Lotus in Hindi कमल के औषधीय गुण उपयोग और फायदे

कमल क्या है : what is lotus in hindi

यह पानी में पैदा होने वाली वनस्पति है। यह बड़ी नाजुक होती है । इसका प्रकांड लता की तरह फैलने वाला होता है। इसके पत्ते गोल बड़े-बड़े प्याले के आकार के, अरवी के पत्तों की तरह होते हैं। इन पत्तों पर पानी की बूंद नहीं ठहरती । ये चौड़े-चौड़े पत्ते थाली की तरह पानी में तैरते हुए दिखलाई देते हैं । इन पत्तों के नीचे जो डन्डी होती है, उसको मृणाल अथवा कमल की नाल कहते हैं । कमल के फूल अत्यन्त सुन्दर और बड़े आकार के रहते हैं । इन फूलों में जो पीला जीरा होता है उसको कमल केशर कहते हैं। इसके फलों को पद्मकोष और बीजों को कमलगट्टे कहते हैं । कमल सफेद, लाल और नीले के भेद से तीन प्रकार का होता है।

कमल के विभिन्न भाषाओं में नाम : Name of Lotus in Different Languages

Lotus in –

संस्कृत (Sanskrit) – अम्बुज, पंकज, कमल, पद्म, पुंडरीक इत्यादि
हिन्दी (Hindi) – कमल, कंबल, सफेद कमल, लाल कमल, नीला कमल इत्यादि
बंगाली (Bangali) – पद्म, श्वेत पद्म, रक्त पदम, नील पद्म इत्यादि
मराठी (Marathi) – कमल, तांबले कमल, पांढरे कमल
गुजराती (Gujarati) – कमल, धोला कमल
तेलगु (Telugu) – कलंग, समरा, नेल्लनामर, नल्लकुलबू
तामिल (Tamil) – अम्बल
फ़ारसी (Farsi) – नील फर, गुल नीलोफर
अरबी (Arbi) – बर्दनीलोफर
लैटिन (Latin) – Nelumbium Speciosum (नेलुम्बियम स्पेसिओसम )

आयुर्वेदिक मतानुसार कमल के गुण : Kamal ke Aushadhiya Gun Hindi mai

  • आयुर्वेदिक मत से कमल शीतल, देह को सुन्दर करने वाला और मधुर होता है ।
  • यह रक्त विकार, विस्फोट, विसर्प और विष को दूर करने वाला है ।
  • सफेद कमल शीतल, स्वादिष्ट, नेत्रों को लाभदायक तथा रुधिर विकार, सूजन, व्रण और सब प्रकार के विस्फोटकों को दूर करने वाला है।
  • रक्त कमल चरपरा, कड़वा, मधुर, ठंडा, रक्तशोधक, पित्त, कफ और वात को शान्त करने वाला तथा वीर्य वर्धक है।
  • नील कमल शीतल, सुस्वादु, पित्तनाशक, रुचिकारक, रसायन कर्म में उत्सम, देह को जड़ को दृढ़ करने वाला भौर बालों को बढ़ाने वाला है।
  • नीलोत्पल जिसको फारसी में नीलोफर कहते हैं अत्यन्त स्वादिष्ट, शीतल, पचने में कड़वा और रक्त विषनाशक होता है।

कमलिनी के गुण – जड़, नाल, पत्र और बीजादि से युक्त खिले हुए कमल को पद्मिनी या कमलिनी कहते हैं। यह कमलिनी मधुर, शीतल, कड़वी, कसेली, स्तनों को दृढ़ करने वाली और रक्त विकार, विष, सूजन और मूत्रकृच्छ में लाभदायक है।

कमल के पत्ते के गुण – कमल के कोमल पत्ते शीतल, कड़वे होते हैं । ये शरीर की जलन को दूर करने वाले तथा प्यास, अश्मरी, बवासीर और कुष्ठ में लाभदायक है।

कमल की जड़ के गुण – इसकी जड़ कड़वी, कफ-पित्त में लाभदायक और प्यास को बुझाने वाली होती है।

कमल केशर के गुण – इसकी केशर शीतल, बीर्यवर्धक, संकोचक और कफ, पित्त, प्यास, विष, सूजन और खूनी बवासीर में लाभदायक है।

कमल के फल के गुण – इसके फल मीठे, शीतल तथा रक्त विकार, चर्म रोग और नेत्र रोग में लाभदायक है।

कमल के बीज के लाभ – इनके बीज अर्थात् कमल गट्टे, स्वादिष्ट, रुचिकारका पाचक, गर्भ स्थापक, वीर्यवर्धक तथा पित्त, रक्तदोष, वमन और रक्तपित्त को नाश करने वाले होते हैं ।

