Eye Care Tips in Hindi | आँखों की देखभाल के प्राकृतिक तरीके और उपाय

नेत्रों की देखभाल कैसे करें (विशेष स्वास्थ्य नियम) : Eye Health Tips in Hindi

apni aankhon ki dekhbhal kaise kare

  • प्रातःकाल के समय हरी घास पर नंगे पैरों चलने और भोजनोपरान्त अपनी गीली हथेलियों को आँखों पर रगड़ने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
  • प्रातःकाल के समय शैया त्यागते ही सर्वप्रथम मुँह में जितना पानी सरलतापूर्वक भरा जा सके, उतना पानी भरकर दूसरे किसी बर्तन में जल लेकर उससे आँखों को 20 बार धोना चाहिए । इस प्रयोग को निरन्तर करते रहने से नेत्रों की ज्योति वृद्धावस्था तक कम नहीं होती।
  • चाँदनी रात में चन्द्रमा की तरफ कुछ देर तक देखने के प्रयोग से भी दृष्टि ठीक रहती है।
  • कमजोर दृष्टि वाले लोगों के लिए दिन में 2 बार 5-6 मिनट तक केवल आँखें मूंदकर बैठे रहना भी लाभदायक है।
  • रात्रि को जल्दी सो जाना चाहिए और गाढ़ी एवं पूरी नींद लेनी चाहिए। सोते समय नेत्रों को हथेलियों से ढंक लें और किसी नीली वस्तु का ध्यान करते-करते सो जाएँ। सबेरे के समय उठते ही 5 मिनट तक इसी प्रकार पुनः किसी नीली वस्तु का ध्यान करें और उसके बाद आँखें खोल दें।
  • यदि नित्य सबेरे के समय आँखें बन्द किए हुए 8-10 मिनट तक सूर्य की ओर मुँह करके बैठा जाए तो नेत्रज्योति कभी कम नहीं होगी। सूर्य की ओर टकटकी लगाकर देखने से भी कभी-कभी ‘सूर्यान्धता’ (Sun Blindness) हो जाती है। स्वस्थ नेत्रों वाले लोग अथवा जो पहले कुछ समय तक नेत्र बन्द किए हुए सूर्य की ओर देखने का अभ्यास किए हों, ऐसे व्यक्ति नीचे लिखा ‘त्राटक व्यायाम’ कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • सूर्य के सामने बैठ जाएँ । नेत्रों से भूमि की ओर देखें और इस प्रकार नेत्रों को ऊपर करते जाएँ कि पलकें न उठे । केवल ठोड़ी या ठुड्डी ऊपर होती जाए और सिर पीछे की ओर झुकता जाए । ठुड्डी इतनी ऊँची होनी चाहिए कि नेत्र-सूर्य के निकट एक अँगुल नीचे का आकाश देख सकें। पलक मारते रहें। अब अलार्म वाली दीवार घड़ी के पैण्डलूम की तरह धीरे-धीरे हिलना आरम्भ करें । बीच में प्रत्येक 2-4 मिनट के बाद 1-2 मिनट के लिए नेत्र बन्द कर लें। इस सूर्य व्यायाम के बाद नेत्रों के सामने धुंधलापन नहीं आना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो समझें कि व्यायाम में कहीं गलती हुई है। इस धुंधलेपन को दूर करने के लिए नेत्रस्नान और पामिंग करना चाहिए।
  • पढ़ते-लिखते समय रोशनी बाँयी ओर से आनी चाहिए और पुस्तक आँखों से 12 से 14 इंच के अन्तर पर रखना चाहिए । पुस्तक जितनी ही नजदीक रखकर पढ़ी जाएगी, आँखों पर इतना ही अधिक जोर पड़ेगा। पढ़ते समय झुकना अथवा हिलना-डुलना आँखों के लिए अत्यन्त ही हानिकारक है। पढ़ते समय बार-बार पलकें मारते रहना आवश्यक है। लिखने-पढ़ने अथवा अन्य कोई कार्य जैसे-सीने-पिरोने का कार्य आदि करते समय यदि सामने की कोई वस्तु देखनी हो तो पहले एक पल के लिए आँखें बन्द कर लें, फिर उस वस्तु को देखें।
  • जब कोई वस्तु ऊपर-नीचे या दाँए-बाँए हों और उसे देखना हो तो वैसे ही रखो अर्थात् दृष्टि को बाँकी तिरछी अथवा ऊँची नीची करके नहीं देखना चाहिए । अपितु जब ऊपर देखना हो तो ठुड्डी को ऊपर उठाकर देखना चाहिए । दाहिनी ओर देखना हो तो ठुड्डी को दाहिनी ओर घुमाकर देखना चाहिए।
  • aankhon ki roshni badhane ka mantra – चमत्कारी नेत्ररक्षक मन्त्र –
    शर्यातिश्च सुकन्याच सवनम् शुक्रमाश्विनौ ।
    भोजनान्ते स्मरेनित्यं चक्षुस्तस्य नहीयते ॥

