विष्णु पुराण – Vishnu Puran
इस किताब के बारे में
विष्णु पुराण का यह संस्करण प्रथम अंश पर आधारित है, जिसे पाला अपराम कहा गया है। शीर्षक पृष्ठ पर श्रीविष्णुपुराण और श्री सरस्वती वसा तथा वैदेहि जगदम्बा जैसे वाक्य अंकित हैं। पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ पर श्रीकृष्णजी वल्लभ का मंत्र छपा है, जो गीताप्रेस की इस पुराण-श्रृंखला की पहचान है।
आरंभ में अनुषेलाध्याय नामक सूची दी गई है, जिसमें ढाई सौ से अधिक अध्यायों का नाम और पृष्ठ-संख्या क्रम से अंकित है। इसमें धर्मोपदेश, तीर्थयात्रा, स्नान, दान, व्रत, स्त्री-धर्म, सन्तान, शिक्षा, तीर्थसेवा, नीति और गीत आदि विषय आते हैं। मुद्रण के अंत में सात प्रकरणों की एक सूची और अनेक स्तुतियाँ तथा प्रार्थनाएँ दी गई हैं, जिनमें विष्णु-सहस्रनाम और गायत्री मंत्र का उल्लेख भी मिलता है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो हिन्दू पौराणिक साहित्य में गहराई से जाना चाहते हैं। विष्णु पुराण केवल कथा-ग्रन्थ नहीं, बल्कि धर्म, दर्शन, नीति और आचार-शास्त्र का भी बहुत बड़ा भंडार है, इसलिए इसे धीरे-धीरे और अनुक्रम से पढ़ा जाए तो अधिक लाभ होता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- विष्णु पुराण की कथाएँ
- सृष्टि, वंश तथा राजाओं का वर्णन
- भक्ति तथा विष्णु महिमा
- धर्म तथा मोक्ष के उपदेश
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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