Amritke Ghoont
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यह पुस्तक अमृत के घूँट नाम से प्रकाशित हुई है। आवरण-पृष्ठ पर शीर्षक बड़े अक्षरों में बना है, और नीचे प्रकाशक श्री योग वेदान्त सेवा समिति तथा संत श्री आसारामजी आश्रम, अमदावाद का नाम अंकित है। पैमाना लगभग 11 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर एक बड़ी बात दी गई है कि सरलता, स्नेह, साहस, धैर्य, उत्साह एवं तत्परता जैसे गुणों से सुसज्जित तथा दृष्टि को बहुजनहिताय और बहुजनसुखाय बनाकर सबमें स्वर्गेश्वर को निहारने से ही आप महान बन सकोगे। आगे छोटे-छोटे सुंदर पद दिए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि हिलने-डुलनेवाली और मिटनेवाली कुसरियों के लिये छटपटाना एक सामान्य बात है, जबकि परमात्म-प्राप्ति के लिये छटपटाकर अचल आत्मदेव में ही स्थित होना निराली बात है, और यह बुद्धिमानों का काम है।
पदों में यह भी कहा गया है कि निःस्वार्थता, लोभरहित एवं निष्कामता मनुष्य को देवत्व प्रदान करती है, जबकि स्वार्थ और लोभ मनुष्य को मनुष्यता से हटाकर दानवता जैसा असुर बना देते हैं, और कर्तव्य-परायणता के रास्ते से चलते हुए जप-ध्यान करने तथा सदगुरु के सहयोग से सुषुप्त शक्तियों को जगाने की बात कही गई है। एक पद में यह भी कहा गया है कि सब परिस्थितियों में सम रहना ही भगवान श्रीकृष्ण की गीता का समत्व योग है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- आध्यात्मिक विचारों का संकलन
- साधना तथा उपदेश
- प्रेरक प्रसंग
- जीवन-मार्गदर्शन
पुस्तक की मुख्य बातें
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