उत्थित त्रिकोणासन करने का तरीका और इसके लाभ

उत्थित त्रिकोणासन के लाभ (Utthita Trikonasana ke Labh in Hindi)

विस्तार से शरीर में लचीलापन बढ़ता है। उत्थित त्रिकोणासन शरीर के बगल वाले हिस्सों की लंबाई बढ़ाता है और पुट्ठों में गति के दायरे को बढ़ाता है। यह मुद्रा एक प्रकार से तिरछे उड़ने की नकल है, जबकि लंगर ज़मीन पर टिका रहता है। शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे आनंद और मुक्ति का अहसास तुरंत उत्पन्न हो सकता है। जब आप शरीर का विस्तार करते हैं, तो मस्तिष्क भी अपने आरामदेह दायरे के पार खिंचता है और नए विचारों तथा संभावनाओं का स्वागत करता है।

अन्य फायदे –

  • पैरों, जांघों व टखनों को मजबूत करता है ।
  • रीढ़ की हड्डी, कंधे तथा छाती में खिचाव उत्पन्न करता है।
  • मन को शांत व तनावमुक्त करता है।
  • पेट के अंगों को मजबूती प्रदान करता है।
  • मासिकधर्म के लक्षणों से राहत प्रदान करता है।
  • पीठ व कमर दर्द में लाभदायक है।

उत्थित त्रिकोणासन करने की विधि (Utthita Trikonasana Karne ki Vidhi in Hindi)

  1. खड़े होकर दोनों पैर एक-दूसरे से कुछ फुट की दूरी पर रखें।
  2. अपने बाएँ पैर को जरा सा पीछे करें और अँगुलियों को थोड़ा सा आगे की तरफ करें।
  3. दायाँ पैर सीधा रखें और अँगुलियों का संकेत सामने की ओर रहे।
  4. अब टेलबोन को नीचे दबाएँ अपने पेट और पसलियों को उठाएँ।
  5. पसलियों के पंजर को दाईं ओर ले जाएँ और अपने दाएँ हाथ को दाएँ पैर के अंगूठे की ओर ले जाएँ।
  6. तर्जनी और अँगूठे से पैर का अंगूठा पकड़ लें।
  7. आवश्यकतानुसार घुटने को मोड़ लें।

उत्थित त्रिकोणासन करने में सावधानी (Utthita Trikonasana Karne me Savdhani in Hindi)

  • निम्न रक्तचाप, सर दर्द व दस्त के मरीजों को यह आसान नहीं करना चाहिये ।
  • गर्दन में दर्द होने पर आसन करते वक्त गर्दन पर ज्यादा जोर न पड़े इस बात का ध्यान रखें ।
  • प्रारम्भ में अपनी बल व क्षमता से अधिक जोर न लगाएं।

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