यूनानी मतानुसार कमल के लाभ : Kamal ke Labh in Hindi

  1. यूनानी मत से इसकी जड़ मूत्रल होती है।
  2. यह गले और सीने की तकलीफों में, अनैच्छिक वीर्यपात में और माता की बीमारी में मुफीद है।
  3. इसका फूल हृदय और मस्तक के लिये उत्तम पौष्टिक पदार्थ है।
  4. यह प्यास को बुझाने वाला और वायुनलियों के प्रदाह को दूर करने वाला होता है ।
  5. नेत्र रोग में भी लाभदायक है।
  6. इसके बीज शीतल, मूत्रल और गर्भाशय के लिये पौष्टिक है ।
  7. कमल अत्यधिक रजःस्राव और धवल रोग में मुफीद है।
  8. हकीम अजमलखां साहब का कथन है कि कमलगट्टे के भीतर जो विषैली हरी पत्ती रहती है। उसको अर्क गुलाव के अन्दर घिसकर देने से हैजे की मायूस अवस्था में भी लाभ होता है।
  9. इसके फूल पित्त जनित बुखार, पीलिया और प्यास में लाभदायक है।
  10. इसका जीरा बवासीर के खून को रोकता है और कब्जियत पैदा करता है।
  11. चेचक की बीमारी में इसके फूलों का शरबत शान्तिदायक होता है।
  12. बच्चों के दांत, दाढ़ निकलने के समय की दस्तों में कमलगट्टे के अन्दर रहनेवाली हरी पत्ती लाभदायक है।
  13. इसकी केशर को मुलतानी मिट्टी और मिश्री के साथ देने से अत्यधिक रजःस्राव बन्द होता है।
  14. मक्खन और मिश्री के साथ इसकी केशर को चटाने से खुनी बवासीर में लाभ होता है।

कमल के उपयोग : Uses of Lotus in Hindi

आधनिक अनुभव से इसके फूल रक्तातिसार में संकोचक वस्तु की तौर पर उपयोग में लिये जाते हैं । ये हैजा, ज्वर और यकृत की तकलीफों में लाभदायक है। हृदय के लिये यह बहुत पौष्टिक है। इसके बीज वमन को रोकने वाले, बच्चों के लिये मूत्रल और ज्वरनाशक होते हैं । ये चर्म रोग के लिये भी लाभदायक है। इसके तन्तु संकोचक और शीतल होते हैं । खूनी बवासीर और अत्यधिक रजात्राव में शहद और ताजा मक्खन के साथ देने से लाभ पहुँचाते हैं।

राबर्टस के मतानुसार इसकी सफेद फूल वाली जाति की जड़ के कन्द का रस सीलोन में सर्प दंश पर दिया जाता है। विशेष करके कोबरा जाति के सर्प के विष पर यह विशेष उपयोगी माना जाता है।

कर्नल चोपरा के मतानुसार इसके फूल शीतल, संकोचक, मूत्रल और पित्त नाशक है ।
ये सांप और बिच्छू के जहर पर भी लाभदायक माने जाते हैं । इसमें दो तीन तरह के उपक्षार और नेलुन लाइन नामक तत्व पाया जाता है ।

रॉक्स वर्ग के मतानुसार इसके बीज वीर्य सम्बन्धी पुरातन प्रमेह में और शारीरिक क्रिया को उत्तेजना देने में लाभदायक हैं।

बोस और कीत्तिकर के मतानुसार इसके फुल अतिसार, विसूचिका, ज्वर और यकृत की तकलीफों में लाभदायक हैं। ये हृदय के लिये पौष्टिक खाद्य हैं। इस वृक्ष की पिसी हुई जड़ आमातिसार और बवासीर में शान्तिदायक मानी गई है।

इमर्सन के मतानुसार इस वस्तु का शरबत छोटी माता की बीमारी में शान्तिदायक माना गया है । यह प्रदाहिक ज्वरों में भी उपयोगी माना जाता है । इसकी जड़ दाद और अन्य चर्म रोगों में काम में ली जाती है।

योगरत्नाकर नामक ग्रन्थ के कर्ता के मतानुसार सफेद कमल के पत्ते छोटे बच्चों के गुदाभ्रंश (कांच निकलना) रोग के लिये जिसको आंव का निकलना कहते हैं, बड़े लाभदायक हैं । इसके पत्तों को सुखाकर शक्कर के साथ देने से इस बीमारी में आश्चर्य जनक परिणाम दृष्टिगोचर होता है।

