Mangalmaya Jivan Mrityu
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यह पुस्तक मंगलमय जीवन-मृत्यु नाम से प्रकाशित हुई है। शीर्षक-पृष्ठ पर एक वाक्य दिया गया है — एक बार फकीरी मौत में डूबकर बाहर आ जाओ, फिर देखो संसार का कौन-सा भय तुम्हें भयभीत कर सकता है, तुम शाहों के शाह हो — और नीचे पूज्य गुरु का नाम अंकित है। पैमाना लगभग 34 पृष्ठ का है।
निवेदन में बताया गया है कि मृत्यु एक अनिवार्य घटना है जिससे कोई नहीं बच सकता, सारी जीवन-स्थिति भयभीत है, और वाचन के अनुसार इस भय से मुक्त होने का कोई मार्ग नहीं है, क्योंकि पारम्परिक काल से ही पल्लिवत पुण्डरीक हुई भारतीय अध्यात्म-विचारा में इसका ठोस उपाय है।
पृष्ठ पर डॉ० मैक्सम्यूलर का कथन भी दिया गया है कि अगर सुखमय मृत्यु का प्रयोग करने की योजना सम्पादन करना तत्त्वचिन्तन का उद्देश्य हो तो वेदान्त जैसा दूसरा कोई साधन नहीं है, और यह भी कहा गया है कि उपनिषदों के अभ्यास जैसा कल्याण करने वाला दूसरा कोई भी अभ्यास नहीं है। यह पुस्तक आत्मज्ञान-पाठकों के लिये उपयोगी है। पृष्ठ पर यह भी बताया गया है कि इस भय से मुक्त होने के लिए पारम्परिक काल से ही भारतीय अध्यात्म-विचारा में ठोस उपाय बताया गया है, और वेदान्त के साथ-साथ उपनिषद-अभ्यास को भी कल्याणकारी माना गया है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- मंगलमय जीवन तथा मृत्यु की समझ
- आध्यात्मिक दृष्टि
- साधना तथा उपदेश
- प्रेरक प्रसंग
पुस्तक की मुख्य बातें
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