लहसुन के फायदे और नुकसान | Garlic Benefits and Side Effects in Hindi

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लहसुन के फायदे और नुकसान | Garlic Benefits and Side Effects in Hindi

लहसुन क्या है ? : garlic in hindi

संस्कृत में लहसुन को गुणों के आधार पर कई नामों से पुकारा गया है। ‘रसेन ऊनः’ यानी अम्लरस से रहित होने के कारण रसोन, तीक्ष्णगन्ध युक्त होने से उग्रगन्ध, श्रेष्ठ औषधि गुणों वाला होने से महौषधि, दुःखों का नाश करने वाला होने से अरिष्ट, म्लेच्छ और यवन जाति वालों को प्रिय होने से म्लेच्छकन्द रस व यवनेष्ट तथा सर्वाधिक पांच रसों (अम्ल रस को छोड़ कर) वाला होने से इसे रसोनक कहा है। इसे सारे भारत के लोग भली भांति जानते हैं और प्रयोग करते हैं अतः इसका विशेष परिचय देना ज़रूरी नहीं।

लहसुन का विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत – रसोन, लशुना। हिन्दी – लहसुन । मराठी – लसून । गुजराती – लसण । बंगला – रशुन । तेलुगु – तेल्लगड्डू । तामिल – बेलाईपुंड । कन्नड़ – बेल्लुल्लि । फ़ारसी – सीर । इंगलिश -गार्लिक (Garlic) । लैटिन – एलियम सेटिवम (Allium sativum)

लहसुन के औषधीय गुण :

✦ यह पुष्टिकारक, वीर्यवर्द्धक, स्निग्ध, गरम, पाचक, दस्तावर, पाक तथा रस में कटु और मधुर है।
✦ यह भग्न स्थान को जोड़ने वाला है।
✦ यह कण्ठशोधक, भारी, पित्तरुधिर को बढ़ाने वाला है।
✦ यह बलवर्ण के लिए उत्तम है।
✦यह मेधा के लिए हितकारी है।
✦यह नेत्रों को सुखदायक, रसायन और हृदय रोग दूर करने वाला है ।
✦यह जीर्णज्वर, पार्श्वशूल, मलावरोध, गुल्म, अरुचि, खांसी, सूजन, बवासीर, कुष्ठ, मन्दाग्नि, कृमि, वात, श्वास तथा कफ को नष्ट करने वाला है।

लहसुन कैसे खाएं :

लहसुन के सेवन करने का एक सरल सामान्य ढंग तो यह है कि सोते समय दो कली बारीक-बारीक काट कर पानी के साथ निगल ली जाएं। दूसरा ढंग, शुद्ध घी में 2 से 5 कली तक तल कर ठण्डा करके घी सहित चबा कर या निगल कर, प्रतिदिन सुबह भोजन से पहले या रात को सोते समय सेवन की जाए।
कली की संख्या अपनी प्रकृति के अनुसार कम ज्यादा की जा सकती है।

लहसुन के फायदे और उपयोग : benefits of garlic in hindi

Lahsun ke fayde in hindi
लहसुन खाने वालों को इमली अमचूर की खटाई का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रकृति ने लहसुन में अम्ल रस नहीं रखा है इससे पता चलता है कि लहसुन के सेवन के साथ अम्ल रस यानी खट्टा रस वर्जित है क्योंकि यह लहसुन के गुणों को नष्ट करता है। लहसुन के कुछ अनुभूत प्रयोग इस प्रकार हैं

1- दिल की घबराहट में लहसुन के फायदे :
दिल की घबराहट, हाथ-पैर शिथिल होना, जी बैठता सा लगे, धड़कन की गति अनियमित सी लगने लगे तब लहसुन की 3-4 कलियां चबा कर तुरन्त खा लेना चाहिए। चबा कर न खा सकें तो बारीक कतर कर पानी के साथ निगल जाना चाहिए। थोड़ी देर में ही हालत सम्भल जाएगी।

2- घाव में लहसुन के फायदे :
शरीर में कहीं कट जाए या फुसी उठ आए तो इस पर लहसुन की कली मसलने से आराम हो जाता है। आवश्यकता के अनुसार 2-3 बार यह प्रयोग करें।( और पढ़ेघाव को सिघ्र भरते है यह 19 घरेलु उपाय)

