पृष्ठों पर पुस्तकालय की मोहरें पड़ी हैं।
पुस्तक का आरंभ एक विस्तृत विषयानुक्रमणिका से होता है, जिसमें परिचय-विभाग के उन्नीस प्रकरण दिए गए हैं। इनमें छद्मयात्रा, दशपाप और अग्नि-साधिका, धातु, छद्मायन की स्थिति, यामली उपनिषद्, यामल ज्योतिष, सांख्यागम और मोक्ष, यागरीय कर्म, कुण्डलिनी-साधना, चक्र-चित्रा, रज-शास्त्र और चक्रधात, तथा आत्मनिरीक्षा पंचकर स्तोत्र जैसे विषय आते हैं। इसके बाद ग्रंथ का मुख्य पाठ आरंभ होता है, जिसमें संस्कृत मूल के साथ हिन्दी अनुवाद दोनों दिए गए हैं और प्रत्येक विषय के साथ संदर्भ-पृष्ठ भी दिए गए हैं।
तन्त्र-शास्त्र पारम्परिक रूप से गोपनीय माना जाता है, इसलिए इस पुस्तक को केवल अध्ययन और अनुसंधान की सामग्री के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी भी मन्त्र, यन्त्र या साधना-विधि का जाप या अभ्यास स्वयं न करें और न ही किसी के कहने पर शुरू करें — ऐसा कोई भी अभ्यास केवल योग्य और अनुभवी गुरु की देखरेख में ही होना चाहिए। पाठ में किए गए देवता-वंदना या कर्मकाण्ड को अपने जीवन में अपनाने से पहले योग्य ज्ञानी से अवश्य सलाह लें।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- मंत्रों का अर्थ, उच्चारण तथा जाप-विधि
- साधना-क्रम, संख्या तथा नियम
- यंत्र, ताबीज तथा उनके प्रयोग
- फल, सावधानियाँ तथा सामान्य प्रश्न
पुस्तक की मुख्य बातें
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