खिलाड़ियों के लिए संतुलित आहार चार्ट, लाभ और महत्त्व | Santulit Aahar ka Mahatva, Chart aur Fayde in Hindi

खिलाड़ियों के लिए संतुलित आहार का महत्त्व (importance of balanced diet for sportsperson in hindi)

khiladiyon ke liye santulit aahar ka mahatva –

अलग-अलग खेल, कसरत, व्यायाम आदि के लिये अच्छे, संतुलित व सभी पोषक तत्वों से परिपूर्ण आहार की आवश्यकता होती है। आज के सभी खिलाड़ी यह जानते तो हैं, पर उसका पालन नहीं कर पाते। वे आहार विशेषज्ञों के पास नहीं जाते, डाक्टर से पूछने पर समस्या हल नहीं हो सकती।

असंतुलित आहार का सबसे अधिक दुष्परिणाम छोटे बच्चों, किशोर वयीन लडकियों, युवावर्ग और खिलाडियों पर होता है। उनकी बढ़ती उम्र में यदि उन्हें योग्य आहार प्राप्त हुआ, तो ही उनका शारीरिक, बौद्धिक तथा मानसिक विकास सही ढंग से होगा तभी वे खेल जगत में अपना और अपने देश का नाम रोशन करेंगे।

बढ़ती आयु में लड़कियों में आंतरिक परिवर्तन होते हैं। अंतःस्राव निर्माण करने वाली ग्रंथियां तथा उनके स्राव की कार्यक्षमता अन्न घटकों पर ही निर्भर होती है। तभी न्यूनतम 15 जीवनसत्व (vitamin), 14 क्षार, 10 आवश्यक अमायनो अम्ल (प्रोटीन्स), आवश्यक फैटी एसिड (स्निग्ध पदार्थ) शरीर को प्राप्त होने पर ही हड्डियां स्नायु, मस्तिष्क कार्यक्षम बनेंगे और शरीर मजबूत होगा।

परंतु हम देखते हैं कि आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजें, जैसे बिस्कुट, ब्रेड, टोस्ट, चिप्स, बर्गर पाव, नूडल्स शीतपेय, समोसे, पिज्जा, कुरकुरे और ऐसी ही अन्य बाजारू चीजें खिलाडियों को अधिक आकर्षित करती हैं। अधिक ऊर्जा के लिए ग्लूकोज लिया जाता है। वह शक्ति तो छोड़िये, प्रोटीन्स, कैल्शियम तक नहीं देता। खेलने के लिए समय-समय पर दिये जाने वाले शीतपेय भी प्रोटीन्स एवं जीवनसत्व नहीं देते। इसलिए प्रशिक्षकों ने इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिये।

प्रोटीन्स, कार्बोहाइड्रेटस, स्निग्ध पदार्थ, क्षार, जीवनसत्व, तंतुमय पदार्थ और पानी यही सात आहार के प्रमुख घटक हैं। इनके कई उपघटक हैं, जो प्रतिदिन हमें मिलने पर संतुलित आहार कह सकते हैं। ये सब हमें दाल, अनाज, सब्जियों, फल, दूध, दही, छाछ, तेल तथा घी से प्राप्त होते हैं। शाकाहार सर्वोत्तम आहार है। परंतु आजकल सभी के आहार में तेल, घी, शक्कर, मैदा जैसे चीजों की मात्रा अधिक होती है। दूध, दही, छाछ, फल, दालें, सब्जियां. तरकारी यही संरक्षक आहार हैं।

शारीरिक मेहनत के लिये खिलाड़ियों को ऐसी खुराक की आवश्यकता होती है, जिससे भूख बढ़ती है और प्यास भी लगती है। सेब, बालूशाही, काजूकतली, केक, पेस्ट्री, फरसाण, फल जैसे पदार्थों में शरीर को आवश्यक जीवनसत्व तथा क्षार नहीं मिलते। सभी खाद्य पदार्थ बहुत पकाकर खाने की बजाय, उन्हें नैसर्गिक रूप में खाने चाहिये। उनमें जो जीवन होता है, वो ही हमारे जीवन को शक्ति देता है। खिलाड़ियों, पहलवानों, कुश्ती पहलवान, कसरत, दंड बैठक लगाने वालों को भी बहुत मिठाई, तली हुई चीजें, वनस्पती घी की जरूरत नहीं होती।