3- गठिया में लहसुन के फायदे :
आधा दूध और आधा पानी (लगभग 1-1 कप) मिलाकर इसमें लहसुन और वायविडंग समान भाग ( अन्दाजन 2 कली लहसुन की और इसकी वज़न के बराबर वायविडंग ले लेना चाहिए ) लेकर डाल दें और आग पर औटाएं। जब पानी जल कर सिर्फ दूध बचे तब उतार कर छान लें। इसे प्रतिदिन पीने से वात रोग, जोड़ों का दर्द, गठिया, पेट का अफारा आदि में लाभ होता है। आराम न होने तक सेवन करना चाहिए। ( और पढ़े – )

4- क्षय रोग में लहसुन के फायदे :
क्षय के रोगी के लिए लहसुन अमृत के समान सिद्ध होता है। इसमें Allyl, Propyl disulphide Diallyl disulphide आदि गन्धक यौगिक युक्त उड़नशील तैल होता है। जो लहसुन में अनेक व्याधियों को नष्ट करने की गुणवत्ता और क्षमता होने का मुख्य तत्व है। यह तैल बहुत सशक्त जन्तुनाशक होता है और पूरे शरीर पर इसका प्रभाव बहुत तेज़ी से होता है।
क्षय रोग के कीटाणुओं की वृद्धि रोकने का इसमें अद्भुत गुण होता है। लहसुन की कलियों को शक्कर या सेन्धा नमक मिला कर खरल में डाल कर घोंट लें। इसे 6 ग्राम (आधा तोला) वज़न में लेकर छः ग्राम यानी बराबर वज़न का शुद्ध घी (जो जमा हुआ हो, पिघला न हो) दोनों को मिला कर चाट लें। यह एक खुराक है। ऐसी तीन खुराक सुबह, दोपहर और शाम को सेवन करने से क्षय रोग की पहले स्टेज हो तो रोग ठीक हो जाता है। इसे लगातार सेवन करते रहना चाहिए जब तक व्याधि पूर्णतः नष्ट न हो।
परहेज़ – खटाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

5- सर्दी कफ खांसी में लहसुन के फायदे :
सरसों के या खाने के तैल में लहसुन की 4-5 कलियां छील कर डाल दें और आग पर खूब गरम करके उतार लें। जोड़ों के दर्द, पीठ, छाती व पसली के दर्द, सर्दी कफ खांसी के लिए इस तैल की मालिश करने से आराम होता है। कान में 2-2 बूंद टपकाने से कान का दर्द ठीक होता है। गठिया और बाय के दर्द में इसकी मालिश करने से आराम होता है। ( और पढ़ेखांसी और कफ के रामबाण घरेलु उपचार )

6- वीर्य व पौरुष शक्ति बढ़ाने में लहसुन के फायदे :
प्रौढ़ अवस्था के पुरुष लहसुन की 4-5 कलियां शुद्ध घी में तल कर सुबह खाली पेट चबा कर या निगल कर, लगातार सेवन करें तो पौरुष शक्ति की कमी दूर होती है। और पौरुष बल में वृद्धि होती है। कलियां खाकर इसके घी में थोड़ी शक्कर मिला कर खा लेना चाहिए। यह बहुत कारगर, निरापद और सरल-सुलभ उपाय है। यह प्रयोग स्नायविक दौर्बल्य और लकवा के रोगी के लिए भी लाभकारी होता है।

7-टूटी हुई हड्डियाँ जोड़ने में लहसुन के फायदे :
लहसुन की कलियों को घी में तलकर खाने से टूटी हुई हड्डियाँ जुड़ जाती हैं । लहसुन, शहद, लाख और शक्कर को चटनी की तरह पीसकर घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से भी टूटी हुई या उतरी हुई हड्डी जुड़ जाती हैं। ( और पढ़े टूटी हड्डी को शीघ्र जोड़ने वाले 15 सबसे असरकारक आयुर्वेदिक उपचार )

8-खाँसी में लहसुन के फायदे :
लहसुन के रस को जैतून के तेल में मिलाकर बच्चों की छाती और पीठ पर मालिश करने से काली खाँसी मिट जाती है।

