महिलाओं का भयंकर दर्द पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम (Pelvic Congestion Syndrome in Hindi)

लगभग एक तिहाई औरतें अपने जीवनकाल में कभी न कभी पेट के निचले भाग में दर्द अवश्य ही महसूस करती हैं। पहले जब भी वे इस दर्द की शिकायत अपने परिजनों से करती थीं, तो अक्सर उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता था कि दर्द उनके दिमाग में है। लेकिन अब अत्याधुनिक मशीनों व जांच के जरिए इस खतरनाक दर्द व इसके कारण को भांप लिया गया है, जिसका नाम है- पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम।

पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम क्या है ? (पीसीएस) (What is Pelvic Congestion Syndrome in Hindi)

pelvic congestion syndrome kya hota hai –

इसका संबंध पेल्विक भाग से है, जिसकी जांच पर पहले इतना ध्यान नहीं दिया जाता था और औरतें इस दर्द के साथ लाचार होकर रह जाती थीं। एक बड़ा कारण होता है ओवरी में कुछ वाहिनियां ऐसी होती हैं, जो कि सही ढंग से कार्य न करते हुए रक्त को जमा देती हैं। यह स्थिति ऐसी ही होती है जैसे कि पैरों में वेरीकोस वेन का होना । लेकिन इस समस्या से गर्भाशय को हानि हो सकती है।

शरीर की रक्तवाहिनियों में छोटे-छोटे वाल्व होते हैं, जो कि रक्त को प्रवाह की सही दिशा में पहुंचाते हैं ताकि वह हृदय तक पहुंचता रहे । वाल्व उस छोटे से दरवाजे की तरह होते हैं, जो रक्त का प्रवाह होते ही बंद हो जाते हैं ताकि वह विपरीत दिशा में न बह सके। लेकिन कभी-कभी रक्त वाल्व में ही जमा हो जाता है और एक नॉर्मल प्रक्रिया की तरह प्रवाहित नहीं हो पाता है। ऐसे में पेल्विक भाग में भी जब ऐसी रक्तवाहिनियों का जमावड़ा हो जाता है, तो उसे पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम कहा जाता है।

लगभग 20 से 50 वर्ष की सभी महिलाओं में पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम तो होता ही है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि सबमें इसके लक्षण उभरें। वैसे इसका निदान मुश्किल इसलिए होता है क्योंकि पेल्विक अल्ट्रासाउंड के दौरान अगर महिलाएं लेट जाती हैं तो वेरीकोस वेन दिख नहीं पाती और जांच बेकार हो जाती है। पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम से जूझ रही औरतें अपने जीवन के कई साल यही जानने में लगा देती हैं कि उन्हें यह भयानक दर्द क्यों हो रहा है? इससे उन्हें तो तकलीफ होती ही है, साथ ही उनके परिजनों को भी मानसिक दुःख होता है। कारण का पता न होने से औरतों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है।

पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम के लक्षण (Pelvic Pongestion Syndrome Symptoms in Hindi)

pelvic congestion syndrome ke lakshan kya hai –

वैसे तो पीड़िता को यह दर्द अक्सर बना रहता है, लेकिन निम्नलिखित कारणों से कमर के नीचे व पैल्विक भाग में दर्द बहुत बढ़ जाता है-

सहवास के दौरान, मासिक धर्म के दौरान, योनि स्राव, खड़े होने से होने वाली थकावट के दौरान, गर्भावस्था, कूल्हों व नितंबों पर वेरीकोस वेन होना, ब्लैडर में असहजता।

वे औरतें, जो 2 बार गर्भवती रह चुकी हैं, जिनको पहले से ही वेरीकोस वेन की समस्या है, पालिसिस्टिक अंडाशय, हार्मोनल असंतुलन आदि समस्याओं में यह खतरनाक है।

पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम की चिकित्सकीय जाँच (Pelvic Pongestion Syndrome Medical Test)

पेल्विक वेनोग्राफी, एम. आर. आई, पेल्विक अल्ट्रासाउंड, ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड आदि।

पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम का इलाज (Pelvic Congestion Syndrome Treatment
In Hindi)

इस मर्ज का जाँच होने के बाद इंटरवेंशन रेडियोलॉजी की मदद से इसका उपचार आसानी से किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में मरीज को बेहोश नहीं किया जाता है और महिला को हॉस्पिटल
में सिर्फ एक ही दिन रुकना पड़ता है। इस उपचार प्रक्रिया के उपरांत अधिकतर महिलाएं 1 से 3 दिन में सामान्य रूप से कार्य करने लगती हैं। दरअसल इस प्रक्रिया के दौरान एक इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट त्वचा पर एक अति सूक्ष्म-सा छिद्र करके पेट के निचले हिस्से से नली (कैथेटर) डालकर एंजियोग्राफी करता है। फिर कथित वेन तक छोटे-से क्वाइल डाले जाते हैं, जो कि अक्सर पैरों में भी वेरीकोस वेन को ठीक करने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं। क्वाइल से वेरीकोस वेन को सील किया जाता है।

लाभ –

  • इस प्रक्रिया में रोगी को बेहोश करने की आवश्यकता नहीं होती। त्वचा पर एक सूक्ष्म छिद्र द्वारा यह प्रक्रिया की जाती है।
  • रोगी दूसरी तकनीकों की अपेक्षा शीघ्र स्वस्थ होते हैं।
  • पेट पर ऑपरेशन का कोई निशान नहीं आता।
  • इस तकनीक को बार-बार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • रक्त का कोई नुकसान या कोई खतरा नहीं है।
  • यह प्रक्रिया रोगियों के लिए भावनात्मक, आर्थिक और शारीरिक तौर पर पूर्णतयाः लाभप्रद साबित हुई है।

कुछ आवश्यक बातें :

  1. पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम से पीड़ित महिलाएं लगभग 45 वर्ष से कम उम्र की होती हैं और उनमें प्रजनन क्षमता भी बरकरार होती है।
  2. गर्भाशय में मौजूद वेरीकोज गर्भधारण के कारण बढ़ जाते हैं। ऐसे केस में पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम कम पाया जाता है, जहां गर्भधारण न किया गया हो।
  3. स्त्री रोग विशेषज्ञों के पास आने वाली महिलाओं में से 15 प्रतिशत महिलाएं पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम का शिकार होती है।
  4. अध्ययनों से पता चलता है कि क्रोनिक पेल्विक पेन के 30 प्रतिशत केसों में दर्द का कारण पेल्विक कंजेस्शन सिंड्रोम ही होता है। बाकी 15 प्रतिशत में अन्य कारण भी हो सकते हैं।

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