रीठा क्या है ? : Reetha in Hindi

रीठा आयुर्वेद में सबसे लोकप्रिय जड़ी बूटियों में से एक है।
रीठा का पेड़ 15 मीटर तक ऊंचा और 150 सेमी चौड़ाई में फैला हुआ होता है। इसके फूल सफेद रंग के अत्यंत संघन मंजरियों में आते हैं। इसके फल कच्ची अवस्था में रोमयुक्त, सूखने पर काले-भूरे रंग के सिकुड़नयुक्त होते हैं। बीज मटर के समान, काली चिकनी मज्जा में भरे रहते हैं। इसके फूल नवम्बर-दिसम्बर में आते हैं तथा फल फरवरी से अप्रैल तक तैयार हो जाते हैं।

रीठा की दो जातियां होती हैं। पहली प्रजाती के पेड़ हिमालय के क्षेत्र में अधिक पाये जाते जाते हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर भारत में तथा आसाम आदि में लगाये हुए पेड़ बाग-बगीचों में या गांवों के आसपास पाये जाते हैं। दूसरी प्रजाती के पेड़ दक्षिण भारत में पाए जाते हैं, इसमें 3-3 फल एक साथ जुड़े होते हैं। इसके फलों की आकृति वृक्काकार होती है और अलग होने पर जुड़े हुए स्थान पर हृदयाकार चिन्ह पाया जाता है। ये पकने पर लालिमा लिए भूरे रंग के होते हैं।

रीठा का विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी-रीठा | संस्कृत-अरिष्टक, रक्तबीज, फेनिल | गुजराती-अरीठा | मराठी -रिठा | पंजाबी-रेठा। तेलगू -फेनिलामू, कुकुदुकायालु | तमिल-पत्रान कोट्टाई | असमी-हैथागुटी | फारसी-फुंदुक।

रीठा के औषधीय गुण :

रीठा पाचन शक्ति को बढ़ाती है, शरीर के अवयवों को सुदृढ़ और बलवान बनाती है, पट्ठों की ऐंठन और लकवा तथा फालिज मार जाने और मिरगी के लिए अत्यन्त लाभदायक है, स्तम्भन शक्ति को पैदा करती है और गर्भाशय की पीड़ा को शान्त करती है, अगर पानी में घिस कर इसको नाक में सूंघे तो आधा शीशी के दर्द को रोकती है। रीठी पचने में चरपरी, तीक्षण, गरम और लेखन है, भारी, त्रिदोष नाशक है। इसके पानी के पीने से कै होती है और जहर दूर होता है तथा इसके पानी की नस्य लेने से मस्तक पीड़ा और आधा शीशी की पीडा बन्द होती है। आइये जाने reetha ke fayde in hindi ,reetha ke labh.

रीठा के फायदे और उपयोग : Health Benefits and Uses of Reetha in Hindi

1-सिर दर्द में रीठा के फायदे :
पानी की कुछ बूंदें पत्थर पर डालकर रीठे का छिलका इतना घिसें कि पानी खूब गाढ़ा हो जाये।
आधे सिर का दर्द जिस ओर होता हो, उसके विपरीत तरफ कुछ बूंदें नाक के नथुने में टपकायें और प्रकृति का चमत्कार देखें। या रीठे का छिलका बारीक पीस कर नसवार के रूप में सुंघायें ।( और पढ़ेसिर दर्द के 41 घरेलू नुस्खे )

2-मूर्छा में रीठा के फायदे :
मिर्गी, हिस्टीरिया या किसी अन्य कारण से अकस्मात कोई मूर्छित हो जाये तो तुरन्त रीठा घिस कर रोगी की नाक में टपकायें या रीठे का बारीक चूर्ण दोनों नथुनों में दो-तीन रत्ती डाल कर बाँस की खोखली नली या सुनार की धौंकनी से फूंकें। इस प्रकार मिर्गी, हिस्टीरिया या अन्य किसी कारण होने वाली मूर्छा तुरन्त ठीक हो जाती है।

3-आँखों में रीठा के फायदे :
रीठे का छिलका और सुरमा बराबर वजन बारीक पीस कर रखें। प्रात: व सायं सलाई से आँखों में लगायें। जाला फूला और धुंध आदि के लिए गुणकारी है।

4-चेहरे के धब्बे में रीठा के फायदे :
चेहरे के धब्बे और झाइयाँ रीठे का छिलका पानी में पीस कर लगाने से दूर हो जाते हैं और चेहरा निखरता है। ( और पढ़े चेहरे की झाइयाँ दूर करने के 39 सबसे बेहतरीन घरेलू उपचार)

5-लकवा में रीठा के फायदे :
रीठा पानी में घिसें और जिस ओर की आँख बन्द हो उस ओर के नथुने में टपकायें तथा निरन्तर कई दिन तक ऐसा करते रहें। नाक से विषैला पानी खारिज होकर आराम हो जायेगा।