9-नारू में लहसुन के फायदे :
लहसुन, चित्रक और राई को पानी में पीसकर नारू पर बाँधने से नारू नष्ट हो | जाता है।

10-गाँठ में लहसुन के फायदे :
लहसुन को अच्छी तरह पीसकर मरहम जैसा बना लें । उसे कपड़े पर लगा कर पट्टी बनाकर कण्ठमूल सदृश गले की गाँठों पर पट्टी लगाते रहने से गले की असाध्य गाँठे अच्छी हो जाती हैं।

11-लाल चकत्ते दूर करने में लहसुन के फायदे :
लहसुन की कलियों को पीसकर रस निकालें । यह रस 3 दिन तक मसलने से शारीरिक गर्मी के कारण शरीर पर निकले हुए लाल चकत्ते दूर होते हैं।

12-फोड़े में लहसुन के फायदे :
लहसुन और कालीमिर्च को पीसकर उसका लेप करने से गाँठ, फोड़े, कखौरी वगैरह जल्दी पक कर फूटते हैं।

13-अन्दरूनी चोट में लहसुन के फायदे :
लहसुन, हल्दी और गुड़ मिलाकर लेप करने से अन्दरूनी चोट में आराम मिलता है।

14-अरुचि में लहसुन के फायदे :
लहसुन, हरा धनियाँ, अदरक, सफेद द्राक्ष, चीनी और सेंधानमक की चटनी बनाकर खाने से अरुचि मिटती है और आहार का पाचन होता है।

15-जुकाम में लहसुन के फायदे :
लहसुन और तुलसी का रस 5-5 ग्राम लेकर उसमें सौंठ का चूर्ण 2 माशा और काली मिर्च का चूर्ण 1 माशा मिलाकर आधा लीटर गाय के दूध के साथ प्रतिदिन सुबह शाम पीने से थोड़े ही दिनों में जुकाम में आश्चर्यजनक रूप से लाभ होता है।

16-दमा और साँस में लहसुन के फायदे :
लहसुन का रस 1 तोला, बायविडंग का चूर्ण 3 माशा, अदरक का रस आधा तोला और सेंधानमक 1 माशा लेकर एक महीने तक गर्म पानी के साथ पीने से जुकाम, दमा और साँस के रोगियों को लाभ होता है।

17-विषम ज्वर में लहसुन के फायदे :
3 माशा लहसुन को पीसकर उसमें 6 माशा तिल का तेल या घी और सेंधानमक मिलाकर प्रातः खाने से विषम ज्वर, वात-कफज्वर और सभी प्रकार के वाद-व्याधि दूर होते हैं।

18-मन्दाग्नि में लहसुन के फायदे :
लहसुन, शक्कर और सेंधानमक समभाग में मिलाकर, चटनी बना कर उसमें दुगुना जमा हुआ घी मिलाकर चाटने से मन्दाग्नि, अजीर्ण, अफरा, उदरशूल, खाँसी, इन्फ्लूएन्जा, नासूर, सन्धिवात आदि रोग मिटते हैं एवं क्षय रोग में भी लाभ होता है।

19-क्षय रोग में लहसुन के फायदे :
लहसुन का रस और अडूसों के पत्तों का रस अथवा केवल लहसुन को पीसकर गाय के घी और गर्म दूध में मिलाकर पीने से क्षय रोग मिटता है।

20-उदररोग में लहसुन के फायदे :
लहसुन की कलियाँ एक हिस्सा सेंधानमक और घी में सेंकी हुई हींग चौथाई हिस्सा एवं अदरक का रस डेढ़ गुना मिलाकर उसका सेवन करने से उदररोग का नाश होता है तथा पेट की बढ़ी हुई चर्बी कम होती है और दस्त भी साफ आता है।

21-प्लीहा वृद्धि में लहसुन के फायदे :
लहसुन, पीपरामूल और हर्र मिलाकर खाने से और ऊपर से एक घूंट गोमूत्र पीने से प्लीहा की वृद्धि मिटती है।

22-शूल में लहसुन के फायदे :
लहसुन की चटनी घी में मिलाकर खाने से शूल मिटता है।

23-आमजन्य शूल में लहसुन के फायदे :
लहसुन 8 तोला, एरण्ड का तेल आधा तोला, सेंधानमक 4 आना भर, घी में सेकी हुई हींग 1 माशा मिलाकर बारीक पीसकर प्रतिदिन 1-1 तोला लेने से आमजन्य शूल मिटता है।

