Antar Jyot
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यह पुस्तक अन्तर ज्योति नाम से प्रकाशित हुई है। निवेदन में बताया गया है कि इस पुस्तक में जीवन के भौतिक प्रश्न, वेदान्तात्मक अध्ययन तथा संतों-महापुरुषों के गहन अनुभव का नवीनतम रूप प्रस्तुत किया गया है, जो आज के व्यस्त समाज के लिये अत्यन्त आवश्यक है। विनीति के नीचे श्री योग वेदान्त सेवा समिति, अहमदाबाद आश्रम अंकित है। पैमाना लगभग 32 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर बताया गया है कि ब्रह्म का स्वभाव तीन गुणों के प्रभाव से संचालित होता है, उनमें से रजो-गुण के प्रभाव से मनुष्य को आत्म-दुःखद अनुभव होता है और वह तृष्णा, शुष्क, रूक्ष जैसी तुच्छ मूर्तियों में रह जाता है, जबकि सत्त्व-गुण जीवन को हर्षमय बनाता है और स्वगुण एवं ब्रह्मरोक आदि उच्च रोकों में प्रवेश नहीं करता।
पृष्ठ पर यह भी कहा गया है कि जिन्होंने अपनी साधना से अपने अन्तर के आनन्दधन आत्मा को जीवित रखा है, वे तीनों गुणों से ऊपर अपने असर का आनन्द लेकर जीवित हो सकते हैं, और रजो-गुण के कुप्रभाव एवं सत्त्व-गुण के सुप्रभाव को नकारने का उल्लेख भी है। यह पुस्तक योग व उच्च संस्कार से जुड़े पाठकों के लिये उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- भीतर की ज्योति तथा आत्म-ज्ञान
- ध्यान तथा साधना
- प्रेरक प्रसंग
- जीवन-मार्गदर्शन
पुस्तक की मुख्य बातें
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