हेल्थ सप्लीमेंट के घातक दुष्प्रभाव व साइड इफेक्ट्स

हेल्थ सप्लीमेंट कितने फायदेमंद ?…कितने नुकसानदेह..? :

बॉलीवुड का हमारे समाज पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हम कई क्षेत्रों में इन स्टार्स को अपना आदर्श मान लेते हैं। फिल्मों में इन्हें अत्यंत बलवान, प्रतिभावान और भावशील दिखाया जाता है या उसकी एक्टिंग करवाई जाती है और इसी एक्टिंग का उन्हें मेहनताना भी मिलता है। जबकि असल जीवन में इनमें से अधिकांश अत्यंत कमज़ोर और ज्ञानशून्य होते हैं। बहरहाल, आजकल युवाओं के कुछ हीरो या हीरोइन आदर्श हैं। जिनका वह किसी और रूप में अनुसरण नहीं करते जितना उनके डील-डौल का अनुसरण करते हैं। युवा सिक्सपेक्स, बाइसेप्स, ट्राइसेप्स और चेस्ट बनाने में पसीना बहा रहे हैं तो युवतियाँ अपने आपको स्लिम ट्रिम बनाने में व्यस्त हैं। उन्हें यह नहीं पता कि यह स्टार्स का प्रोफेशन है जो उनसे यह दिखावा करवाता है जबकि हमारा जीवन कई और ज़िम्मेदारियों से लबरेज़ है। बहरहाल, हमारा यह अध्याय अत्यंत गंभीर है ।

जिस जिम और सप्लीमेंट्स को हम सेहत का राज़ समझ रहे हैं वे कैसे गलत तरीके से प्रयोग करने के कारण हमारी जान ले सकते हैं। सबसे पहले कुछ सत्य घटनाएँ परिवर्तित नामों के साथ:

• अमजद को कैसे भी करके अपनी बॉडी सलमान खान की तरह बनानी थी। उसने अपनी यह इच्छा एक जिम के कोच को बताई। उस स्वघोषित कोच ने उसे जिम में कसरत से अधिक एक सप्लीमेंट का डिब्बा (कृत्रिम स्टेरॉइड्स युक्त) खाने पर जोर दिया। अमजद और उसके साथ वाले दो दोस्तों ने वह डिब्बा खरीदा। एक माह खाने के बाद वे काफी तंदरूस्त और मोटे दिखने लगे। इस बात को 7 वर्ष गुज़र चुके हैं,
आज वे कई रोगों से पीड़ित हैं। उनमें एक रोग नपुंसकता भी है। ये तीनों ही मित्र अब शादी नहीं करना चाहते और हाँ, इनकी सेहत अब पहले से कई गुना अधिक बद्तर हो चुकी है।

• अशोक का कॉलेज में प्रवेश होने वाला था। फिल्मों और टी.वी. पर कॉलेज की दिखाई जाने वाली इमेज के अनुसार वह खुद को उसमें फिट करना चाहता था। इसमें उसके लिए जो रुकावट बन रहा था वह था उसका दुबला-पतला शरीर। इस कमी को दूर करने के लिये वह जिम का रुख करता है। वहाँ उसे दिखावटी शरीर बनाने के लिये कुछ अजीबो-गरीब व्यायाम बताए जाते हैं तथा साथ ही जिम के मालिक उसे एक सप्लीमेंट का डिब्बा पकड़ाते हैं और उसे एक महीने में खाकर खत्म करने की सख्त हिदायत देते हैं। अशोक इसे 3 से 4 महीने लगातार खाता है। इससे वह एक स्मार्ट कालेज बॉय बन जाता है। लेकिन 4 माह बाद उसे बदन दर्द, हल्का बुखार और पेट दर्द शुरू होता है। डॉक्टरों को दिखाने पर वे कुछ दिनों तक उसे टॉनिक्स एवं बुखार की दवाई देते रहे। जब उसे आराम नहीं मिला तो उसके खून की जाँच करवाई गई। जाँच में उसे ब्लड कैंसर आया। अशोक उसके बाद 5 महीने और जीवित रहा। कॉलेज में प्रभाव डालने या मित्र बनाने का उसका सपना धरा का धरा रह गया।

• श्वेता का सपना प्रियंका चोपड़ा की तरह फिगर बनाना था, लेकिन वह बहुत दुबली-पतली थी। अपनी सेहत बनाने के लिये उसे दादी-नानी के नुस्खे आउटडेटेड और बोरिंग लगे। वह फिटनेस सेंटर जाती है वहाँ पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाती है और जल्दी तथा किसी भी कीमत पर मांसल होने की अपनी इच्छा अपने कोच को बताती है। वहाँ उसे कुछ एक्सरसाइज के साथ 1 बड़ा डिब्बा मिलता है जिस पर कुछ बॉडी बिल्डर्स के फर्जी फोटो बने होते हैं। श्वेता इसे खाती है। 1 महीना, 2 महीने, 3 महीने उसके बाद उसे कूल्हे के जोड़ में दर्द शुरू होता है। यह दर्द बढ़ते-बढ़ते उसके चलने-फिरने में रुकावट बन जाता है। जब आर्थोपेडिक सर्जन को दिखाया जाता है तो उसे पता चलता है कि उसकी फीमर बोन (जाँघ की हड्डी) का हेंड गल रहा है और यह एक लाइलाज बीमारी है। आज श्वेता व्हील चेयर पर है अब उसका सपना प्रियंका जैसा फिगर बनाना नहीं बल्कि अपने घर की नौकरानी की तरह एक सामान्य जिंदगी बसर करने का है।

