Sri Sri Ma Anandamayee Prasanga ( Vol. 1 to 15)
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यह पुस्तक श्री श्री आनन्दमयी प्रसंग नाम से प्रकाशित हुई है और इसमें प्रथम खण्ड एवं द्वितीय खण्ड दोनों समाहित हैं। लेखक अमल्यकुमार दतगुप्त ए० ए० एल० हैं, जिन्हें डाका विश्वविद्यालय के लिये विधि विभाग के अध्यापक बताया गया है, और हिंदी रूपान्तर विश्वनाथ मुखर्जी ने किया है। पैमाना लगभग 366 पृष्ठ का है।
प्रकाशन-पृष्ठ पर बताया गया है कि प्रकाशक श्री श्री आनन्दमयी चैतन्यवेला सोसायटी, कलकत्ता है, द्वितीय संस्करण 2007 का है, श्री श्री आनन्दमयी संघ कलकत्ता और हरिद्वार से प्रकाशित हुआ है, प्रति संख्या एक हज़ार दी गई है और मूल्य एक सौ पचास रुपये रखा गया है। मुद्रक वृन्दावन पुब्लिकेशन, खुद्दा ऑफसेट, आवती गान, सेलदाहा-कोयला रोड, अवनीवाद 58 है, और फोन नम्बर (02717) 230112 भी दिया गया है।
पुस्तक में निवेदन और आमुख्य अध्याय हैं, और कार्तिक पूजा 2053 (5-9-2008) के अवसर का उल्लेख भी मिलता है। निवेदन में बताया गया है कि भगवान के अवतार के समय दक्षिण भारत में एक कन्या रूप में अवतार हुए थे, और आमुख्य में संत श्री जयदेव की कथा के माध्यम से भक्ति-जिज्ञासा का वर्णन मिलता है। यह पुस्तक रामानन्दपूजा-परम्परा के पाठकों के लिए उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- माँ आनंदमयी के प्रसंग तथा उपदेश
- भक्ति तथा दर्शन
- आश्रम तथा सत्संग
- प्रेरक वर्णन
पुस्तक की मुख्य बातें
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