Man Ko Seekh
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यह पुस्तक मन को सीख नाम से प्रकाशित हुई है और उपशीर्षक में इसे परम पूज्य ॐ विश्वरूप स्वामी श्री लीलाशाह जी महाराज की अमृतवाणी बताया गया है। पैमाना लगभग 25 पृष्ठ का है।
अनुक्रम में पच्चीस से अधिक अध्याय दिए गए हैं, जिनमें चित्तिदन मन के कान खींचिए, मन को कभी फुसर्त न दें, मन को शत्रुओं का शमरण कराओ, संत और शिष्ट, मन की चाल अटपटी, मन का नशा उतार डालिए, आहारशुद्ध रखें, मंत्रजप करें, निकाम भाव से सेवा करें, सत्पुरुष का सान्निध्य पाएं, बुद्धिविवेक, आप दुःखी क्यों हैं, यह साधना है या मजबूरी तथा सत्संग का प्रभाव लाभ पर जैसे प्रकरण आते हैं। साथ में प्रकाशन-विवरण भी दिया गया है।पाठ में रामायण के उस श्लोक का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा, और फिर राजकुमार उद्धालक के गुफा में बैठकर मन को समझाने वाले संवाद का आधार दिया गया है, जिसमें खाली मन को शैतान का घर कहा गया है।
पहले अध्याय में रामायण के उस श्लोक का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि निर्मल मन जन्म सो मोहि पावा, और फिर राजकुमार उद्धालक के गुफा में बैठकर मन को समझाने वाले संवाद का आधार दिया गया है, जिसमें खाली मन को शैतान का घर कहा गया है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- मन को साधने की शिक्षा
- एकाग्रता तथा संयम
- अभ्यास तथा नियम
- प्रेरक निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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