Gagar Mein Sagar
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यह पुस्तक गागर में सागर नाम से प्रकाशित हुई है, जो ब्रह्मलीन ब्रह्मनिष्ठ स्वामी श्री रीराशाहजी महाराज के ज्ञान वचनामृत और उनके सत्संग प्रवचनों का मह संकलन है। निवेदन में बताया गया है कि यह संकलन श्री योग वेदान्त सेवा समिति की कृति है। पैमाना लगभग 45 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर वेदों को सागर की उपमा दी गई है, और यह बताया गया है कि संतों की वाणी में साधना की सुगम योजना और आत्मज्ञान की समझ भरा होता है, तथा सच्चे सुख की कुंजी और शय्या-स्वास्थ्य के नुस्खे भी मिलते हैं। पृष्ठ पर ही यह समझाया गया है कि सत्संग के मार्फत ही सत्त्व को समझा जा सकता है, और दुःख के घाव को फटाइमे से फूलने का उल्लेख भी है।
पढ़ते हुए गुरू नानकदेव का हवाला और सदगुरू की महत्वता भी आती है, और यह समझाया गया है कि प्रार्थना में अहंकार का त्याग करके शय्या में सुख की बावना का त्याग कर देना चाहिए, और जो प्रार्थ्य हो उसका शुद्ध उपयोग करना चाहिए। पृष्ठ पर यह भी पूछा गया है कि किसी संत से दुःखों का घाव फटाइमे का उत्तर मिला फूलना, और इसी फूलने में ही सत्संग कैसे होगा।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- आध्यात्मिक विचारों का संकलन
- साधना तथा उपदेश
- प्रेरक प्रसंग
- जीवन-मार्गदर्शन
पुस्तक की मुख्य बातें
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