6- बवासीर में रीठा के फायदे :
• रीठा खूनी व बादी बवासीर के लिए भी उपयोगी है। रीठे का छिलका और रसौंत शुद्ध दोनों बराबर वजन बारीक पीसकर पानी में गूंथ लें और जंगली बेर के बराबर गोलियाँ बना लें।
प्रात: निराहार एक गोली ठण्डे पानी के साथ उपयोग करें और तत्पश्चात् दाल मूंग की खिचड़ी घी डालकर सेवन करें। सायं भी खिचड़ी ही खाएं। कुछ ही दिनों के उपयोग से स्वास्थ्य लाभ होगा।

• रीठे का छिलका दो भाग और हीराकसीस एक भाग को अच्छी प्रकार बारीक कर गोलियां बनाएँ। यह गोलियाँ बवासीर के मस्सों की अक्सीर दवा है। ( और पढ़ेबवासीर के 52 सबसे असरकारक घरेलु उपचार )

• रीठे का छिलका गाय के ताजा दूध में अच्छी प्रकार खरल कर एक-एक रत्ती की गोलियाँ बनाएँ और छाँव में खुश्क करें। एक गोली प्रातः व एक सायं दही की छाछ के साथ या गाय के दूध से उपयोग करें। यह सब प्रकार की बवासीर के लिए गुणकारी है।

7-सांप काटे का चमत्कारी इलाज :
रीठा सांप काटे की अद्वितीय औषधि है। कई बार अनुभूत किया गया है तथा कभी असफल नहीं हुआ। शर्त यह है कि सर्प के काटे व्यक्ति में प्राण बाकी हों, फिर यह चमत्कारी औषधि इसे मरने नहीं देती।
आठ ग्राम रीठे का छिलका कुंडी में ठण्डाई के रूप में घोट लें और एक कप पानी डालकर बिना छाने ही पिलाएं, तुरन्त कै और दस्तों द्वारा विष बाहर निकलना आरम्भ होगा। दस-पन्द्रह मिनट पश्चात् फिर उतनी ही मात्रा में रीठे की यह ठण्डाई और पिला दें। यह सिलसिला उस समय तक जारी रखें जब तक कि रोगी को इस ठण्डाई का स्वाद कड़वा न लगने लगे, जब कड़वा लगने लगे तो समझ लीजिए कि अब विष निकल गया है। तत्पश्चात् रोगी को खूब घी का इस्तेमाल कराते रहें।

8-दंत रोग में रीठा के फायदे :
रीठे के बीज जलाकर कोयला बना लें और बराबर वजन खील फिटकरी मिश्रित कर तथा बारीक पीस कर मंजन बनाएं। मंजन के उपयोग से हिलते हुए दांत कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। दंत-पीड़ा और दाढ़ दर्द के लिए भी गुणकारी है। जिन लोगों के दांतों में दर्द रहता है, ठण्डा पानी पीने से जान निकलती सी अनुभव होती है, उनके लिए यह एक चमत्कारी औषधि है।

9- हैजा और दस्त में रीठा के फायदे :
रीठे का छिलका बारीक पीसकर पानी या गुलाब अर्क में मिलाकर मूंग के बराबर गोलियाँ बनाएँ और आवश्यकता के समय एक-दो गोली गुलाब अर्क से देते रहें। इससे कै और दस्त बन्द हो जाएंगे। परन्तु जब तक पूर्ण स्वास्थ्य लाभ न हो जाए, खाने को कुछ न दें। फिर धीरे-धीरे मूंग देना आरम्भ कर दें।

10-पीलिया और तिल्ली रोग में रीठा के फायदे :
गर्म पदार्थों के अधिक उपयोग से जिगर में पित्त पड़ कर रक्त का रंग पीला हो जाता है। यह पीलापन पहले आंखों में और फिर सारे शरीर में फैल जाता है। पीलिया में गरम और चिकने पदार्थों से परहेज करें। आलू, अरबी बिल्कुल न खाएँ। तिल्ली प्रायः मौसमी बुखार के बाद बढ़ जाया करती है।
रीठे का छिलका एक भाग, हरड़ का छिलका दो भाग। दोनों बारीक पीसकर तथा मधु मिश्रित कर चार ग्राम दैनिक सेवन करें। इससे दैनिक तीन दस्त होकर तिल्ली कम हो जाती है और पीलिया को भी इससे आराम हो जाता है, क्योंकि दस्तों द्वारा सारी गर्मी खारिज हो जाती है।

11-वीर्य बलवर्द्धक प्रयोग :
रीठे की गुठली की गिरी वीर्य बलवर्द्धक है। इसे बारीक पीसकर बराबर वजन शक्कर मिलाकर दूध के साथ चार ग्राम सेवन करें।

12-सूखे रोग में रीठा के फायदे :
तीन रीठे की गुठली की गिरी बारीक पीसकर काली बकरी (एक रंग की-बिल्कुल काली) के साठ ग्राम दूध में खरल करें। फिर इसकी चौदह गोलियाँ बनाएँ। नित्य एक गोली किसी भी रंग की बकरी के दूध में घिसकर पिलानी चाहिए।

रीठा के नुकसान : Side Effects of Reetha in Hindi

1) गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नही करना चाहिये ।
2) रीठा का औषधीय उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।