यहाँ मैंने आपको समझाने के लिये केवल तीन उदाहरण दिये हैं, इससे काफी चीजें तो आप समझ गये होंगे कि कैसे मिलावटी सप्लीमेंट, लालची जिम संचालक और अनपढ़ या मोटी अक्ल के जिम कोच लोगों को खासकर युवाओं की जिंदगी को मिटा रहे हैं या उन्हें नर्क से भी बदतर जीवन बिताने को मजबूर कर रहे हैं। मेरी प्रेक्टिस में मैं रोज़ाना दो से तीन युवा मरीजों से मिलता हूँ जो कि सप्लीमेंट या जिम के चक्कर में पड़कर अपनी सेहत बिगाड़ चुके हैं। कुछ जल्दी आ जाते हैं तो उन्हें स्वास्थ्य फिर से दिलाना आसान होता है, लेकिन कुछ बेहद देर कर देते हैं।

सप्लीमेंट्स में क्या मिलावट होती है जो इसे खतरनाक बना देती है :

एक रोगी मेरे पास आया मुहाँसे और भूख न लगने की समस्या लेकर। उसने कहा “सर, जब मैं सप्लीमेंट खाता था तो बहुत भूख लगती थी, लेकिन जबसे उसे छोड़ा है भूख लगना बंद हो गई।” मैंने पूछा, “सप्लीमेंट खाने से पहले कितना वजन था?” उसने कहा “48 किलोग्राम।” मैंने कहा “सप्लीमेंट खाने के बाद कितना हो गया था?” उसने कहा कि “2 महीने में आधा-आधा किलो के दो डिब्बे खाए थे तो वजन 59 किलोग्राम हो गया था।” मैंने कहा “क्या तुम्हारी समझ में यह बात नहीं आई कि कैसे 1 किलोग्राम दवाई मेरा 11 किलोग्राम वजन बढ़ा रही है।” जब मैंने उसका उस दिन वजन किया तो वह केवल 44.5 कि.ग्रा. ही बचा था।

देश के प्रसिद्ध चिकित्सकों की सप्लीमेन्ट्स पर राय :

“प्रोटीन पाउडर कभी भी शरीर को फायदा नहीं पहुंचाता है। सेना के जवान प्रोटीन पाउडर का उपयोग नहीं करते, फिर भी जवान मैडल जीतते हैं।” – डॉ. वेद चतुर्वेदी, आर्मी हॉस्पिटनल, नई दिल्ली

“प्रोटीन पाउडर हानिकारक तो हैं ही। पाउडर कंपनियों के लिए बड़ी लॉबिंग हो रही है। प्रोटीन पाउडर पर भारत में कोई रिसर्च नहीं हुई है।”
-डॉ. मुहसिन वली, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के चिकित्सक

“प्रोटीन पाउडर से शरीर में कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा आयरन की कमी होती है। पथरी, डायरिया तथा हड्डियों की कमज़ोरी जैसी समस्याएँ होती हैं।” – डॉ. मुकेश मेहरा, नई दिल्ली

सप्लीमेंट में मुख्य रूप से 2 दवाओं की मिलावट की जाती है :

  1. Dexamethasone. 2. Cyproheptadine वैसे यह दोनों दवाएँ मुख्यत: एलर्जी के लिये एलोपैथिक विशेषज्ञ लेने की सलाह देते हैं। लेकिन इन दोनों का दुष्प्रभाव है वजन बढ़ाना।
    Cyproheptadine का दुष्प्रभाव अत्यधिक भूख लगना भी है। इन दोनों दुष्प्रभावों के कारण ही इन्हें सप्लीमेंट्स में मिलाया जाता है।

Dexamethasone के साइड इफेक्ट्स :

कैंसर, किडनी की खराबी, हड्डियों का गलना, कुशिंग सिन्ड्रोम, इम्यूनिटी का कम होना, हार्मोनल बदलाव, नपुंसकता, लिवर डेमेज, आँतों की खराबी, मुहाँसे, फोड़े-फुँसी आदि।

Cyproheptadine के साइड इफेक्ट्स :

लिवर डेमेज, इम्यूनिटी का कम होना, दवाई खाते रहने पर अत्यधिक भूख लगना एवं दवाई छोड़ते ही भूख बिल्कुल खत्म होना, अत्यधिक नींद आना, नपुंसकता आदि। आप कैसे पहचानें कि इसमें स्टेरॉइड्स (आर्टिफिशियल) मिलाए गए हैं ?

