Pista in Hindi | पिस्ता के फायदे ,गुण ,उपयोग और दुष्प्रभाव

पिस्ता क्या है ? : What is Pistachio in Hindi

काजू, बादाम और अखरोट आदि की भांति ही पिस्ता भी एक प्रसिद्ध मेवा है। बादाम की तरह इसे भी खूब उपयोग में लाया जाता है। पिस्ते बादाम प्रायः साथ ही खाये जाते हैं। अभिजात गृहस्थ इसे कई मिठाइयों में, आइसक्रीम, शर्बत आदि में डालकर सेवन करते हैं। यदि बादाम को मेवों का राजा कहा जाता है तो पिस्ता को मेवों की रानी कहना उपयुक्त ही होगा।

पिस्ता कहां पैदा होता है ?

मूलतः पिस्ता पूर्वी भूमध्य सागरीय क्षेत्र, ईरान, अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया का निवासी है। यह भारत में ईरान तथा अफगानिस्तान से आता है। आजकल केलिफोर्निया से जो पिस्ते आने लगे हैं वे स्वाद में फीके हैं। ईरान से आने वाले पिस्ते उत्तम और स्वादिष्ट होते हैं।

पिस्ता का पेड़ कैसा होता है ?

पिस्ते के वृक्ष अन्य वृक्षों की तरह 30-35 फीट ऊंचे होते हैं। इसका फल दो साल में एक बार आता है। पिस्ते के फल के ऊपर एक सफेद रंग का कड़ा छिलका होता है जिसे फोड़ने पर भीतर से जो गिरी निकलती है उसे ही पिस्ता कहते हैं । इस गिरी या पिस्ते पर भी एक लाल रंग का पतला छिलका होता है। इसके अन्दर हरे रंग की गिरी कुछ लाल रंग के छोटे-छोटे धब्बों युक्त होती है।

ऊपर के कड़े छिलके को पोस्ते पिस्त कहते है। इसका भी औषधि के रूप में उपयोग होता है।
इसका कुल आम्रकुल (एनाकार्डिएसी) है।

पिस्ता का विभिन्न भाषाओं में नाम : Name of Pistachio in Different Languages

Pistachio (Pista) in –

  • संस्कृत (Sanskrit) – मुकूलक , अभिषुक , निकोचक
  • हिन्दी (Hindi) – पिस्ता
  • गुजराती (Gujarati) – पिस्तं
  • मराठी (Marathi) – पिस्टे
  • बंगाली (Bangali) – गेटेला
  • लैटिन (Latin) – पिस्टासिया वेरा (Pistacia Vera)
  • इंगलिश (English) – पिल्टेशियो

पिस्ता के पोषक तत्व :

पिस्ता में प्रोटीन, वसा,कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फास्फोरस और लौह होते हैं इसके अतिरिक्त विटामिन ए, बी कॉम्पलेक्स तथा सी होते हैं। इसकी गिरी से बादाम की तरह 50 प्रतिशत तैल निकलता है।

पिस्ता के गुण : Pista ke Gun in Hindi

चरकसुश्रुत ने पिस्ते बादाम आदि सूखे मेवों के गुणधर्म एक साथ सामान्य रूप से दिये है। पिस्ते के गुण एवं कर्म बादाम के समान ही कहे गये हैं। मणिमालाकार ने भी कहा है –

मुकूलाक्षोटबादामचाखो गुणचारवः।
बल्या वृष्याः सदा उष्णा गुखःस्वादवोमयलम्।।

अर्थात पिस्ता, अखरोट, बादाम, और चिरोंजी उत्तम गुण वाले, बलवर्धक, पौरुष शक्तिवर्धक, गरम, भारी, दस्तावर तथा अत्यन्त स्वादिष्ट होते हैं।

आयुर्वेद में ताकत देने के लिये तीन विशेषण दिये गये हैं – बल्य, बृहण और वृष्य

बल्य -आयुर्वेद में जो रोग नही हुए हैं उनको रोकने वाली और उत्पन्न रोगों को दूर करने वाली शक्ति को बल (वाइटैलिटि) कहा है। ऐसे बल को बढ़ाने वाले द्रव्य बल्य कहे गये हैं ।

बृहण – शरीर को पुष्ट करने वाले शरीर में मोटापन लाने वाले द्रव्यों को बृहण कहा जाता है।

वृष्य – जो द्रव्य पुरुष के वीर्य को बढ़ाकर मैथुन में पुरुष और स्त्री दोनों को अधिक आनन्दित कर दे,वृष्य कहे जाते हैं। इनके सेवन से पुरुष बलवान और वीर्यवान होता है। इन पिस्ता आदि में ये तीनों गुण विद्यमान हैं।

पिस्ता सेवन की मात्रा :

पिस्ता सेवन की उचित मात्रा 10 से 12 ग्राम है।

पिस्ता का उपयोग : Uses of Pista in Hindi

  1. पिस्ता शरीर के अवयव विशेष को शक्ति देते हैं। पिस्ता आमाशय, जिगर (यकृत) दिल, दिमाग और गुर्दो को ताकत देता है।
  2. यह धातुवर्धक होने के साथ ही खून को साफ भी करता है।
  3. यह वमन, मतली, मरोड़ को मिटाता है।
  4. यदि आस-पास में हैजा या प्लेग फैला हो तो इसे शक्कर के साथ खाना अच्छा रहता है। इसके सेवन से इन रोगों से बचाव होता है।
  5. पिस्ते को अच्छी तरह से चबाकर खाने से मसूडे मजबूत होते हैं और मुख की दुर्गन्ध दूर होती है।
  6. यह भी बादाम की तरह वायु रोगों को दूर करता है।
  7. इसके ऊपर का पीला छिलका आमाशय के लिये अधिक हितकारी है। अत: आमाशय के रोगों में इसे छिलके सहित ही खाना चाहिये। ऐसा हकीम गिलानी का मत है।

