चर्म रोग (त्वचा विकार) के कारण, लक्षण, इलाज, दवा और परहेज – Charm Rog (Skin Disease) Ke Karan, Dawa Aur Upchar in Hindi

चर्म रोग (त्वचा विकार) – Skin Disease in Hindi

व्यक्ति की त्वचा से उसके सौन्दर्य, व्यक्तित्व एवं सुन्दरता का ही दर्शन नहीं होता बल्कि उसकी आन्तरिक शक्तियों का भी आभास होता है। प्रकृति एवं परमात्मा द्वारा दी गई शक्तियों का दर्पण त्वचा का तेज होता है। व्यक्ति का रंग कैसा ही क्यों न हो, उसका आन्तरिक आकर्षण प्रत्येक नर नारी को अपनी ओर खींच लेता है। इसलिए त्वचा की देखभाल करना प्रत्येक स्त्री पुरुष का धर्म है। त्वचा प्रकृति कीअमूल्य भेंट है, जिसको स्वच्छ रखे बिना व्यक्ति का जीवन अधूरा है।

ईश्वर ने त्वचा को आन्तरिक विकारों के निष्कासन का ऐसा द्वार बनाया है जिससे अन्दर से गंदगी पसीने के रुप में बाहर निकल सकती है लेकिन अंदर नहीं जा सकती है जो मनुष्य के द्वारा भोजन या पेय पदार्थ लिया जाता है उसके पचने के बाद जो भी पदार्थ या द्रव्य गंदगी के रुप में बच जाता है उसे प्रकृति मल, मूत्र, पसीना तथा सांसों के रुप में मलद्वार, मूत्रनली, त्वचा एवं नाक द्वारा निष्कासित कर देती है। ये चारों ही गंदगी को बाहर निकालने के मार्ग बनाए गए है । इन चारों मार्गों को स्वच्छ रखना जरुरी होता है। एक भी मार्ग सही नहीं हो तो गंदगी दूसरे मार्ग से निकलने का प्रयास करती है। वही व्यक्ति का रोग का कारण बनती है।

चर्म रोग (त्वचा विकार) के प्रकार (Types of Skin Disorders in Hindi)

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सामान्य त्वचा रोगों में निम्नलिखित को शामिल किया जाता है –

  • दाद (Ringworm)
  • खाज (Scabies)
  • खुजली (Itching)
  • फोड़े (Boil)
  • मुंहासे (Acne)
  • एक्जिमा (Eczema)
  • चकत्ते (Rashes)
  • सफेद दाग (Vitiligo)
  • सोरायसिस (Psoriasis)
  • छोटी माता (chicken pocks)
  • अपरस (Psoriasis)
  • सिबोर्हिक डर्मेटाइटिस (seborrheic dermatitis)
  • रोड़ा (Impetigo)
  • त्वचा कैंसर (Skin cancer)
  • बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal call Carcinoma)
  • डारीर रोग (Darier’s disease)
  • नाखूनों में होने वाले फंगल संक्रमण (Onychomychosis)
  • कीलॉइडिस (Keloida)
  • मिलनोमा (Melanoma)
  • मेलस्मा (Melasma)

चर्म रोग (त्वचा विकार) के लक्षण और पहचान – Skin Disorders Symptoms in Hindi

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त्वचा के रोग के मुख्य कारण निम्न प्रकार से हो सकते है –

  1. त्वचा पर सफेद या लाल रंग के चकत्ते या उभार आना ।
  2. त्वचा में खुजली का होना।
  3. त्वचा में खुरदुरापन।
  4. त्वचा का छिलना।
  5. त्वचा पर छाले पड़ना।
  6. घाव या जखम का बनना।
  7. त्वचा का फटना ।
  8. त्वचा पर हलके रंग के धब्बों का पड़ना।
  9. त्वचा का रंग बिगड़ना।

चर्म रोग (त्वचा विकार) क्यों होता है ? इसके कारण (Skin Disorders Causes in Hindi)

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त्वचा के रोग के मुख्य कारण निम्न प्रकार से हो सकते है –

