पीपल पूजन का महत्व और उसके लाभ | Peepal Puja Ka Mahatva
पीपल का पूजन क्यों किया जाता है ? तैत्तिरिय संहिता में प्रकृति के पावन वृक्षों में पीपल की गणना है और ब्रह्मवैवर्त में पीपल की पवित्रता के संदर्भ में काफी उल्लेख है पद्मपुराण के अनुसार …
पीपल का पूजन क्यों किया जाता है ? तैत्तिरिय संहिता में प्रकृति के पावन वृक्षों में पीपल की गणना है और ब्रह्मवैवर्त में पीपल की पवित्रता के संदर्भ में काफी उल्लेख है पद्मपुराण के अनुसार …
एक ही गोत्र में शादी की मनाही क्यों ? हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह अपने कुल में नहीं, बल्कि कुल के बाहर होना चाहिए। एक गोत्र में (सगोत्री) विवाह न हो सके, इसीलिए विवाह …
मां सरस्वती विद्या, संगीत और बुद्धि की देवी मानी गई हैं। देवीपुराण में सरस्वती को सावित्री, गायत्री, सती, लक्ष्मी और अंबिका नाम से संबोधित किया गया है। प्राचीन ग्रंथों में इन्हें वाग्देवी, वाणी, शारदा, भारती, …
भारतीय संस्कृति का मूलभूत उद्देश्य श्रेष्ठ संस्कारवान मानव का निर्माण करना है। सामाजिक दृष्टि से सुख-समृद्धि और भौतिक ऐश्वर्य आवश्यक है, किंतु मनुष्य जीवन केवल खाने-पीने और मौज मस्ती करने के लिए ही नहीं है। …
प्राचीन काल से हमारे ऋषि-मुनियों, विचारकों और मर्मज्ञों ने इस बात का समर्थन किया है कि मनुष्य जीवन अपने आप में अद्भुत एवं महान है। ईश्वर ने पृथ्वी पर 84 लाख योनियां बनाई हैं जिसमें …
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य का आरंभ करने के पूर्व गणेशजी की पूजा करना आवश्यक माना गया है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता व ऋद्धि-सिद्धि का स्वामी कहा जाता है। इनके स्मरण, ध्यान, जप, आराधना …
आप ज़रूर सोचते होंगे कि आख़िर हिंदू धर्म में १०८ का इतना ज़्यादा माहात्म्य क्यों है? यह संख्या १०८ हर जगह क्यों मौजूद है? सनातन धर्म में १०८ का इतना ज़्यादा उपयोग क्यों होता है? …
यदि हम स्त्रियों को सम्मान नहीं देंगे, तो नियति भी हमारा सम्मान नहीं करेगी। हिन्दू धर्म का मूलाधार वेद हैं और वेद नारी को सर्वोच्च सम्मान प्रदान करते हैं। विश्व का अन्य कोई भी सम्प्रदाय, …
यज्ञोपवीत क्या है ? yadnyopavit in hindi आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे से दाएं बाजू की ओर एक कच्चा धागा लपेटे रहते हैं। इस धागे को यज्ञोपवीत या जनेऊ कहते हैं। …
मन को कैसे जीते : मन सिर्फ चंचल ही नहीं बल्कि बहुत शक्तिशाली भी होता है तभी तो हमसे अपनी मन-मानी करवा लेता है और उसके आगे हमारी एक भी नहीं चलती। जैसे वायु को …