बत्तखें गीली क्यों नहीं होती ? | BATTAKHEN GEELI KYOON NAHIN HOTI HAIN
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बत्तखें गीली क्यों नहीं होती एक लोक-विज्ञान संबंधी हिन्दी पुस्तक है, जो रोज़मर्रा में देखी जाने वाली साधारण घटनाओं के पीछे के वैज्ञानिक कारणों की व्याख्या करती है। पुस्तक के पृष्ठों पर इन प्रश्नों से संबंधित चित्रण दिए गए हैं, जैसे बत्तख का चित्र। शैली प्रश्न-उत्तर पर आधारित है, जो बच्चों और आम पाठक दोनों के लिए समझने में आसान होती है। पृष्ठ संख्या लगभग बत्तीस है।
पुस्तक में ऐसे रोचक प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो बच्चे रोज़ पूछते हैं — जैसे आकाश नीला क्यों है, बादल कैसे बनते हैं, बत्तखें पानी पर क्यों तैरती हैं और गीली क्यों नहीं होतीं। हर प्रश्न के नीचे सरल भाषा में कारण समझाया गया है और आवश्यक होने पर आकृति दी गई है। कई स्थानों पर छोटे-छोटे प्रयोग भी बताए गए हैं, जिनसे पाठक स्वयं परख सकते हैं।
यह पुस्तक बच्चों के लिए आदर्श है और उनकी जिज्ञासा को भरती है। माता-पिता इसे पढ़कर बच्चों से प्रश्न पूछ सकते हैं, जिससे वे सीखने की स्थिति में आ जाते हैं। कक्षा में उपयोग के लिए भी यह उपयुक्त है। छोटी, सस्ती और चित्रों से सुसज्जित पुस्तक है, जो पढ़ने में कभी नहीं थकती। विज्ञान को भयभीत लगने वाले बच्चों के मन में पहला अच्छा परिचय यही पुस्तक कर सकती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- जिज्ञासापूर्ण विज्ञान-प्रश्न
- सरल उत्तर तथा कारण
- चित्र तथा उदाहरण
- बच्चों के लिए
पुस्तक की मुख्य बातें
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