1). भोजन का पूर्ण रुप से नहीं पचना : व्यक्ति के गलत खान-पान, अधिक खाना या पीना अथवा बार बार खाने पीने से अथवा भोजन के समय पानी या अन्य कोल्ड ड्रिन्क्स पीने से भोजन ठीक रुप से नहीं पचता है एवं वह आंतों में चिपक जाता है। मलद्वार सिकुड़ जाता है, मूत्र का प्रवाह भी ठीक नहीं रहता है। इस प्रकार उसे कब्ज व प्रोस्टेट का रोग होता है एवं जब यह गंदगी और अधिक बढ़ जाती है तो मुंहासे, दाद, खाज, खुजली, सोरायसिस, व पैरों की जलन इत्यादि के रुप बाहर निकलना चाहती है।

2). कृत्रिम सौन्दर्य साधनों का उपयोग : अधिकांश सौन्दर्य प्रसाधनों में कृत्रिम एवं हल्के, स्वास्थ्य विरोधी रसायन होते हैं | इनके नियमित उपयोग से त्वचा की प्राकृतिक कोमलता नष्ट हो जाती है एवं स्वेद ग्रन्थि के रोमकूप ढ़क जाते हैं जिससे विकार निकलना बंद हो जाता है जिनके प्रयोग करने से एलर्जी हो सकती है। त्वचा में लालिमा, खुजली, दाने, चकते, चेहरे पर दाग, मुंहासे या सफेद काले निशान इत्यादि हो सकते हैं। घटिया लिपस्टिक से होंठ काले, ओजहीन व खुरदरे हो जाते है।

3). मच्छर व जीव जन्तुओं के काटने से : मच्छर, टिण्डे, बिच्छु इत्यादि जीव जन्तुओं के काटने से त्वचा रोग हो जाते है। पित्ती उछल जाती है शरीर लाल लाल हो जाता है सारे शरीर में हल्की खुजली हो जाती है।

4). असंवैधानिक एवं अप्राकृतिक सहवास से : व्यक्ति द्वारा काम वासना पूर्ति असंवैधानिक एवं अप्राकृतिक सहवास से भी त्वचा रोग हो सकते हैं। किसी बीमार या रोगी या मासिक धर्म में किसी भी नारी के साथ मैथुन से वह व्यक्ति भी रोगी हो सकता है। सिफलिस एवं एड्स बीमारी तत्काल एक दूसरे में रुपांतरित हो जाती है वह स्वयं भी मरता है एवं दूसरे को भी मारता है।

5). कुछ अन्य कारणों से –

  • कई कई दिन स्नान नहीं करने से या गंदे पानी में स्नान या शरीर की त्वचा अस्वच्छ रखने से ।
  • चर्म रोगी के साथ खाने पीने से ।
  • चर्म रोगी के साबुन कंघा तौलिया इत्यादि प्रयोग करने से या अन्य व्यक्ति के गंदे साबुन तौलिया इत्यादि लेने से भी चर्म रोग हो सकता है।
  • आग में झुलस जाने से ।
  • गर्म छड़ी लाइसेन्सर इत्यादि के छू जाने से।
  • पटाखे वगैरह असावधानी से जलाने से त्वचा पर फफोले पड़ जाते है।
  • दुर्घटना में चोट लग जाने से भी चर्म रोग हो जाते हैं।
  • विभिन्न वाटर पार्क जहां अनेकों लोग एक साथ नहाते हैं, वहां के पानी में कीटाणु पनप जाते है वहां पर नहाने का आनन्द लेने के साथ चर्म रोग भी हो सकता है।

चर्म रोग (त्वचा विकार) में खान-पान और परहेज (Diet for Skin Disorders in Hindi)