24-आमवात में लहसुन के फायदे :
लहसुन की कलियों को आधा तोला गाय के घी में तलकर प्रतिदिन भोजन के पूर्व खाने से आमवात मिटता है।

25-वात में लहसुन के फायदे :
लहसुन को तिल के तेल के साथ खाने से अथवा लहसुन और उड़द के बडे बनाकर तिल के तेल में तलकर खाने से वात मिटता है।

26- अर्दित में लहसुन के फायदे :
लहसुन को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर खाने से या लहसुन और उड़द के बड़े बनाकर तिल के तेल में तलकर खाने से या लहसुन खाने से अपस्मार और अर्दित वायु (मुख का वक्र यानि टेढ़ा हो जाना) मिटता है।

27- वात में लहसुन के फायदे :
लहसुन की 5 कलियाँ प्रतिदिन रात में पानी में भिगोकर रखें और सुबह के समय उन्हें पीस-छानकर पीएँ। दूसरे सप्ताह में सात और तीसरे सप्ताह में 10 कलियों का इसी प्रकार प्रतिदिन सेवन करें । तीन सप्ताह के उपरान्त यह प्रयोग बन्द कर दें । एक सप्ताह के बाद यह प्रयोग पुनः प्रारम्भ करें । प्रयोगकाल में मक्खन का सेवन आवश्यक है। यह प्रयोग वात-व्याधियों में गुणकारी है।

28- कमर दर्द में लहसुन के फायदे :
लहसुन 4 तोला लेकर छिलके निकालें । फिर उसे पीसकर उसमें हींग, जीरा, सेंधानमक, कालानमक, सोंठ, कालीमिर्च और पीपर का चूर्ण 1-1 माशा डालकर उसकी चने के आकार की गोलियाँ बनाकर सेवन करने से और उसके ऊपर से एरण्ड-मूल का क्वाथ पीने से पक्षघात, सर्वांगवायु, उरुस्तम्भ, कृमिशूल, कमर का दर्द, कुक्षि की पीड़ा, उदर वायु आदि समस्त प्रकार के वायुरोग मिटते हैं।

29- हैजा में लहसुन के फायदे :
लहसुन, जीरा, सेंधानमक, हींग, शुद्ध गन्धक, सोंठ, कालीमिर्च और पीपर समभाग में लेकर उनका चूर्ण बनाएँ। इस चूर्ण को नीबू के रस में पीसकर मटर के आकार की गोलियाँ बना लें । आवश्यकतानुसार इस रसोनादिवटी की 1-2 गोलियों का सेवन करने से अजीर्ण और हैजा मिटता है। पाचनशक्ति तेज होती है और समस्त प्रकार के वायुरोग मिटते हैं।

30- ब्लडप्रेशर में लहसुन के फायदे :
लहसुन, पुदीना, जीरा, धनिया, कालीमिर्च और सेंधानमक की चटनी बनाकर सेवन करने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) कम होता है।
लहसुन को पीसकर दूध में पीने से रक्तचाप में बहुत लाभ होता है।

31- हैजा में लहसुन के फायदे :
लहसुन (बीज रहित) लाल मिर्च, कच्ची हींग और कपूर इन चारों को समभाग में मिलाकर थोड़े से पानी में पीसकर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना लें । आधा-आधा घण्टे के अन्तराल से 1-1 गोली के सेवन से प्रबल वेगयुक्त हैजा में भी लाभ होता है।

लहसुन के नुकसान : side effects of garlic in hindi

lahsun ke nuksan in hindi
✦लहसुन खाने से सांस में बदबू का होना , मुंह ,पेट या सीने में जलन जैसी परेशानी हो सकती है ।
✦लहसुन उल्टी और दस्त का कारण बन सकता है।
✦लहसुन से रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
✦सर्जरी के बाद लहसुन सेवन से बचना चाहिये ।

नोट :- किसी भी औषधि या जानकारी को व्यावहारिक रूप में आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले यह नितांत जरूरी है ।

2018-09-29T15:36:44+00:00 By |Herbs|0 Comments