Jitay Ji Mukti
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यह पुस्तक जीते जी मुक्ति नाम से प्रकाशित हुई है, जो प्रातःस्मरणीय पूज्य संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचनों का संकलन है। शीर्षक-पृष्ठ पर ब्रह्मचर्य-यज्ञ का मंत्र दिया गया है, जिसमें ओं नमो भगवते महाबले पराक्रमाय तथा मनोभिलापितं मनः स्तोम्भ कुरु कुरु स्वाहा लिखा है। पैमाना लगभग 65 पृष्ठ का है।
अनुक्रम में ब्रह्मचर्य-यज्ञ का मंत्र, निवेदन और जीते जी मुक्ति जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं।
पृष्ठ पर बताया गया है कि जो व्यक्ति ईश्वर के दीवानों के बीच अभी भी जीवित रहकर साधना-मार्ग में चल सकता है, वह प्राणणभात्र के रूप में ही समझा जाता है और उसका मन भी अनन्त ब्रह्माण्डों में व्याप्त माना जाता है, इसलिए वह प्रेम की अनुभूति के क्षणों में प्रभु को अपना मन लौटा लेता है, तथा पुत्र को देह-बन्ध से मुक्त करने के लिये कर्म-काण्ड में सावधान रहने का उपदेश भी दिया गया है। यह पुस्तक साधक-पाठकों के लिये उपयोगी है। पृष्ठ पर यह भी बताया गया है कि कर्म-काण्ड में सावधान रहने का उपदेश इसलिए दिया गया है कि साधक जो कुछ भी करे उसका प्रभाव उसके अंतःकरण पर पड़ता है, इसलिए प्रेम की अनुभूति के क्षणों में भगवान का ध्यान स्वतः आ जाता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- जीवन में जीत तथा मुक्ति
- आत्म-विकास तथा साधना
- प्रेरक उपदेश
- साधक के लिए निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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