खिलाड़ियों के लिए संतुलित आहार के फायदे (benefits of a healthy diet for athletes in hindi)

khiladiyon ke liye santulit aahar ke fayde –

प्रोटीन

12 से 13 वर्ष की आयु शारीरिक विकास की आयु मानी जाती है। उम्र के इस दौर में पेशियों के विभाजन और शरीर के अवयवों की वृद्धि के लिये उत्तम जैविक मूल्यों की प्रोटीन्स की जरूरत होती है। इन प्रोटीन्स को मदद करने वाले ‘अ’ जीवनसत्व (Vitamin-A) उन्हें सहारा देने वाले ‘ब’ ग्रुप के सभी जीवनसत्व (vitamin) भी मिलने चाहिये। शरीर की वृद्धि और होने वाली क्षति की पूर्ति के लिये, शरीर के हार्मोन्स, एनजाइम्स, खून तथा अन्य द्रव्यों के निर्माण के लिये प्रोटीन्स बहुत जरूरी होते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक हर 3 घंटे में इनकी आवश्यकता होती है। शरीर के प्रति 1 किलो वजन के लिये 1 या डेढ़ ग्राम प्रोटीन्स चाहिये।

आहार श्रोत –

इसके लिये भरपूर दालें, दूध, दही, मूंगफली, बादाम, भुने चने खाने चाहिये।

कार्बोहाइड्रेट

इन्हीं से ऊर्जा मिलती है और ताकत आती है। इनसे तैयार होने वाले ग्लूकोज से कार्बोहाइड्रेट्स मिलते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स से ग्लाइकोजन भी बनता है, जो यकृत और स्नायु के स्टोअर्स से शरीर उपयोग में लाता है। शरीर जब आराम करने की अवस्था में होता है, तभी ग्लाइकोजन बनता है। इसलिये खिलाड़ियों के लिये विश्राम तथा नींद की भी बहुत आवश्यकता होती है। वरना थोड़े से व्यायाम से भी थकावट महसूस होने लगती है।

आहार श्रोत –

प्रतिदिन गेहूं, चावल, ज्वार की रोटी, ताजे फल, सुखा मेवा, खजूर, अंजीर खुबानी, गुड़, शहद सभी प्रकार के कंद, लाई का सेवन करना चाहिये।

स्निग्ध पदार्थ (वसा)

खिलाड़ियों के लिये स्निग्ध पदार्थ आवश्यक है। घानी से निकला ताजा तेल और गाय का घी 3:1 के प्रमाण में लेना बहुत ही जरूरी होता है। उसी से इसेन्शियल फैटी एसिड और ‘इ’ जीवनसत्व (Vitamin-E) मिलता है। तले हुए पदार्थ पूरी, मलाई, अमूल बटर, आइस्क्रीम के स्निग्ध पदार्थ न लें।

आहार श्रोत –

तेल, घी के साथ ‘ई’जीवनसत्व (Vitamin-E) भी आहार में होना चाहिये, जो सभी तेल बीज, हरी पत्ते वाली सब्जियों, गेहूं के अंकुर आदि में मिलता है।

उष्मांक (कैलोरी) तथा पानी

खिलाड़ियों को अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है, जो अनाज, फल, स्निग्ध पदार्थ, सुखे मेवे से प्राप्त हों। पसीना तथा सांस की प्रक्रिया से शरीर से पानी का व्यय होता है। पसीने द्वारा निकलने वाला पानी खून से ही आता है। पानी की यह कमी यदि पूरी न की जाए तो शरीर में खून का संचय कम हो सकता है। जो हृदय और रक्त वाहिनियों के लिये घातकहै।

थोड़े से ही डिहाइड्रेशन से खिलाड़ी के खेल पर खराब असर हो सकता है। इसलिये उन्हें दिनभर में 15 से 20 गिलास पानी पीना ही चाहिये। गाढ़े पीले रंग की पेशाब डिहाइड्रेशन शुरू होने का संकेत है। पसीने से क्षार, जीवनसत्व ‘क’ (Vitamin-C), सोडियम क्लोराइड, मैग्नेशियम, पोटेशियम, लोह तथा प्रोटीन्स का नाश होता है। इसलिये खेलते समय नमक मिश्रित, गुड़ शहद, नींबू डालकर ही पानी पीना चाहिये । खाने में अधिक नमक हो। सेंधा नमक से पोटेशियम मिलता है।

जीवनसत्व और क्षार यदि कुल लगने वाली कैलोरीज संतुलित आहार द्वारा खिलाड़ी को मिले तो अपने आप ही उसमें स्थित जीवनसत्व क्षार की आवश्यकता पूरी हो जाती है। फिर भी उनमें सेलेनियम, मालिब्डेनम, लोह, तांबा, और बायोटीन की कमी पायी जाती है क्योंकि खिलाड़ी प्रायः संतुलित आहार के बदले स्नैक्स, शीतपेय आदि पीकर ही गुजारा करते हैं। हम कितना खाते है, इससे अधिक हम क्या खाते हैं, इसकी ओर ध्यान दिया जाना चाहिये।

