मक्का (मकई) खाने के 14 लाजवाब फायदे | Corn Benefits and Side Effects

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मक्का (मकई) खाने के 14 लाजवाब फायदे | Corn Benefits and Side Effects

परिचय एवं स्वरूप :

मक्का एक खाद्य-फसल है, जो मोटे अनाजों में गिनी जाती है। भारत के मैदानी भागों से लेकर 2700 मीटर की ऊँचाईवाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी मक्का उगाई जाती है। इसकी खेती के लिए बलुई, दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। भारत में यह सैकड़ों वर्षों से उगाई जा रही है। वैसे तो पूरे भारत में, पर आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा में प्रमुखता से खेती की जाती है। आंध्र, तेलंगाना तथा राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन होता है, लेकिन विश्व में अमरीका, चीन, ब्राजील, मेक्सिको आदि देश मक्का उत्पादन में अग्रणी हैं।
मक्का न अधिक सूखा बरदाश्त कर पाती है और न अधिक पानी; यदि खेत में कुछ दिन पानी खड़ा रह जाए तो फसल गल जाती है; पौधा खड़ा-खड़ा सूख जाता है। पौधा मजबूत जड़ों के सहारे खड़ा रहता है। प्रति पेड़ एक-दो या कभी तीन भुट्टे लगते हैं। भुट्टों के बीच दाना कई परतों के बीच सुरक्षित बढ़ता रहता है। ऊपरी सिरे पर कलगी जैसे रेशमी मुलायम बाल होते हैं, जो भुट्टे में दाना पकने के साथ-साथ काले पड़कर सूख जाते हैं, यह खरीफ की प्रमुख फसल है। वर्षा ऋतु में यह पककर तैयार हो जाती है। कच्चे भुट्टे के रूप में भी इसकी बड़ी खपत है। कसबे से लेकर शहर तक भुट्टों को रेहड़ी पर भूनकर बेचते देखा जा सकता है। मक्की दो प्रकार की होती है-पीली और लाल।

मक्का (मकई) के विविध भाषाओं में नाम :

अंग्रेजी-Maize, Corn, Indian Corn, असमिया-गोमधन, मकोइ; कन्नड़-मेक्के जोला, मुसुको जोला, गोइन जोल; गुजराती-मक्करई, मक्कई; तमिल-मक्का छोलम, तेलुगू मोक्का-जन्ना, मक्का जोनालु; पंजाबी मकई, छल्ली; बँगला-जनार, भुट्टा, जोनार, मराठी—मका, मकई, बुटा; मलयालम-चोलम, मणिपुरी–छुजक नाहोम; हिंदीमक्का, मकई, भुट्टा, छल्ली।

मक्का (मकई) के गुण / गुणधर्म :

1-आयुर्वेदिक चिकित्सकों की दृष्टि में मक्का खुश्क, ठंडी और दुर्जर है।
2- इसके अलावा यह मधुर, कटु, कसैली, अत्यंत रुक्षता लानेवाली, कफ और पित्तनाशक, रुचि पैदा करनेवाली, दस्तों को रोकनेवाली तथा शीतल कही गई है,
3-परंतु यह वायु पैदा करती है तथा देर से पचती है।
4-भुनी मक्का अत्यंत स्वादिष्ट होती है।
5-यह दुर्बल पाचन शक्तिवालों के लिए गरिष्ठ है तथा शरीर की नसों को शिथिल करनेवाली है।
6-इसके प्रति 100 ग्राम खाद्य भाग में कैलोरी 365, वसा 4.7 ग्राम, सोडियम 35 ग्राम, पोटैशियम 287 मिग्रा., कार्बोहाइड्रेट 74 ग्राम, प्रोटीन 9 ग्राम तथा विटामिन बी12 एवं फोलिक एसिड तत्त्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। लौह तत्त्व भी काफी मात्रा में होता है।

मक्का (मकई) के सामान्य उपयोग :

