ग्वार फली के गुण ,उपयोग ,फायदे और नुकसान | Gawar Phali ke Fayde aur Nuksan in Hindi

कई रोगों से बचाती है ग्वार फली : Cluster Beans (gawar phali) in Hindi

gawar phali kya hai

ग्वार की फली, जिसे क्लस्टर बींस के नाम से भी जानतें है एक सेहतमंद और पौष्टिक सब्जी है। ग्वारफली का लेटिन नाम ‘साया मोटिसस टेट्रागोनोलोबस’ है।

ग्वार या ग्वारफली की पैदावार भारत के कई प्रदेशों में होती है। इसका उपयोग हरी तरकारी के रूप में होता है। ग्वार विशेषतः गर्मी ऋतु की फसल है, परन्तु सामान्यतः यह वर्षा ऋतु और बसन्त ऋतु में भी होती है।

गुणों से मालामाल ग्वार फली : Gawar Phali ke Gun in Hindi

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ग्वार फली के गुण –

ग्वार फली मधुर, रुक्ष, शीतल, भारी, अग्निदीपक, पौष्टिक, सारक, पित्तहर और कफकारक एवं वायुकारक है। इसका साग स्वादिष्ट होता है।

ग्वार की फली में शरीर के लिए उपयोगी कई महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते हैं जैसे – विटामिन A, विटामिन K, विटामिन C, फॉलीएट्स और कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)। इनके अलावा इसमें प्रचुर मात्रा में फास्फोरस, कैल्शियम, लोहे, पोटेशियम के साथ वसा भी पाया जाता है। ग्वार प्रोटीन और घुलनशील फाइबर का मुख्य श्रोत है ।

दुधारू पशुओं को ग्वार की फली खिलाने से उनका दुग्ध बढ़ता है । गोंद (गम) बनाने के लिए भी ग्वार की कुछ किस्मों का उपयोग होता है।

ग्वार फली के फायदे और उपयोग (Gawar Phali ke Fayde in Hindi)

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ग्वार फली के फायदे रतौन्धी के लिए (Gawar Beans Benefits for Night Blindness in Hindi )

रतौन्धी में ग्वार की फली की सब्जी खाना लाभदायक है। ग्वार के मुलायम पत्तों का साग खाने से भी रतौन्धी रोग दूर होता है।

( और पढ़े – रतौंधी का इलाज )

ग्वार फली के लाभ मोच के लिए (Guar Beans Benefits for Sprain in Hindi)

तिल और ग्वार समान मात्रा लेकर व पीसकर पानी डालकर पकाएँ। फिर चोट या मोच वाली जगह पर बाँध दें । इस उपया से मोच का दर्द दूर हो जाता है।

ग्वार के गुण बवासीर मे लाभकारी (Cluster Beans for Piles in Hindi)

ग्वार फली पौधे के ग्यारह हरे पत्ते और आठ से दस काली मिर्च के दाने पीसकर 50 ग्राम पानी में मिलाकर प्रातः दिन मे एक बार पीने से बादी बबासीर (वह बवासीर जिसमें रक्त न गिरे) ठीक हो जाती है।

( और पढ़े – बवासीर के 52 घरेलू उपचार )

ग्वार फली के लाभ घाव ठीक करने के लिए (Cluster Beans for wound in Hindi)

ग्वार की फली के पत्तों का रस निकालकर घाव के ऊपर लगाने से घाव पकता नहीं है और जल्द ही आराम हो जाता है।

दाद के लिए गुणकारी हैं ग्वार फली (Gawar Phali Benefits for Ringworm in Hindi)

ग्वार फली के पत्तों का रस और लहसुन का रस एकत्र कर दाद (रिंगवर्म) पर लगाना लाभकारी है।

डायबिटीज (शुगर) के लिए क्लस्टर बीन्स (Cluster Beans Benefits for Diabetics in Hindi)

ग्वार फली में फाइबर की प्रचूर मात्रा होती है जो भोजन को पचाने में सहायक होती है। साथ ही इसमें पाया जाने वाला फाइबर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है। ग्वार फली का ग्लाइसीमिक इंडेक्स कम होने की वजय से यह शुगर (मधुमेह) में फायदेमंद है।

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ग्वार के गुण हैं कब्ज मे लाभकारी (Cluster Beans Good for Constipation in Hindi)

ग्वार फली में मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या को दूर करतें है। इसके सेवन से पेट साफ होता है।

( और पढ़े – कब्ज का इलाज )

ग्वार फली के फायदे हड्डियों को मजबूत करने के लिए (Guar Beans Benefits for Strong Bone in Hindi)

ओस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस, व हड्डियों के अन्य रोगों में ग्वार फली का नियमित सेवन कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी को पूरी कर हड्डियों की तकलीफों से निजात दिलाता है ।

कैंसर के लिए गुणकारी हैं ग्वार फली (Gawar Phali ke Fayde for Cancer in Hindi)

ग्वार फली में मौजूद केंपफ्रेरॉल और फ्लेवोनॉयड्स ,कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं (सैल्स) को बनने से रोकता है । महीने में कुछ दिन इसका सेवन करने से कैंसर रोग होने की संभावना बहुत कम हो जाती है ।

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ग्वार फली के फायदे हृदय रोग के लिए (Gawar Beans Benefits for Heart Disease in Hindi)

ग्वार फली में मौजूद फाइबर हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम कर हृदय को स्वस्थ रखाता है । ग्वार फली के सेवन से हृदय रोग, मोटापा, डायबिटीज व अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

ब्‍लड प्रेशर के लिए गुणकारी हैं ग्वार फली (Cluster Beans Good for Blood Pressure in Hindi

ग्‍वार फली में हाइपोलिपिडेमिक और हाइपोग्‍लेसेमिक होता है जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं। ऐसे तत्वों से भरपूर फलियों का सेवन जरुर करना चाहिए।

( और पढ़े – उच्च रक्तचाप से बचाव के असरकारक सरल उपाय )

ग्वार फली के दुष्प्रभाव (Gawar Phali ke Nuksan in Hindi)

आयुर्वेद मतानुसार, ग्वार फली के ये नुकसान भी हो सकते है –

  • ग्वार की पकी फलियों का साग अधिक मात्रा में खाने से पेट में दर्द हो जाता है और सिर चकराता है।
  • शिशुओं को दुग्धपान कराने वाली माताओं को ग्वार फली का साग नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे को मरोड़ (आन्त्र पीड़ा) होने की सम्भावना रहती है।
  • सगर्भा स्त्रियों एवं वात-प्रकृति वालों के लिए भी ग्वार फली का साग हानिप्रद है।

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