साइड इफेक्ट्स के जरिये :

• अत्यधिक भूख लगना।
• नींद का ज्यादा आना।
• बहुत जल्दी वज़न बढ़ना।
• मुहाँ से होना।
• बदन पर फोड़े-फुसी होना।
• चेहरे पर सूजन आना।
• सप्लीमेंट खाने से एलर्जी वाले रोग जैसे- अस्थमा, साइनुसाइटिस, चर्म रोग आदि का कुछ समय के लिए खत्म हो जाना।

प्रयोगशाला में स्टेरॉइड्स का टेस्ट करके मिलावट पाए जाने पर क्या करें :

मिलावट पाए जाने पर इन सप्लीमेंट्स को तुरंत बंद कर दें। यदि लिवर डेमेज या अन्य कोई समस्या हो गई, तो किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श लें।

सावधानी क्या रखें :

सर्वप्रथम तो बिना किसी डॉक्टर की सलाह के कोई हेल्थ सप्लीमेंट न लें। अपने डॉक्टर से भी आप कहें कि वह कृत्रिम स्टेरॉइड्स के मिश्रण वाला हेल्थ सप्लीमेंट आपको न लिखे। जिम संचालक से किसी भी प्रकार का हेल्थ सप्लीमेंट न लें क्योंकि उन्हें न तो आपके शरीर के अंगों का कुछ ज्ञान है और न ही उस हेल्थ सप्लीमेंट में मिले हुए पदार्थों की क्रियाविधि का। मेडिकल स्टोर्स या झोलाछाप डॉक्टरों के यहाँ मिलने वाली खुली गोलियाँ या कैप्सूल बिल्कुल न खाएं। आयुर्वेदिक दवाएँ भी केवल आयुर्वेद चिकित्सक की देख-रेख में ही लें।

समस्या का निराकरण कैसे हो :

इसका निराकरण हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने देश में युवाओं को बर्बाद होने से बचाएँ। इसके लिये एक योजनाबद्ध तरीके से काम करें। शासन को चाहिये कि वह बाज़ार में बिकने वाले इन मिलावटी हेल्थ सप्लीमेंट्स पर सख्त कार्यवाही करे। हेल्थ सप्लीमेंट बिना डॉक्टरी पर्चे के न बेचे जाएँ। जिम में एक ट्रेंड कोच की नियुक्ति अनिवार्य की जाए। एक आहारविशेषज्ञ भी नियुक्त
हो। मिलावटी दवा बनाने वाली कंपनियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए। मैं जानता हूँ कि सिस्टम पर इस लेख का कोई असर नहीं होगा, लेकिन हम अपने बेटे, भाई, मित्र या बेटी एवं बहनों को इस विष से बचने के लिये जागरुक कर सकते हैं, वरना कुछ ही महीनों में हमारा स्वस्थ रिश्तेदार एक नारकीय जीवन जीने के लिये मजबूर हो जायेगा।

सप्लीमेंट्स के विकल्प :

सप्लीमेंट्स के कई विकल्प हमारे पास हैं, जो युवा वज़न बढ़ाना चाहते हैं वे यह खाद्य पदार्थ अधिक खाएं: दुग्ध, घी, मक्खन, चीनी रहित मिठाईयाँ, चावल, दालें, चना, मूंगफली, ड्रायफ्रूट्स, आलू, केला, आम, चीकू, गुड़, उड़द की दाल आदि।

यह न खाएँ :

चाय, कॉफी, ज़्यादा मिर्च-मसाला, फास्टफूड्स, कचौड़ी, समोसा, पान-गुटखा, शराब, धूम्रपान, खाना खाने से पहले कुछ भी खाना या पीना।

कुछ विशिष्ट बलवर्धक आयुर्वेद जड़ी-बूटियाँ :

अश्वगंधा, विदारीकंद, सिंघाड़ा, विधारा, नरकचूर, शतावरी, मूसली, मुलेठी आदि जड़ी-बूटियाँ प्राकृतिक रूप से बल एवं भार वर्धक हैं जो कि सप्लीमेंट्स का एक सार्थक विकल्प हैं ।

एक जिम संचालक ने मुझसे कहा कि, “प्रोटीन पाउडर लेने में हर्ज ही क्या है? यह शरीर को आवश्यक प्रोटीन प्रदान करता है जिससे कि शरीर हृष्ट-पुष्ट हो जाता है।” मैंने कहा कि, “हमारे शहर में मान लिया जाए कि प्रतिवर्ष 50 से.मी. वर्षा की आवश्यकता है, यदि यह बारिश एक ही दिन में हो जाए तो क्या होगा? हमारे शहर में बाढ़ आ जाएगी और सब कुछ उजड़ जाएगा। बस यही हाल हमारे शरीर का भी होता है जब उसे दिन भर की आवश्यकता वाले प्रोटीन की मात्रा एक मिनट में एक चम्मच में भरकर दे दी जाए।

” याद रखें यदि पैक डब्बों या शीशियों में शक्ति और स्वास्थ्य मिलता तो सबसे ज़्यादा शक्तिशाली और स्वस्थ धनकुबेर और उनकी संतानें होती। लेकिन ऐसा नहीं है। स्वस्थ और शक्तिशाली बनना है, तो बस प्रकृति की शरण ले लें और फिर देखिए…

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