    इस मंत्र को नित्य भोजन के बाद अर्थ समझते हुए पढ़ने से-समस्त प्रकार के नेत्र रोग नष्ट हो जाते हैं।
  • सूर्य के प्रकाश में टहलें, खेलें और दृष्टि-दोलन करें।
  • प्रतिदिन काम में दो बार भोजनोपरान्त हाथ-मुँह धोते समय कम-से-कम 6 बार आँखों पर जल का झपट्टा मारें।
  • विचित्र एवं अनजाने पदार्थों की तरफ जैसे संग्रहालय की चीजें अधिक देर तक न देखें, इसी प्रकार अरुचिकारक एवं अप्रिय साहित्य, टी. बी. के कार्यक्रम और फिल्म आदि को पढ़ने व देखने से दूर रहें।
  • कभी-कभी शुद्ध सरसों का तेल कानों में डालना नेत्रों के लिए हितकर है।
  • मिर्च-मसाले आदि उत्तेजक पदार्थों के सेवन से बचे रहना चाहिए।
  • केवल जल पीकर सप्ताह में एक दिन का उपवास अवश्य करें और कब्ज हो तो उस दिन एनिमा लेकर पेट को साफ कर डालना चाहिए।

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए योग (चक्षु व्यायाम) : Aankhon ka Vyayam in Hindi

aankhon ki roshni tej karne ke liye yoga

शरीर के समस्त अवयवों में हमारी आँखें सर्वाधिक कोमल होती हैं। ये शरीर के सूक्ष्मतम स्नायुओं द्वारा निर्मित होकर हड्डी के दो सुदृढ़ गोलकों में पड़ी हुई इधर-उधर फिरती रहती हैं, इनके भीतर केवल उचित मात्रा में पानी भरा रहता है। नेत्रों से एक ही प्रकार का कार्य बहुत अधिक समय तक नहीं लेना चाहिए। ऐसा करने से आँखें बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं। जल्दी-जल्दी पलक गिराना-स्वस्थ आँखों का एक स्वाभाविक गुण है। पलक मारने से नेत्र को सुख मिलता है तथा जो वस्तुएँ देखते हैं वे भी साफ दिखाई देती हैं।

जिन लोगों के नेत्र अस्वस्थ होते हैं वे देर से और अस्वाभाविक रूप से पलक मारते हैं। छोटे बच्चे बड़े ही स्वाभाविक ढंग से और जल्दी-जल्दी पलक मारते हैं। पलक मारने का औसत समय प्रति सेकेण्ड 1 बार है। कोई भी कार्य क्यों न किया जाए, हमें पलक मारना नहीं भूलना चाहिए । यह मिथ्या नहीं है कि जिसे भली प्रकार पलक मारना आ गया, उसे नेत्रों को स्वस्थ बनाए रखने का सलीका या ढंग आ गया।

सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. बेट्स चक्षु व्यायाम के परीक्षित हैं, जिनका प्रचार व प्रसार अपने देश भारतवर्ष में भी लगभग 3-4 दशकों से सफलतापूर्वक हो रहा है और लाखों नेत्र-रोगी अब तक लाभान्वित हो चुके हैं। इन व्यायामों को आरम्भ करने के साथ ही आँखों पर चश्मा लगाना त्याग देना चाहिए क्योंकि बिना चश्मे छोड़े इन व्यायामों से विशेष लाभ नहीं होता।

पलक मारने का व्यायाम –

गिनती गिनें और प्रत्येक गिनती पर 1 पलक मारें । अथवा दर्पण के सामने बैठकर पलक मारने का अभ्यास करें या फिर एक जेब घड़ी को कान के पास लगाकर उसकी प्रत्येक टिक-टिक की आवाज पर पलक मारें अथवा चलते समय प्रत्येक कदम पर पलक मारते हुए चलें। इस प्रकार पलक मारने की कसरत सम्पन्न हो जाती है।

