अष्टवक्रासन करने का तरीका और इसके लाभ

Last Updated on July 28, 2021 by admin

क्या आप किसी विचित्र आसन की तलाश कर रहे हैं ? तो फिर सृजनात्मक मोड़ों वाले इस आसन को आज़माएँ, जिसे अष्टवक्रासन कहा जाता है। अष्टावक्र मुनि का शरीर जन्म से ही आठ जगह से मुड़ा था, लेकिन इसके बावजूद वे एक महान ऋषि बने । उनका दृष्टिकोण था, “बिना असफल हुए आगे बढ़ो ।” जब आपको कोई योगासन देखकर लगे कि यह सही है और इसे करना चाहिए, तो इसके बाद आदर्श कदम यही है कि उसे आज़माकर देखें।

अष्टवक्रासन के लाभ (Astavakrasana ke Labh in Hindi)

अष्टवक्रासन से मन और शरीर में तंत्रिकाओं का नियंत्रण बेहतर होता है। इसे लगातार करने पर इच्छाशक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण में वृद्धि होती है। समन्वय, शक्ति और ऊर्जा भी बेहतर हो जाती है।

अन्य फायदे –

  • यह आसन शरीर को लचीला और मजबूत बनता है।
  • अष्टवक्रासन दोंनो भुजाओं व कलाइयों को मजबूत बनाता है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से पाचनतंत्र सुचारु ढंग से कार्य करने लगता है।
  • यह आसन पेट से संबंधित रोग जैसे – भूख न लगना, ऐसिडिटी, पेट का फूलना, बदहजमी, कब्ज आदी रोगों को दूर करता है।
  • अष्टवक्रासन आपकी एकाग्रता व संतुलन शक्ति का विकाश करता है।
  • बौद्धिक विकास हेतु अष्टवक्रासन लाभप्रद है।
  • यह तनाव, चिंता और उदासीनता को दूर कर मन को शांति प्रदान करता है।
  • स्त्री रोग जैसे – मासिक धर्म की अनियमितता, मेनोपॉज को यह आसन दूर करता है।
  • यह आसन साहस, धैर्य व दृढ़ता जैसे गुणों का जीवन में विकसित करता है।

तो फिर देर किस बात की है । आइए यह आसन करें और अपने जीवन को बेहतर बना लें ।

अष्टवक्रासन करने की विधि (Astavakrasana Karne ki Vidhi in Hindi)

Astavakrasana-Steps-And-Health-Benefits-In-Hindi
  1. बैठ जाएँ, दायाँ पैर उठाएँ और दायाँ हाथ इसके नीचे से ले जाते हुए बाहर निकाल लें।
  2. दाएँ हाथ को मोड़ें और अपनी कोहनी दाईं जाँघ के निचले हिस्से से टिका लें।
  3. बाएँ पैर को दाएँ पैर के पार ले जाएँ और इसे दाएँ पैर के नीचे रखें।
  4. आगे झुकें, अपनी कोहनियाँ मोड़ें और शरीर को ज़मीन से ऊपर उठाएँ। हथेलियों के बल संतुलन बनाएँ। अपने सिर और धड़ को फ़र्श से समान दूरी पर रखें।

अष्टवक्रासन करने में सावधानी (Astavakrasana Karne me Savdhani in Hindi)

  • प्रारंभ में इस आसन का अभ्यास किसी योग्य विशेषज्ञ की देख रेख में ही करना चाहिए।
  • कलाई, कोहनी या भुजाओं में चोट लगी होने पर यह आसन न करें।
  • इस आसन का अभ्यास रोज सुबह खाली पेट करना चाहिये।
  • इस आसन को करने से पहले सूक्ष्म व्यायाम करना लाभदायी होता है।
  • प्रारम्भ में अपनी बल व क्षमता से अधिक जोर न लगाएं।

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