कमल के फूल की पंखड़ियों को तोड़ते समय एक तरह की शहद के समान रस निकलता है जिसको पद्म मधु कहते हैं, इस मधु को नेत्र में आंजने से नेत्रों के अनेक रोग मिटते हैं।

( और पढ़े – गुलाब के 56 फायदे )

रोग उपचार में कमल के फायदे : Benefits of Lotus in Hindi

नेत्र रोगों में कमल से फायदा

इसकी शहद अत्यन्त पौष्टिक, त्रिदोष नाशक और सब प्रकार के नेत्र रोगों को दूर करने वाली होती है।

खूनी बवासीर में कमल के प्रयोग से लाभ

वाग्भट के मतानुसार खूनी बवासीर में इसकी केशर को शक्कर और मक्खन के साथ देने से लाभ होता है ।

गुदाभ्रंश (कांच निकलना) में लाभकारी है कमल का सेवन

चक्रदत्त के मतानुसार गुदाद्वार के निगमन में कमल के कोमल पत्ते प्रातःकाल शक्कर के साथ लेना चाहिये ।

पुराना ज्वर ठीक करे कमल का प्रयोग

भावप्रकाश के मतानुसार रक्तातिसार युक्त पुराने ज्वर में, उत्पल, अनार का छिलका और कमल की केशर इन तीनों को बराबर लेकर, पीसकर, चावल के पानी के साथ लेना चाहिये ।

गर्भपात से रक्षा में कमल का उपयोग लाभदायक

चरक के मतानुसार जिन स्त्रियों को हमेशा गर्भ गिरने की शिकायत हो उनके लिये इसके बीज बहुत ही मुफीद हैं।

स्तनों का ढीलापन दूर करने में कमल के बीज फायदेमंद (kamal ke beej ke fayde )

इसके बीजों को पीसकर शक्कर मिलाकर दूध के साथ १ महीने तक सेवन करने से स्त्रियों के स्तन कठोर हो जाते हैं।

सर्प विष में कमल के औषधीय गुण फायदेमंद (kamal ke phool ke fayde)

इसकी मादा केशर को काली मिर्च के साथ पीसकर, पीने और लगाने से सांप के विष में लाभ होता है।

रक्त प्रदर में लाभकारी कमल

कमल की केशर, मुलतानी मिट्टी और मिश्री के चूर्ण की फक्की देने से रक्त प्रदर और रक्ताशं में लाभ होता है।

दाद के इलाज में कमल फायदेमंद (kamal ki jad ke fayde)

कमल की जड़ को पानी में घिस कर लेप करने से दाद और दूसरे त्वचारोग मिटते हैं।

गर्भस्राव से रक्षा में कमल का प्रयोग लाभप्रद

कमल की डंडी और नाग केशर को पीसकर दूध के साथ पिलाने से दूसरे महीने में होने वाला गर्भस्राव मिट जाता है।

वमन में लाभकारी कमल (kamal gatta khane ke fayde in hindi)

कमलगट्टे को आग पर सेंक कर उसका छिलका उतार उसके भीतर का सफेद मगज पीसकर शहद में चाटने से वमन बन्द होती है।

कमल से निर्मित आयुर्वेदिक दवा (योग) :

उत्पलादि घृत बनाने की विधि उपलब्धता और फायदे :

बनाने की विधि –

नील कमल, श्वेत कमल और रक्त कमल के तन्तु दो 2 तोला, मुलेठी 2 तोला । इन सब चीजों को लेकर 128 तोला पानी और 32 तोला धी के साथ औटाना चाहिये । औटाते – औटाते जब पानी जलकर घी मात्र शेष रह जाय, तब उतार कर छान लेना चाहिये । इस घृत को उत्पलादि घृत कहते हैं।

(माप :- 1 तोला = 12 ग्राम )

फायदे –

  • यह घृत खूनी बवासीर, रक्त प्रदर और गर्भाशय में से निकलने वाले खून को रोकने के लिये बड़ा अकसीर माना जाता है ।
  • जिस स्त्री को हमेशा गर्भपात होने का डर रहता है उस स्त्री को गर्भपात के लक्षण शुरू होते ही फौरन यह घी देना चाहिए । इसके देने से गर्भपात फौरन रुक जाता है ।
  • इसी प्रकार इस घृत को पीने से और शरीर पर मालिश करने से विस्फोट और दूसरा जलन वाले रोग मिटते हैं।

कमल के दुष्प्रभाव : Kamal ke Nuksan in Hindi

कमल के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं फिर भी इसे आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले ।

(अस्वीकरण : दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

Leave a Comment