लोह

स्नायुओं की क्रियाशीलता के लिये लोह की बहुत ही जरूरत होती है। खून के हिमोग्लोबिन में भी लोह होता है, जो प्राणवायु के ले जाने व ले आने की क्रिया में महत्वपूर्ण कार्य करता है। स्नायुओं में स्थित मायोग्लोबीन्स में भी यही कार्य करता है। शरीर में ऊर्जा ATP में रहती है। वह बनने के लिये भी लोह चाहिये। उसकी कमी से ही स्टेमिना नहीं रहता और थकान जल्दी आती है।

आहार श्रोत –

भरपूर खजूर, मुनक्का, रागी, अंजीर, फलों, हरी सब्जियां, फल, दाल और नींबू का आहार में होना जरूरी है। खाना लोहे की कढ़ई में बनाया जाए।

कैल्शियम

सभी एथलीट्स, जिमनास्ट, लंबी दौड़ वाले खिलाड़ी आदि के लिये वजन कम रखना आवश्यक होता है। उन्हें कैल्शियम की जरूरत होती है। संयम, स्थिर वृत्ति के लिये भी इस क्षार की आवश्यकता होती है। साथ में ‘बी’ जीवनसत्व (Vitamin-B) हो।

आहार श्रोत –

रोज भरपूर दूध (बिना शक्कर का) दही छाछ लेने से लाभ होता है। साथ में रोज खस-खस, तिल, फलों का भी सेवन करना चाहिये।

‘ब’ जीवनसत्व (Vitamin-B)

खिलाड़ियों को अधिक कैलोरीज की आवश्यकता होती है। वह कार्बोहाइड्रेटस द्वारा पूरी करने पर साथ में भरपूर सभी ‘ब’ जीवनसत्वों की उतनी ही आवश्यकता होती है।

आहार श्रोत –

ये बिना पॉलिश किये हुए चावलों में भरपूर पाए जाते हैं। सभी अनाज, दालें, अंकुरित अनाज, फल, हरी पत्ते वाली सब्जियों, सलाद में मिलते हैं। मैदा, शक्कर प्रक्रिया किये हुए पदार्थ खाने पर उनकी कमी होती है।

‘क’ जीवनसत्व (Vitamin-C)

शारीरिक क्षमता, रोग प्रतिकारक शक्ति, मजबूत हड्डियों, उत्तम त्वचा, प्राणवायु को उपयोग लाने हेतु सही श्वास, उपवास, हृदय की गति को सुचारु रखने के लिये ‘क’ जीवनसत्व (Vitamin-C) आवश्यक हैं।

आहार श्रोत –

रोज भरपूर सलाद, सब्जियां, फल, नींबू, आंवला, गुलकंद, बेर, अमरूद खाने चाहिये। प्रतिदिन 300 ग्राम सब्जियां खाएं।

‘ई’ जीवनसत्व (Vitamin-E)

खिलाड़ियों को अधिक प्राणवायु की आवश्यकता होती है, जो ‘ई’ जीवनसत्व (Vitamin-E) दिला सकता है। आहार के स्निग्ध पदार्थों का उपयोग होने के लिये आहार में ‘ई’ जीवनसत्व अधिक होना चाहिये। शरीर की हर पेशी के आवरण में पॉलीएनच्युरेटड फैटी एसिड रहता है। उन्हें ‘ई’ जीवनसत्व संरक्षण देता है।

आहार श्रोत –

रोज कच्ची घाणी का तेल, मूंगफली, तिल,गेहूं का सत्व, अंकुरित गेहूं का सत्व, अंकुरित गेहूं, हरी सब्जियां रोज खाने चाहिये। आटा कभी न छानें।

खिलाड़ियों के लिए आहार तालिका (Sportsman Diet Chart in Hindi)

khiladiyon ke liye aahar talika –

सुबह उठते ही –सुबह उठते ही नींबू, शहद, नमक, पानी और बादाम।
सुबह का नाश्ता –प्रतिदिन सुबह का नाश्ता 9 से 11 बजे के बीच करें। इसमें पारंपरिक खाद्य पदार्थ, भरपूर फल आदि हों।
दोपहर का भोजन – दोपहर का भोजन दाल, चावल, सब्जी, रोटी, दही, सलाद, फल 12 से 2 बजे के दरम्यान करें।
शाम का नाश्ता – शाम को 5-6 बजे सूखा नाश्ता-भरपूर मुरमुरा, अखरोट, बादाम, मूंगफली भुने चने वगैरह
रात का भोजन दूध के साथ और रात का भोजन 8 बजे दाल, चावल, सब्जी, रोटी, सलाद के साथ करें।
सोते से पहले –सोते समय दूध, खजूर, अंजीर।

इनसे बचें –

मद्य, सिगरेट, पान मसाले, खर्रा का सेवन कभी न करें। तभी वे अच्छे खिलाड़ी बन सकते हैं।

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