दृष्टिपट पर चक्षु व्यायाम –

दृष्टिपट से 10 फुट की दूरी पर खड़े हो जाएँ। अपने एक हाथ की हथेली को गाय के कान जैसा बनालें और उससे एक आँख को हल्के से ढंक लें। अब दूसरी आँख जो खुली है उससे पलक मार-मारकर प्रत्येक रेखा में लिखे हुए हिन्दी या अंग्रेजी के सब अक्षर पढ़ जाएँ । जिन लोगों के नेत्रों की दृष्टि कमजोर हो यदि वे भी नित्य ही नियमानुसार यह दृष्टि-पट्ट पढ़ लिया करें तो कुछ ही समय के बाद उनकी भी दृष्टि तीव्र हो जाएगी।

‘ॐ’ परिक्रमा-चक्र –

व्यायाम सिद्धासन लगाकर बैठ जाएँ । अब अँगूठे को तर्जनी पर गोलचक्र में घुमाएँ, नेत्र बन्द करें और ‘ॐ’ का जप करें। एक चक्र को एक ‘ॐ’ कहकर पूरा करें। ॐ की जगह पर आप अपनी इच्छानुसार कोई अन्य अक्षर का भी जाप कर सकते हैं । चक्र को छोटे से छोटा बनाएँ और ध्यान तर्जनी अँगुली एवं ‘‘ कहने पर रखें । कुछ देर के बाद आप में आनन्द की हिलोरें उठने लग जाएँगी। एक घण्टा भी यदि ध्यानावस्थित दशा में व्यतीत हो जाएगा तो भी यही प्रतीत होगा कि मात्र 5 मिनट ही व्यतीत हुए हैं यदि यह साधना सूर्य की ओर मुख करके की जाए तो नेत्रदृष्टि जल्द ही तीव्र होती है। दृष्टि-पट पर अपने नेत्रों की ज्योति की शक्ति की जाँच करके इस दिव्य साधना की परीक्षा स्वयं ही की जा सकती है।

आँखें ढंकना या पामिंग –

दष्टिपटट को दीवार में अच्छे प्रकाश में लगाएँ। उससे 10 फुट की दूरी पर कुर्सी पर बैठ जाएँ। दृष्टिपट की ऊचाई उतनी होनी चाहिए, जितनी कि आपकी आँखें । अब अपनी दाँयी हथेली और अंगुलियों को गाय के कान की आकृति का बनाएँ और उसे दाँयी आँख पर इस प्रकार रखें कि हथेली का गड्ढा आँख के ऊपर रहे और अँगुलियाँ कुछ तिरछी होकर बाँयी भौंह के ऊपर होकर बाँए कपाल को ढक लें । बाँयी हथेली को भी ऐसा ही बनाकर बाँयी आँख पर रखें। इसी दशा में ढंकी आँखों को खोलकर देखें कि अँगुलियों के छिद्रों में से किसी से प्रकाश तो नहीं आता। यदि प्रकाश आता हो तो उसे बन्द करें और आँखें मूंद लें ।

अब अपनी किसी प्रिय घूमती वस्तु जैसे-झूला, चकई, लटू अथवा वृक्षों का हिलना आदि देखना चाहिए। 5 से 15 मिनट तक इस प्रकार ध्यान करने के उपरान्त हथेली को हटाओ और आहिस्ते से आँख और उससे पलक मर-मारकर दृष्टि-पट पर अंकित अक्षर पढ़ें।
पहले तो अक्षर साफ और काले दिखाई देंगे, किन्तु कुछ देर के बाद फिर धुंधले होंगे। ज्यों ही धुंधले अक्षर दिखने लगें-त्यों ही उस आँख को हथेली से ढककर दूसरी आँख खोलें और उससे पलक मार-मार कर पढ़ना आरम्भ करें। फिर-‘पामिंग’ करना शुरू कर दें और 10-15 मिनट के बाद पुनः उस आँख से भी अक्षर को पढ़ें ।

खड़े-खड़े पामिंग नहीं करना चाहिए । लेटकर ‘पामिंग’ किया जा सकता है । क्षीण दृष्टि वाले को दिन में कम-से-कम 4-5 बार पामिंग करना चाहिए। उसे चाहिए कि ‘पामिंग’ करते-करते ही नींद से सोएँ और प्रातःकाल के समय उठते ही पामिंग करें। यदि दोनों नेत्र एक समान कमजोर हों तो दोनों आँखों को खोलकर अक्षर पढ़ने का अभ्यास करना चाहिए।

सूर्यमुखी व्यायाम –

प्रातःकाल सूर्य की ओर मुख करके बैठ जाएँ । नेत्रों को बन्द कर लें। अब अपनी गर्दन, मस्तक और मुँदे हुए नेत्रों को दाहिनी तरफ से बाँयी तरफ और बाँयी तरफ से दाहिनी ओर धीरे-धीरे घुमाएँ जिस प्रकार सर्प अपने फल को बीन की ध्वनि पर हिलाता है। नेत्र सिर के साथ घूमते रहें । नेत्र स्वयं न घूमें और यदि घूमें तो विपरीत दिशा में । इस प्रयोग को. 10 मिनट से लेकर 30 मिनट तक करना चाहिए। फिर पीठ सूरज की ओर करके ऊपर के प्रयोग-पामिंग करना चाहिए । इस प्रयोग को प्रतिदिन 2 बार क्या जा सकता है ।

