Madhur Vyvhaar
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यह पुस्तक मधुर व्यवहार नाम से प्रकाशित हुई है और यह प्रातः समरणीय परम पूज्य संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग प्रवचन पर आधारित है। शीर्षक-पृष्ठ पर संत जी का नाम अंकित है, और अनुक्रम में दो प्रकरण दिए गए हैं। पैमाना लगभग 18 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर बताया गया है कि परमात्मा परम आनन्द और परम शान्ति के भंडार हैं, और उनके साथ हमारा सम्बन्ध जितना ही बढ़ता जाएगा उतने ही आनन्द और शान्ति भी हमारे अंदर बढ़ते जायेंगे। साथ में यह भी दर्ज है कि जिस प्रकार मन की शुद्धि के बिना, संकल्प-शक्ति के अभाव में, वैराग्य के बिना तथा चेतना के अभाव में कोई भी साधक ब्रह्मलब्ध को प्राप्त नहीं कर सकता, उसी प्रकार इस उत्तरार्ध का अवध्ययन किया गया है।
अनुक्रम के दूसरे प्रकरण का शीर्षक है ध्यान देने योग्य बहुत आवश्यक बातें, और पृष्ठ पर विश्वजी के कथन का उल्लेख है कि जिस किसी को अज्ञान का भोग कर हुए प्रकाशनार्थ्य देते रहते हैं, वह आत्मज्ञान नहीं मिला तो अंत में इस जीवात्मा का सर्वस्व नष्ट हो जाता है। यह पुस्तक सत्संग-पाठकों के लिए उपयोगी है, और आचरण और व्यवहार पर आधारित उपदेश देती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- मधुर व्यवहार तथा वाणी
- सदाचार तथा संयम
- पारिवारिक तथा सामाजिक नियम
- व्यावहारिक सुझाव
पुस्तक की मुख्य बातें
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