बच्चों की त्वचा की देखभाल और सुरक्षा के उपाय – Baccho ki Twacha ki Dekhbhal ke Upay in Hindi

जन्म के समय नवजात शिशु का शरीर एवं त्वचा बेहद मासूम और कोमल होने के साथ-साथ नर्म, चिकनी और बेदाग होती हैं ऐसे समय देखभाल में जरा-सी लापरवाही खतरनाक हो सकती हैं उम्र बढ़ने के साथ शिशु की त्वचा को कई तरह के वातावरण का सामना करना पड़ता है। इसी दौरान माता-पिता की अनदेखी या लापरवाही बच्चे के भविष्य की बाधा भी बन जाती है। कई बार देखरेख के अभाव में त्वचा खराब हो जाती है या संक्रमित होकर बीमारियों का घर बन जाती है।

एलर्जी, फोड़े-फुसी, त्वचा का असमय फटना, मौसम परिवर्तन के साथ कुप्रभाव दिखाना या काम करते समय स्पर्श वाली त्वचा का अचानक और आसानी से कटना जैसी कई बीमारियां इसी अनदेखी का परिणाम होती हैं। त्वचा की सही देखभाल के लिए कई तरह के साबुन या सॉफ्ट सोप बाजार में उपलब्ध हैं लेकिन बच्चे की त्वचा को सुरक्षित रखने और कीटाणुओं से बचाने में कीटाणुनाशक साबुन फायदेमंद होते हैं।

बच्चों की त्वचा की देखभाल के घरेलू उपाय (Baby Skin Care Tips in Hindi)

बच्चों की त्वचा की देखभाल कैसे करें ? –

बच्चे की त्वचा की कोमलता बचाए रखने व इसकी सुरक्षा के लिए घरेलू उपाय बहुत ही कारगर साबित होते हैं।

मालिश से बनाइए अपने बच्चे को स्वस्थ और सुडौल –

मौसम अगर सूखा हो तो बच्चे को नहलाने से पहले उसके त्वचा को तेल मालिश जरूर करना चाहिए। इससे त्वचा नर्म और साफ रहती है । वैसे तो कई तरह के बेबी ऑयल बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति मौसम के अनुरूप तेल के चयन पर बल देती है। जैतून, नारियल और सूरजमुखी का तेल गर्मियों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि सरसों और बादाम का तेल सर्दियों में गुणकारी रहता हैं। तिल का तेल भी बेहद उपयोगी हैं। आयुर्वेद में तिल के तेल से मालिश करने को भी लाभप्रद माना गया है। तिल का तेल सभी प्रकारों के दोषों में संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं । तेल की शुद्धता का ध्यान रखें मालिश के तेल में सुगंधित फूलों के रस की कुछ बूंदें भी मिलाई जा सकती हैं जैसे- गुलाब और चंदन का मिश्रण खुशबू बढ़ाता है। तेज सुगंध वाले फूलों के रस के मिश्रण त्वचा में एलर्जी या खुजली भी पैदा कर देते हैं।

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त्वचा के लिए उबटन –

सप्ताह में एक बार दूध में बेसन मिलाकर पेस्ट बना लें। नहाने से पहले इस उबटन को हल्के हाथों से बच्चे के शरीर पर रगड़ना चाहिए, इससे त्वचा की भीतरी सफाई हो जाती है।

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तैलीय त्वचा की संभाल –

किशोरावस्था से पहले यह ध्यान रखें कि त्वचा तैलीय तो नहीं हैं अगर त्वचा पर चिकनाहट दिखने लगें, तो चेहरे को गुलाबजल से रगडकर जरूर साफ करें। दिन में चेहरे को दो से ज्यादा बार साबुन से न धोएं। इसे त्वचा क्षारीय बन जाती है और बैक्टीरिया सक्रिय होकर त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

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अनचाहे बालों से छुटकारा –

कई बच्चों के शरीर पर जन्म से ही घने बाल होते है, लेकिन समय के साथ उनके बाल कम हो जाते हैं। बाल हटाने के तरीके बच्चों पर नहीं आजमाए जा सकते है, लेकिन बेसन और दूध का उबटन शरीर पर रगड़ने से घने बालों की बढ़त कम की जा सकती हैं। त्वचा को निखारने में भी इससे मदद मिलती है।

कॉस्मेटिक का प्रयोग –

बच्चे की त्वचा पर क्रीम और कॉस्मेटिक के इस्तेमाल से बचना चाहिए। आवश्यक ही हो तो रूखापन दूर करने के लिए बहुत ही कम मात्रा में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को किशोरावस्था में भारी क्रीम का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। यह न सिर्फ त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देती है बल्कि शारीरिक विकास में भी बाधा उत्पन्न करती है। ऐसे में कीटाणुनाशक साबुन का उपयोग किया जा सकता है।

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