शीशम के फायदे ,औषधीय गुण और उपयोग | Sheesham Benefits In Hindi

शीशम क्या है ? : sheesham in hindi

शीशम के वृक्ष भारतवर्ष में प्रायः सब ओर पैदा होते हैं। इसका वृक्ष ६० फुट तक ऊंचा होता है। इसके पिंड की गोलाई ६ से १२ फुट तक होती है । इसकी छोटी शाखाएं नीचे की तरफ लटकती हुई और रुएंदार होती है। इसके पिंड की छाल एक इंच तक मोटी और कुछ पीलापन लिये भूरे रङ्ग की होती है। इसके पत्ते गोल और नोकदार बेर के पत्तों के समान होते हैं।

नवीन हालत में ये अच्छे साफ हरे रंग के होते हैं मगर पुराने होने पर ये कुछ लाल और भूरे रंग के हो जाते हैं। इसके फूल बहुत छोटे छोटे सफेद या चंंदनियां रंग के गुच्छों में लगते हैं। इसकी फलियां बहुत चपटी और पतली होती है। हर एक फली में दो-दो तीन-तीन चपटे बीज निकलते हैं । शीशम की लकड़ी बहुत मजबूत, भारी और दृढ़ होती है।

विभिन्न भाषाओं में शीशम के नाम :

संस्कृत – शिशपा, कृष्णसारा, पिपला, युगपत्रिका, कपिला, डलपत्री, तीवधूमका, श्वेतशिशपा, कपिलाशिशपा, पीता इत्यादि ।
हिन्दी – शीशम, सफेद शीशम, पीनी शीशम ।
बंगाल – शीशू, सीसू ।
गुजराती – सीसम तनच ।
मराठी – सीसू, सीसम ।
उर्दू – शीशम ।
पंजाबी – शीशम, नेलकार, ताली, शेवा ।
अरबी – सीसम ।
तामील – नीसू, गेट्टा।
तेलगू – सिसुपा, सीसू ।
अंग्रेजी – Sissoo।
लेटिन – Dalbergia sissoo ( डलवेगिया सीसू )।

शीशम की जातियां :

शीशम की तीन जातियां होती हैं। काली, सफेद और पीली। पीली शीशम को संस्कृत में कपिल शिशपा, सफेद शीशम की श्वेतशिशपा और काली शीशम को कृष्णसारा कहते हैं।
इस वृक्ष की लकड़ी और बीजों में से तेल निकाला जाता है जो औषधियों के काम आता है।

आयुर्वेदिक मतानुसार शीशम के औषधीय गुण :

☛ आयुर्वेदिक मत से शीशम कड़वा, तिक्त, कसेला और गरम प्रकृति का होता है ।
☛ यह कामोहोपक, कफनिस्सारक और कृमिनाशक है ।
☛ यह ज्वरनाशक, प्यास को बुझानेवाला, गर्भ को गिरानेवाला और वमन तथा दाह को शान्त करनेवाला होता है।
☛ शीशम चर्मरोग, व्रण, रक्तरोग, श्वेतकुष्ठ, अजीर्ण, अतिसार और गुदामार्ग की तकलीफों को दूर करनेवाला होता है।
☛ इसके पत्तों का रस नेत्र रोगों में लाभदायक होता है।
☛ सफेद शीशम कड़वा, शीतल तथा पित्त और दाह को दूर करनेवाला होता है।
☛ भूरे रंग का शीशम कड़वा, शीतवीर्य, श्रमनाशक तथा वात, पित्त, ज्वर, वमन और हिचकी को दूर करता है।
☛ तीनों प्रकार के शीशम, कांतिवर्द्धक, बलकारक, रुचिजनक तथा सूजन, विसर्प, पित्त और दाह को शांत करते हैं।

यूनानी मतानुसार शीशम के औषधीय गुण : sheesham ke gun in hindi

✸ यूनानी मत से शीशम की लकड़ी, कड़वी, स्वादवाली, कृमिनाशक, रक्तशोधक और नेत्र तथा नाक की बीमारी में उपयोगी होती है।
✸ यह गीली खुजला, शरीर की जलन, उपदंश, पेट के रोग और पेशाब की जलन को शांत करने वाली होती है ।
✸ इसकी जड़ संकोचक होती है और इसका तेल चर्म रोगों पर लगाने से लाभ पहुंचाता है।
✸ इसके पत्तों का लुआब मीठे तेल में मिलाकर फटी हुई त्वचा पर लगाने से लाभ होता है।
✸ इसके पत्तों का काढ़ा सुजाक की तीव्र अवस्था में दिया जाता है।
✸ इसकी लकड़ी धातु परिवर्तक समझी जाती है और यह कुष्ठ, विस्फोटक, खुजली और वमन को रोकने के लिये उपयोग में ली जाती है।

शीशम के फायदे और उपयोग : sheesham benefits in Hindi

1- फोड़े फुन्सी में शीशम के लाभ –
इसके पत्तों का क्वाथ पिलाने से फोड़े फुन्सी मिटते हैं । कोढ़ में भी इसके पत्तों या बुरादे का क्वाथ पिलाया जाता है।

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2- स्तनों की सूजन करने में शीशम के फायदे –
इसके पत्तों को गरम करके स्तनों पर बांधने से और इसके काढ़े से स्तनों को धोने से स्तनों की सूजन उतरती है।

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3- कुष्ठ रोग में इसके लाभ –
शीशम के १० ग्राम बुरादे का आधा पाव पानी में औटाकर, आधा पानी रहने पर उसमें शीशम का शरबत मिलाकर ४० दिन तक पीने से कुष्ठरोग में बहुत लाभ होता है।

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4- रक्तविकार दूर करने में शीशम का उपयोग –
शीशम के बुरादे का शरबत बनाकर पिलाने से रक्तविकार मिटता है।

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5- वमन के इलाज में शीशम का उपयोग –
इसके पत्तें या बुरादे का क्वाथ पिलाने से वमन बन्द होती है ।

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6- सुजाक में इसके लाभ –
सुजाक की अत्यन्त तीव्र पीड़ा में इसका क्वाथ पिलाने से लाभ होता है ।

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)