1-भारत में मक्का का उपयोग केवल खाद्यान्न, मुरगीदाना, सुअरदाना के लिए ही होता है, परंतु विदेशों, खासकर अमरीका में इसका उत्पादन एक औद्योगिक फसल के रूप में होता है। वहाँ मक्का का अधिकतम उपयोग स्टार्च बनाने के लिए किया जाता है।
2-भारतीय घरों में इसकी रोटी, टिक्कड़, पकौड़े तथा पक्वान्न बनाए जाते हैं।
3- भुट्टे के कच्चे नरम दाने भूनकर, सेंककर खाए जाते हैं। नीबू-नमक लगाकर ये बड़े ही स्वादिष्ट लगते हैं। दाने तथा भुट्टे बालू में भूनकर तथा पानी में उबालकर भी खाए जाते हैं।
4-मक्का का दलिया छाछ या दही के साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है।
5-मकई के दाने भूनकर फूले बनाए जाते हैं, ये फूले बड़े स्वादु होते हैं।
6- पंजाब में मक्की की रोटी और चने या सरसों का साग मशहूर है। मकई के आटे की बेसन में मिलावट की जाती है।
7-मक्की का हरा तथा सूखा पौधा कुट्टी बनाकर पशुओं को खिलाया जाता है।
8-मुरगी तथा सुअरों को मक्का खिलाई जाती है।
9-सर्दियों में मैदानी भागों में गाँवों में इसकी रोटी सभी वर्गों में लोकप्रिय है।

मक्का खाने के फायदे / औषधीय उपयोग : makka khane ke fayde

चिकित्सा की दृष्टि से भी आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने मक्का को उपयोगी पाया है। हालाँकि मक्का वायु पैदा करनेवाली है तथा इसके टिक्कड़ देर से पचते हैं। पचने में भारी भी हैं।

1-पेशाब में जलन : मक्का के ताजा भुट्टे को स्वच्छ पानी में उबालें, इस पानी को छानकर इसमें मिश्री या खाँड़ मिलाकर रोगी को पिलाएँ। इससे पेशाब की जलन तथा गुरदों की कमजोरी भी दूर होती है अथवा मक्का के भुट्टे या मक्का के दाने रात को मिट्टी के बरतन में भिगो दें, प्रातः इस पानी को छानकर इसमें शहद, खाँड़ अथवा मिश्री मिलाकर रोगी को पिला दें, इससे पेशाब खुलकर आएगा। रुक-रुककर पेशाब आना, पेशाब में जलन, दाह आदि विकार शांत होंगे। ( और पढ़ेपेशाब में जलन के 25 घरेलू उपचार )

2-वमन-उल्टी : भुट्टे में से दाने निकालने के बाद बची छूछ को साफ जगह में जलाकर राख बना लें, इस राख को शहद के साथ चाटने पर उल्टी तुरंत बंद हो जाती है। इससे मिचलाना भी ठीक हो जाता है।

3- कब्जियत : मकई में पाए जानेवाले रेशे पाचन-क्रिया को मजबूत बनाते हैं। भुट्टा अथवा इसके दाने खाने से पेट की कई समस्याएँ, जैसे कब्ज, बदहजमी, गैस आदि दूर होते हैं। हालाँकि मकई की रोटी देर से पचती है, परंतु पेट साफ करनेवाली है, इससे पाचन दुरुस्त रहता है।

4-अनीमिया : जिन माता-बहनों को एनीमिया की शिकायत रहती है, खून की कमी बनी रहती है, उनके लिए मक्का का सेवन फायदेमंद है। चूंकि अनीमिया विटामिन बी12 तथा फोलिक एसिड की कमी से हुआ करता है, मक्का में ये दोनों तत्त्व पर्याप्त मात्रा में हैं, मकई में लौहतत्त्व भी पर्याप्त मात्रा में होता है, जो नया रक्त बनाने में मदद करता है। ( और पढ़े हीमोग्लोबिन व खून की कमी दूर करने के 46 उपाय)

5-ऊर्जा का स्रोत : मक्का में कैलोरीज, स्टार्च तथा कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त परिमाण में होने के कारण ये शरीर को देर तक ऊर्जावान बनाए रखते हैं। इसलिए जिम के प्रशिक्षक तथा डायटीशियन कसरत करने से पहले मक्का खाने की सलाह देते हैं। इसे खा लेने पर शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलकर देर तक बनी रहती है।

6-गर्भवती के लिए : गर्भवती महिला को अगर फोलिक एसिड की कमी हो जाए तो जन्म लेनेवाला शिशु कमजोर तथा कुपोषित होता है। चूंकि मकई में फोलिक एसिड होता है, इसलिए गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद है। सीजन में गर्भवती माताओं को भुट्टे खाने चाहिए अथवा एक कप उबले दानों का सेवन नित्य करना चाहिए।

