हेल्थ इन्शुरन्स प्लान लेते समय इन 6 बातों का रखें ध्यान

जिस तरह भोजन, वस्त्र और घर हमारी प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं, उसी तरह पूरे परिवार का हेल्थ इन्शुरन्स (आरोग्य बीमा) करवाना भी बहुत आवश्यक है। आज-कल इलाज बहुत महँगा हो गया है, इसकी व्यवस्था पहले ही करवाना बहुत ज़रूरी हो गया है। ऐसे समय बीमा पॉलिसी बहुत काम आती है।

हेल्थ इन्शुरन्स के अंतर्गत अस्पताल में दाखिल करना, डॉक्टर की फीस और दूसरी सेवाओं का समावेश होता है। 24 घंटे या उससे अधिक समय अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा भुगतान किया जा सकता है। आप खुद अपने लिए या पूरे परिवार के लिए बीमा पॉलिसी ले सकते हैं। हेल्थ इन्शुरन्स करवाने के लिए वार्षिक रकम देनी होती है। इस रक्कम पर आयकर में छूट मिलती है।

हेल्थ इन्शुरन्स प्लान लेते समय ध्यान में रखने योग्य बातें (Things to Know Before Buying a Health Insurance Policy in Hindi)

बीमा करवाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना होता है –

1). परिवार की आवश्यकता

परिवार की आवश्यकतानुसार बीमा पॉलिसी लें। बीमे की किश्त (Installment) परिवार के सदस्यों की संख्या, आयु तथा बीमे की रकम पर निर्भर करती है। यदि परिवार के सदस्य वयस्क हों तो अधिक राशि का बीमा करवाना लाभदायक होता है।

2). नियम व शर्तें

पहले अपनी आवश्यकता के अनुसार पॉलिसी चुन लें। फिर उसकी शर्ते, लाभ और सीमाएँ समझ लें। जैसे बीमार के लिए अस्पताल में किस श्रेणी का कमरा लिया जा सकता है आदि। सामान्यतः कमरे का किराया कुल राशि के एक प्रतिशत होता है। यदि आप बेहतरीन अस्पताल में अच्छा कमरा चाहते हों तो इस तरह की सीमित किराएवाली पॉलिसी आपके लिए ठीक नहीं होगी।

3). सस्ती बीमा पॉलिसी

सस्ती बीमा पॉलिसी के चक्कर में न पड़ें। अधिक लाभ देनेवाली या अलग-अलग लाभ देनेवाली पॉलिसी भी ना लें। आरोग्य विमा पॉलिसी हमारी आवश्यकताएं पूरी कर रही हैं क्या, यह जाँचकर ही पॉलिसी लेना हित में होगा।

4). कैशलेस अस्पतालों की जानकारी

हेल्थ इन्शुरन्स (आरोग्य बीमा) करवाते समय कैशलेस अस्पतालों की संख्या तथा ये अस्पताल आपके कार्यालय या घर के आस-पास हैं, यह देख लें। कैशलेस अस्पतालों की सूची बीमा कंपनी की साइट पर उपलब्ध होती है।

5). पुरानी बीमारियां

स्वास्थ्य बीमा करवाते समय पहले ही जो बीमारियाँ हैं, उनकी जानकारी बीमा कंपनी को देनी होती है, अन्यथा भविष्य में बीमारी का दावा मान्य नहीं होता या पॉलिसी रद्द हो जाती है। सामान्यतः बीमा कंपनी पुरानी बीमारियों के लिए 2 से 4 वर्ष की कालमर्यादा निश्चित करती है।

6). न मिल सकनेवाले दावे

हेल्थ इन्शुरन्स करवाते समय पॉलिसी के अंतर्गत न आनेवाले खर्च, पहले दो वर्ष में न मिल सकनेवाले दावे, कभी न मिल सकनेवाले दावे आदि की जानकारी बीमा सलाहकार से लें। सामान्यतः जन्मजात और बाहरी दोष और इससे होनेवाली बीमारियाँ और मानसिक बीमारियों के दावे की राशि नहीं मिलती। आरोग्य बीमा करवाते समय बीमा सलाहकार से पूरी जानकारी लेकर ही सही शर्तों और लाभवाली पॉलिसी लें।

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