आँखों की कमजोरी दूर कर आँखों का चश्मा छुड़ाने का उपाय : Aankhon ka Chashma Utarne ka Tarika

आँख की कसरतें प्रतिदिन सुबह और शाम को बैठकर अथवा खड़े होकर करें , किन्तु किसी दीवार से सटकर मेरुदण्ड को सीधा रखते हुए निम्नांकित कसरतें करें –

  1. पहले बाँयी तरफ जितनी भी दूर देखा जा सके-देखें तदुपरान्त इसी प्रकार दाँयी तरफ देखें। यह क्रिया जल्दी-जल्दी, दो बार करें।
  2. उसी प्रकार बैठकर अथवा खड़े होकर और मेरुदण्ड को सीधा रखते हुए ऊपर की तरफ और उसके बाद नीचे की तरफ 12 बार देखें।
  3. उसी प्रकार आँखों को बाँयी तरफ से घुमाते हुए ऊपर को ले जाएँ और फिर दाँयी तरफ ले जाएँ । यह क्रिया भी 12 बार करके फिर तुरन्त ही उसके विपरीत दिशा में 12 बार करें।
  4. उसके बाद बाँए, नीचे, फिर दाँए और ऊपर की तरफ गोलाकार आँखों को 12 बार घुमाएँ तथा उतनी ही बार 12 बार विपरीत दिशा में घुमावें।अन्त में 12 बार आँखों को जोर से बन्द करें और खोलें।

आँखों की कमजोरी दूर करने वाले आहार :

नजर हो गई है कमजोर तो खाएं ये फूड्स –

☛ नेत्ररोग हों अथवा किसी भी रोग की प्राकृतिक चिकित्सा करते समय प्राकृतिक भोजन पर ध्यान देने की परम आवश्यकता होती है । ‘प्राकृतिक भोजन’ वह है जो मसाला, तेल, खटाई, विशेष नमक आदि उत्तेजक पदार्थों से रहित हो ।

☛ मौसमी फल, शाक, अन्न अपनी असली हालत में तथा धारोष्ण कच्चा दूध उत्तम प्रकार के प्राकृतिक भोजन हैं।

☛ नेत्ररोगों में-भोजन के लिए जिन खाद्य पदार्थों में भोज्योज यानि विटामिन ‘ए’ होते हैं, वे अत्यन्त ही लाभप्रद होते हैं, जैसे-धारोष्ण दूध, मक्खन, गोभी, शलजम, मेंथी का साग, टमाटर, गाजर, सोयाबीन, सहजन की हरी फलियाँ और हरा धनिया आदि।

☛ इनके अतिरिक्त खाद्योज (विटामिन) ‘बी’ और ‘सी’ तथा विटामिन ‘डी’ वाले पदार्थ भी नेत्रों के रोगों में लाभकारी सिद्ध होते हैं ।

☛ नेत्र रोगियों को बेर और आलू बुखारे को छोड़कर समस्त प्रकार के फल तथा मटर, सेम और लोबिया को छोड़कर अन्य समस्त प्रकार की हरी तरकारियों का सेवन लाभकारी है।

आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कुछ अन्य उपाय : Aankhon ki Roshni Badhane ke Upay in Hindi

■ मधु का अंजन नेत्रों में नियमित रूप से प्रतिदिन करते रहने से नेत्रों का कोई रोग नहीं होता और यदि कोई रोग हुआ तो वह शीघ्र ही दूर हो जाता है। रात को सोते समय आँखों को धोकर शीशे की सलाई से मधु का आँखों में अंजन करना चाहिए।

■ गाय के ताजे घी में मिश्री मिलाकर अथवा पाव भर दूध में थोड़ा शुद्ध घी मिलाकर सेवन करने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।

■ हरड़ दो ग्राम ,काली मिर्च एक ग्राम और हल्दी तीन ग्राम गुलाबजल में मिलाकर आंखों पर लगाएं।

■ अश्वगन्धा और मुलैठी के चार-चार ग्राम चूर्ण को आठ ग्राम आंवले रस के साथ मिलाकर रोज़ाना एक बार सेवन करने से आँखों की रोशनी बढ़ जाती है । यह प्रयोग 6 से 8 करें ।

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

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