7-आँखों की रोशनी : मक्का के दानों में पाया जानावाला कैरोटिनाइड्स आँख के रेटीना पर लाभकारी प्रभाव दिखाता है, जिससे आँखों की रोशनी क्षीण नहीं होती है। इसमें विटामिन ‘ए’ भी होता है, जो आँखों के लिए बहुत ही उपयोगी है, अत: मक्का के सेवन से आँखों को भी फायदा होता है। ( और पढ़ेचाहे चश्मा कितने भी नंबर का हो वो भी उतरेगा )

8-हृदय रोग : आज मिलावट के जमाने में हृदय रोग तेजी से अपने पैर पसार रहा है। मक्का पर हुए ताजा शोधों में यह पाया गया है कि मक्के के तेल के सेवन से धमनियों में जमा कोलेस्टरॉल साफ हो जाता है। इसके साथ-साथ मक्का में पाए जानेवाले ओमेगा-3 फैट्टी एसिड से हृदयाघात का खतरा न के बराबर रहता है।

9-बालों के लिए : मक्का में पाए जानेवाले एंटी-ऑक्सीडेंट तत्त्व विटामिन ‘ए’ और लाइकोपिन बालों को मजबूत बनाते हैं। अतः मात्र एक कप पक्का के दाने नित्य खाने से ही बालों की समस्याओं से निजात मिल जाती है, असमय बाल नहीं गिरते हैं और न ही समय से पहले सफेद होते हैं।

10-खाँसी-जुकाम : खाँसी या जुकाम बार-बार होता है या हमेशा बना रहता है तो मक्का का भुट्ट्टा जलाकर उसकी राख बना लें। इसे बारीक पीसकर रख लें। स्वाद के लिए थोड़ा सेंधा नमक मिला लें। इसमें से चौथाई चम्मच लेकर दिन में चार बार गरम पानी से फंकी करें। जल्दी ही कुकरखाँसी भी ठीक हो जाती है।

11-कैंसररोधक : ताजा शोध-अध्ययनों से पता चला है कि मकई में पाए जाने वाले एंटीऑक्सडेट्स कैंसर से लड़ने की क्षमता रखते हैं। मक्के में रहनेवाला फेरुलिक एसिड स्तन तथा लीवर के ट्यूमर्स को नष्ट करता है। अत: इसके सेवन से ही स्तन तथा लीवर कैंसर होने की आशंकाएँ काफी हद तक दूर हो जाती हैं।

12-वजन बढ़ाने के लिए : जो भाई-बहन पतले-दुबले हैं, जिन पर मांस नहीं चढ़ता है, अगर वे अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं तो मक्का का सेवन उनके लिए सबसे फायदेमंद है। मक्का में कैलोरी तथा कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर पर मांस लाकर वजन बढ़ाने का काम करता है। अतः वजन बढ़ाने के लिए यह सबसे सस्ता एवं उत्तम उपाय है। ( और पढ़े वजन बढ़ाने व मोटा होने के 7 सबसे असरकारक घरेलु उपाय)

13-मूत्रकृच्छ: मकई के रेशमी बालों का काढ़ा ढाई तोला की मात्रा में पीने से मूत्रकृच्छ रोग मिट जाता है।

14-शारीरिक बल: ताजे कच्चे मकई के भुट्टों के दानों को दूध में खूब महीन पीस छानकर पीने से शारीरिक बल में वृद्धि हो जाती है ।

मक्का (मकई) खाने के नुकसान : makka khane ke nuksan

1- मक्का की रोटी पचने में देर लगाती है, जिनका हाजमा कमजोर है, वे इसका सेवन कम ही करें। जिनका शरीर बलवान है और जठराग्नि तेज है, वे इसे आसानी से पचा सकते हैं। दुर्बल पाचन शक्तिवालों के लिए मक्का गरिष्ठ भोजन है।
2- कच्ची मक्का अधिक खाने से पेट फूल जाता है। कम मात्रा में खाने से सब ठीक रहता है। यह भरपूर फायदा करती है। मक्का के खिले दाने स्वादिष्ट तथा पाचक होते हैं।

विशेष :

✦ भुट्टे खाकर छाछ पीने से यह जल्दी हजम हो जाता है।
✦ मक्खन या शुद्ध घी के साथ भुट्टे खाने से इसका रूखापन और वातकारक प्रभाव सन्तुलित हो जाता है।

2018-08-09T12:53:41+00:00 By |Herbs|0 Comments