Bhajanamrit
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यह पुस्तक भजानामृत नाम से प्रकाशित हुई है और आवरण-चित्र में सरस्वती का स्वरूप दिया गया है, जिसमें वीणा, मोर और कमल के फूल के बीच वे आसीन हैं। अनुक्रम में करीब पचास भजन दिए गए हैं, जिनमें सत्संग बिन कर्म न सूझे, हो गई रहेमत तेरी, अगर है ज्ञान को पाना, जंगल में जोगी बसता है, मस्ताना हो गया हूँ, घट ही में अविनाशी, अब मैं अपना ढोल बजाऊँ, गुरुदेव दया कर दो मुझ पर, काया कुटी, बेगम पुर, मेरी मात, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में, गुरु की रेवा साथ जाने, संत सदा अति प्यारे और इन्दु के देवतिये जाते हैं आदि शीर्षक आते हैं। पैमाना लगभग 29 पृष्ठ का है।
पाठ में भजन गद्य रूप में छपे हैं और हर भजन के बीच में ॐ का चिह्न भी आया है। पहले भजन में सत्संग बिन कर्म न सूझे, कमरा बिना अनुभव कैसा का प्रश्न उठाया गया है और उत्तर में कहा गया है कि जब तक भीतर खिड़की न खुले तब तक दीदारा कैसा, तथा यह भी जोड़ा गया है कि सत्पुरुषों का मिलना दुर्लभ है, दुर्लभ मानव की काया।
यह पुस्तक भक्ति-गीत और सत्संग-पाठकों के लिए उपयोगी है, और छोटे पृष्ठों में भजनों का संकलन पाठकों को शीघ्र सुना देता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- भजनों तथा पदों का संग्रह
- सरल अर्थ सहित
- कीर्तन करने की विधि
- भक्ति का भाव
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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