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  • सोने से पहले रात्री में हल्दी वाला दूध पीना चाहिए।
  • भोजन में नींबू, टमाटर, अचार, तेल, नमक-मिर्च का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • मौसम के अनुसार हरी सब्जियां और फलों का सेवन करें।
  • कब्ज का उपचार करें ।
  • हल्का व सिघ्र पचने वाला भोजन करें।
  • ज्वार तथा बाजरे की रोटी का सेवन न करें ।
  • सुबह जल्दी उठकर ताजी हवा में घूमें
  • नित्य कसरत करना भी रोग के कारणों को कम करता है।
  • सब प्रकार की खटाई व बैकरी आइटम, बाजार की वस्तुओं से परहेज करना।
  • नशीली चीजें जैसे – शराब, गांजा-भांग, बीड़ी-सिगरेट, चाय-काफी का सेवन बिल्कुल बंद करें।

चर्म रोग (त्वचा विकार) का प्राकृतिक उपचार (Naturopathy Treatment for Skin Disease in Hindi)

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चर्म रोग का इलाज प्राकृतिक उपचार विधि द्वारा स्थायी रुप से किया जा सकता है लेकिन उसके लिए व्यक्ति को संयम, धैर्य एवं विशेषज्ञ की आज्ञा का पालन करना होता है। ऐसा देखा गया कि ओषधियों से अस्थायी रुप से निजात पाई जा सकती है। बीमारी की जड़ को बिना हटाए चिकित्सा करने से कुछ समय पश्चात् पुनः यह रोग हो सकता है। सामान्य रुप से प्राकृतिक चिकित्सा में निम्न उपचार किए जाते हैं जो कि रोगी के लिए लाभकारी होते है

1). भोजन पर नियंत्रण : प्रथम एक दो दिन के लिए नींबू पानी पर रोगी को रखा जाता है बाद में फलों व सब्जियों के रस पर फिर दलिया इत्यादि पर रख कर जब उसकी पाचन शक्ति ठीक हो जाती है तब धीरे धीरे चपाती दी जाती है। मैदा की बनी वस्तुएं, मिठाइयां, नमकीन, बैकरी आइटम, बिस्कुट एवं चाय, कोल्ड ड्रिंक्स वगैरह उपचार अवधि में नहीं ली जा सकती है।

2). आंतों की सफाई : आंतों की सफाई हेतु रोगी की अवस्था को देखते हुए प्रथम हल्के गर्म पानी का एनिमा तथा उसके बाद कुछ दिन सादे पानी का एनिमा दिया जाता है ताकि आंतों की सफाई पूरी तरह से हो जाए। आवश्यकता अनुसार नीम की पत्तियों के रस को पानी में मिला कर भी एनिमा दिया जाता है

3). कटि स्नान : मौसम के अनुसार नीम पत्ती रस युक्त पानी में कटि स्नान 20 से 30 मिनट तक दिया जाता है। कटि स्नान में कमर एवं मलद्वार के पास का हिस्सा पानी में डुबा रहता है, रोगी पेट पर हल्के नैपकीन से घर्षण करता रहता है।

4). मड बाथ : जमीन में खड्डा खोद कर उसमें उपयोगी मिट्टी व पानी भर दिया जाता है जिसमें रोगी घुस कर मिट्टी अपने पूरे शरीर पर लगा लेता है एवं अच्छी तरह से घर्षण कर मिट्टी को शरीर पर लगाता है बाद में मिट्टी के सुखने पर सोना बाथ या गर्म पानी या सादे पानी जैसा चिकित्सक ठीक समझते है उससे स्नान कर लेता है। इससे उसके सब रोम कूप खुलते हैं तथा त्वचा की बाहरी एवं आन्तरिक स्थिति प्रभावित होने से रक्त संचार की क्रिया बढ़ती है,त्वचा की कौशिकाओं में जमा अधिक एसिड़ बाहर आता है, त्वचा पर निखार आता है एवं त्वचा रोग ठीक होता है।

5). मिट्टी का लेप : मड बाथ में अत्यधिक मिट्टी का उपभोग होता है उससे बचने के लिए उसके स्थान पर मिट्टी का लेप किया जाता है। मिट्टी अनेक प्रकार की होती है जैसे काली, मुलतानी, गोपीचन्दन, गेरु,पीली व लाल मिट्टी। किस समय कौनसी मिट्टी का लेप किया जाना है यह चिकित्सक तय करते हैं।