पिस्ता के फायदे : Benefits of Pista in Hindi

स्मरण शक्ति बढाने में लाभकारी है पिस्ता का सेवन :

स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिये पिस्ता गिरी, बादाम गिरी, पके नारियल की गिरी लेकर इन्हें पीसकर नारियल को कसकर इन्हें घी में सेककर इच्छानुसार शक्कर मिलाकर सेवन करें। तीनों द्रव्य बराबर मात्रा में लेने चाहिये।

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दुर्बलता मिटाए पिस्ता का उपयोग

(क) पिस्ता, खसखस और चिरोंजी को बराबर मात्रा में लेकर तीनों (10-10 ग्राम) पीसकर दूध में औटाकर गाढ़ी खीर बना उसमें गाय का घृत (अभाव में भैंस का) और शक्कर मिलाकर सेवन करें।

(ख) पिस्ता गिरी, बादाम गिरी, काजू और चिरोंजी 50-50 ग्राम लेकर, अखरोट की गिरी, काले तिल और वंशलोचन 20-20 ग्राम तथा इलायची के दाने 10 ग्राम लें इन सबको दो लीटर दूध में भिगोकर बारीक पीस लें। फिर इस पिष्टी को दूध सहित कढ़ाई में औटाकर खोआ बना लें। इस खोवे को घी में भूनकर, रसोवा से डेढ़ गुनी मिश्री की चाशनी में मिलाकर बरफी बना लें।
20-30 ग्राम मात्रा में लेकर ऊपर से दूध पीयें। सुबह-शाम इसी प्रकार सेवन करने से दुर्बलता, बवासीर, दिमागी, कमजोरी, गठिया आदि रोग दूर होकर शरीर पुष्ट होता है और पौरुष शक्ति बढ़ती है। नमक मिर्च, खटाई से परहेज रखें। मन्दाग्नि वालों को ऐसे योग न दें।

(ग) पिस्ता, बादाम, नारियल, धनिये की मींगी और सिंघाड़ा 200-200 ग्राम, सोंठ 100 ग्राम, हल्दी 25 ग्राम, सफेद जीरा 25 ग्राम और कालीमिर्च 10 ग्राम लेकर सभी को यथा विधि कूट पीस लें, एक किलो घी को गर्म कर उसमें उक्त सभी द्रव्य मिलाकर दो किलो देशी शक्कर मिलाकर लड्डू बना लें, या शक्कर की चाशनी बनाकर बरफी बना लें, आवश्यकतानुसार शक्कर बढ़ाई जा सकती है।

यह पौष्टिक तथा वायु रोगों में हितकारी है। यह प्रसूताओं (जच्चा) के लिये भी लाभप्रद है। उनके लिये शक्कर के स्थान पर गुड़ मिलाना हितकारी है। इस पाक के साथ उन्हें दशमूलारिष्ट भी पीते रहना चाहिये।

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पिस्ता के छिल के का उपयोग :

पिस्ते के ऊपर दो छिलके होते हैं एक सुर्ख रंग का पतला छिलका जो पिस्ते के मगज से चिपका रहता है। दूसरा इसके ऊपर सफेद रंग का छिलका होता है। इनमें पहला पतला छिलका समशीतोष्ण (न अधिक गर्म न अधिक ठडा) होता है। दूसरा सख्त छिलका सर्द और खुश्क होता है।

पहला छिलका अतिसार, वमन (कै) और हिचकी को बंद करता है। यह आमाशय के रोगों में विशेष उपयोगी है। यह दांत, मसूढ़े, दिल, दिमाग को ताकत देता है और प्यास को मिटाता है इसे चबाने से मुख के छाले मिट जाते हैं।
दूसरे कठिन छिलके को पीसकर उसकी फंकी लेने से अजीर्ण मिटता है। इसे शक्कर के साथ सेवन करने से शक्ति बढ़ती है। यह भी वमन, अतिसार, जीमिचलाना आदि में लाभदायक है।

सेवन की मात्र – इन छिलकों की सेवनीय मात्रा 3-6 ग्राम है।

पिस्ता तेल के फायदे :

यह हरे रंग का गाढ़ा मधुर और सुगन्धित होता है यह खांसी के रोगी को लाभ करता है। हृदय को ताकत देकर पागलपन, वमन और मतली को मिटाता है। यह स्मरण शक्तिवर्धक है।

पिस्ता के दुष्प्रभाव : Pista ke Nuksan in Hindi

  • पिस्ता पचने में भारी और कफ पित्त को बढ़ाने वाला है। अतः इसकी अधिक मात्रा उपयोगी नहीं है।
  • इसकी गिरी को अधिक मात्रा में खाने से शरीर पर पित्ती उछल जाती है जिसे शीतपित्त (एलर्जी) कहते हैं। इसे दूर करने के लिये खट्टा अनार, सिरका या सिकंजबीज का सेवन करना चाहिये।
  • पैरों से संबंधित रोगों में भी यह उपयोगी नहीं है। इनमें इसे जरदालु (खुबानी), आलू बोखारा
    और सिकंजबीन के साथ दिया जा सकता है।

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