Mehakate Phool
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यह पुस्तक महकते फूल नाम से प्रकाशित हुई है, जिसका उपशीर्षक गुरु-भक्ति है। पैमाना लगभग 37 पृष्ठ का है और आवरण पर गुरु का चित्र तथा गुलाबों का समूह बना है।
अनुबंध में बताया गया है कि संसार में कई प्रकार के सम्बन्ध होते हैं, परन्तु सबसे विलक्षण, प्रिय और स्वामिष्ठ सम्बन्ध गुरु-शिष्य सम्बन्ध है, और इसमें स्वामी शिवानंद सरस्वती की पुस्तक गुरुभक्तियोग से लिया गया वाक्य भी दिया गया है कि गुरु-शिष्य का सम्बन्ध प्रिय एवं जीवनपर्यन्त का है। पृष्ठ के अंत में विनीत, श्री योग वेदान्त सेवा समिति, संत श्री आसारामजी आश्रम, अहमदाबाद का नाम दिया गया है।
अनुक्रम में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का गुरु-प्रेम, छत्रपति शिवाजी महाराज की गुरु-सेवा, बाबा फरीद की गुरुभक्ति, एकलव्य की गुरु-दक्षिणा, नाग महाराज का अंडुकृत गुरु-प्रेम, संत गोदावलेकर महाराज, श्यामा दिवेकानन्दजी, भाई लहगा, संत एकनाथजी, अगिरे खुसरो और उपसंयुक्त जैसे अनेक प्रकरण दिए गए हैं, जिनमें भक्ति और गुरु-सेवा का वर्णन मिलता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- बाल-कहानी तथा कविता संग्रह
- रोचक तथा शिक्षाप्रद
- नैतिक शिक्षा
- सरल भाषा
पुस्तक की मुख्य बातें
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