6). धूप स्नान : खुले स्थान पर या बगीचे में सुबह व सायं जब हल्की धूप हो सूर्य से आ रही धूप में बैठाया जाता है ताकि विटामिन डी के साथ साथ शरीर से पसीना आए एवं रोम कूप खुल सके।

7). व्यायाम एवं योगासन : रोगी की अवस्था नुसार उसे व्यायाम एवं योगासन करने का परामर्श दिया जाता है ताकि पाचन शक्ति के विकास के साथ पसीना भी आ सके।

8). चेहरे पर भाप देना : मुंहासों के लिए चेहरे पर भाप दी जाती है। चिकित्सक के मार्गदर्शन में चेहरे पर रुई के फोए से नींबू रस लगाने के कुछ समय पश्चात उसे सादे पानी से धोया जाता है।

चर्म रोग (त्वचा विकार) के अन्य घरेलू उपचार (Home Remedies for Skin Disorders in Hindi)

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1). कपूर – 100 ग्राम नारियल के तेल में 5 ग्राम कपूर मिला कर उस तेल से शरीर की मालिश करना अथवा नहाने वाले पानी में 10 बूंदे इस तेल को डालकर नहाने से चर्म रोग में लाभ होता है।

2). त्रिफलात्रिफला चूर्ण रात को सोते समय कुनकुने पानी के साथ लेने से त्वचा विकार में लाभ होता है।

3). नारियल – नींबू का रस + नारियल के तेल मिलाकर खुजली की जगह पर मालिश करें, लाभ होगा ।

4). नीम – नीम के पत्तों की राख लगाने से त्वचा विकार दूर होता है ।
नीम पत्ती से नहाना और नीम पत्ती की पुल्टिस बनाकर बालतोड़ के स्थान पर बांधने से रोग दूर होता है ।

5). मूली – चर्म रोगों में मूली के पत्तों का रस लगाने से फायदा होता है।

6). पपीता – कच्चे पपीते का रस नित्य 2 चम्मच की मात्रा में नित्य कुछ दिनों तक सेवन करने से त्वचा के समस्त विकार दूर हो जाते हैं।

7). फिटकरी – खाज-खुजली आदि चर्म रोगों में फिटकरी के पानी से त्वचा को धोने से रोग ठीक हो जाते हैं।

8). सरसों – नित्य स्नान से पहले सरसों तेल की मालिश करने से हाथ-पैर फटने की समस्या दूर होती हैं।

9). सेब – त्वचा रोगों में सेब को पीसकर उसका ताजा रस लगाने से फायदा होता है।

10). करेला – सुबह खाली पेट करेले का जूस पीने से रक्त साफ होता है और चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है ।

11). गौ मूत्र – खाज-खुजली में गौ मूत्र की मालिश करने से रोग में आराम मिलता है।

12). हल्दी – चेहरे के काले दाग-धब्बों पर हल्दी का लेप करने से त्वचा के दाग दूर होतें है ।

13). लहसुन – सरसों के तेल में लहसुन की कली डालकर पका लें । खाज-खुजली पर इस तेल की मालिश करने से त्वचा रोग दूर हो जातें है।

14). शहद – फोड़े-फुंसियों पर काली मिट्टी में थोड़ा-सा शहद मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

15). पीपल – पीपल के पत्तों को पानी में उबालकर इस पानी से स्नान करने से त्वचा के अनेकों रोग दूर होते है ।

अच्छे स्वास्थ्य को टिकाए रखने के लिए विशेष विवेक की आवश्यकता होती है जो किसी अच्छे संत या महापुरुष के सानिध्य से प्राप्त हो सकती है । उनसे मार्गदर्शन प्राप्त कर योगासन, प्राणायाम व ध्यान किया जाना चाहिए ताकि सुबुद्धित हो सके एवं सही निर्णय लेकर अपने पूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त कर सके।

(अस्वीकरण : दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

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