Matri Pitri Poojan
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यह पुस्तक मातृ-पितृ पूजन नाम से प्रकाशित हुई है और उपशीर्षक में बताया गया है कि इसमें अपने बच्चों की स्वस्थ, प्रसन्नता, उत्साह, एकता, लक्ष्मीपूर्वे एवं कार्यकुशलता बनाने हेतु पूजन बाघ की जान प्रेरणा से चलाये जा रहे बाल संस्कार केन्द्र में मंदिरा दी गई है। लेखक के रूप में आचार्य जयसल जी का नाम आवरण-पृष्ठ पर अंकित है, और उनका परिचय भी दिया गया है। पैमाना लगभग 17 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर आचार्य जयसल जी का यह परिचय छपा है जिसमें बताया गया है कि वे माता-पितृ के प्रति परम भक्ति के भाव को बच्चों में जाग्रत करके ही वास्तविक शान्ति, सन्तोष और सुख दे सकते हैं। उनका सिद्धान्त यह है कि आत्मा से वास्तविक सुख मिलता है, और वास्तविक सुख से वास्तविक सन्तोष, और सन्तोष से सन्तोष का निर्माण होता है।
इस पुस्तक में चार प्रकार के संस्कारों का विवरण दिया गया है, जिनमें शारीरिक-मानसिक, वैराग्य-विवेक और सन्तुलित-मार्ग शामिल हैं, और साथ में अनेक प्रकार के बच्चों के लिए देवता-विहार की विधि भी बताई गई है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- माता-पिता की सेवा तथा पूजन
- धार्मिक तथा नैतिक कर्तव्य
- विधि तथा नियम
- प्रेरक प्रसंग
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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